न्याय के लिए 45 वर्षों से लगा रहे चक्कर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Jan 2018 5:10 AM

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देवघर : डकैती के एक पुराने मामले के आरोपित विगत 45 वर्षों से कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं. हालांकि इस मामले के आरोपितों को तत्काल राहत मिल गयी है, लेकिन न्याय के लिए उनकी निगाहें कोर्ट पर अब भी टिकी है. सेशन जज चार लोलार्क दुबे की अदालत में चल रहे 45 वर्ष पुराने […]

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देवघर : डकैती के एक पुराने मामले के आरोपित विगत 45 वर्षों से कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं. हालांकि इस मामले के आरोपितों को तत्काल राहत मिल गयी है, लेकिन न्याय के लिए उनकी निगाहें कोर्ट पर अब भी टिकी है. सेशन जज चार लोलार्क दुबे की अदालत में चल रहे 45 वर्ष पुराने केस सेशन केस नंबर 88/1982 में दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपितों के विरुद्ध चल रही कार्रवाई स्थगित कर दी गयी. आदेश में कहा गया है कि जब तक पटना हाइकोर्ट से मूल अभिलेख इस न्यायालय को प्राप्त नहीं हो जाती है, अागे की कार्रवाई पर रोक रहेगी. घटना डकैती की है जो मधुपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 1974 में घटी थी. मालूम हो कि हाइकोर्ट रांची के निर्देश पर पुराने मामलों का त्वरित निष्पादन कार्य देवघर सिविल कोर्ट में चल रहा है.

क्या है यह मामला: एक डकैती की घटना को लेकर मधुपुर थाना कांड संख्या 7(3)/1974 दर्ज किया गया था. इसमें कई लोगों को आरोपित बनाया गया है. ट्रायल के दौरान कई आरोपितों की मौत भी हो चुकी है. इस वाद के सात आरोपित फिलहाल केस लड़ रहे हैं और न्याय के लिए कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं. इसमें विरजा महतो, हातीम मियां, श्री महतो, कामदेव पांडेय, टिकैत राउत, जागेश्वर कोल व अविनाश राय आरोपित हैं.
दाखिल किया था क्रिमिनल मिस पटना हाइकोर्ट में
इस मामले के आरोपितों की ओर से पटना हाइकोर्ट में क्रिमिनल मिस पिटीशन संख्या 523/1988 दाखिल किया था, जिसमें पटना हाइकोर्ट ने लोअर कोर्ट का मूल अभिलेख मांगा था. लोअर कोर्ट से मूल अभिलेख पटना हाइकोर्ट चला गया व लोअर कोर्ट के आदेश पर राेक लगा दी गयी थी. बाद में राज्य का विभाजन हुआ, लेकिन अभिलेख हाइकोर्ट से लोअर कोर्ट में वापस नहीं आने से मामला लंबित रहा. केस के आरोपित न्याय के लिए चक्कर लगाते रहे. इधर सेशन जज चार लोलार्क दुबे की अदालत द्वारा कई बार पत्र भेज कर मूल अभिलेख वापस करने का आग्रह किया, लेकिन रिकॉर्ड वापस नहीं आया. कोर्ट ने न्याय हित में इस पुराने रिकॉर्ड में आदेश पारित कर तत्काल आरोपितों को राहत दे दी. मूल अभिलेख वापस आने के बाद फिर कार्रवाई आरंभ कर दी जायेगी.
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