चतरा के प्रतापपुर में दहेज के लिए विवाहिता के साथ मारपीट का आरोप, थाने में शिकायत दर्ज
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 19 May 2026 6:03 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर
Chatra News: चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र में एक विवाहिता ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. पीड़िता ने मारपीट, जान से मारने की धमकी और वाहन तोड़फोड़ की शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस दोनों पक्षों के आवेदन पर जांच कर रही है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
चतरा से दीनबंधू और बिहारी की रिपोर्ट
Chatra News: झारखंड के चतरा जिले के प्रतापपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत राजपुर गांव की एक विवाहिता ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. पीड़िता ने थाना में आवेदन देकर पति, सास और ससुर के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई है. साथ ही मायके पक्ष के लोगों के साथ मारपीट और वाहन में तोड़फोड़ करने का भी आरोप लगाया गया है. मामले को लेकर पुलिस ने दोनों पक्षों से आवेदन प्राप्त कर जांच शुरू कर दी है. घटना के बाद गांव में भी मामले को लेकर चर्चा तेज है.
2015 में हुई थी शादी
पीड़िता राजबाला कुमारी ने थाना में दिए आवेदन में बताया कि वर्ष 2015 में उनकी शादी राजपुर गांव निवासी सुधीर यादव, पिता रामजी यादव के साथ हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार हुई थी. शादी के कुछ समय बाद से ही पति, सास और ससुर की ओर से दहेज को लेकर दबाव बनाया जाने लगा. राजबाला का आरोप है कि ससुराल वाले मायके से पांच से आठ लाख रुपये लाने की मांग करते थे. जब वह या उनका परिवार पैसे देने में असमर्थता जताता था तो उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज की जाती थी. उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार लाठी-डंडे से पिटाई की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई.
समझौता कराने पहुंचे परिजनों के साथ मारपीट
पीड़िता ने बताया कि वह कुछ समय से गांव में अपनी फुआ के घर रह रही थी. 18 मई को विवाद को सुलझाने और समझौता कराने के लिए उनके पिता विशुनदेव अंगार, भाई रंजीत यादव और अन्य परिजन राजपुर गांव पहुंचे थे. आरोप है कि बातचीत के दौरान पति सुधीर यादव, सास और ससुर ने अचानक गाली-गलौज शुरू कर दी और मारपीट पर उतारू हो गए. राजबाला के अनुसार आरोपियों ने तलवार और लोहे की रॉड निकालकर हमला करने की कोशिश की. स्थिति बिगड़ने पर मायके पक्ष के लोग जान बचाने के लिए पड़ोस के एक घर में छिप गए. पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान उनके भाई के चार पहिया वाहन में भी तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया गया.
पुलिस से की कार्रवाई की मांग
राजबाला कुमारी ने थाना में आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि लगातार प्रताड़ना के कारण उनका जीवन असुरक्षित हो गया है और उन्हें न्याय की उम्मीद पुलिस प्रशासन से है. मामले को लेकर महिला के मायके पक्ष में भी आक्रोश देखा जा रहा है. परिजनों का कहना है कि लंबे समय से उनकी बेटी को परेशान किया जा रहा था, लेकिन अब स्थिति गंभीर हो गई है.
दूसरे पक्ष ने भी लगाया आरोप
वहीं मामले में दूसरे पक्ष की ओर से पति सुधीर यादव ने भी थाना में आवेदन दिया है. उन्होंने अपने आवेदन में आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी पत्नी के मायके पक्ष को ट्रैक्टर खरीदने, धान क्रय करने और इलाज कराने के लिए करीब साढ़े आठ लाख रुपये दिए थे. सुधीर यादव का कहना है कि जब वह अपने पैसे वापस मांगते हैं तो पत्नी और उसके परिवार वाले उन पर दहेज प्रताड़ना का झूठा आरोप लगाते हैं. उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
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जांच में जुटी पुलिस
प्रतापपुर थाना प्रभारी आलोक रंजन चौधरी ने बताया कि दोनों पक्षों से आवेदन प्राप्त हुआ है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के आरोपों की सत्यता की जांच के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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