चतरा में 15 नदियों पर अब तक नहीं बने पुल, बरसात में कई गांव बन जाते हैं टापू

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फोटो। नदी पार कर स्कूल जाते बच्चे   नदी पर पुल बनाने की मांग करते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network

नदी पर पुल बनाने की मांग करते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network

जिले के कुंदा प्रखंड में 15 नदियों पर पुल नहीं होने से ग्रामीण परेशान हैं. बरसात में गांव टापू बन जाते हैं और स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है.

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कुंदा (चतरा): एक ओर पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चतरा जिले का कुंदा प्रखंड आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. प्रखंड की करीब 15 प्रमुख नदियों पर अब तक पुल-पुलिया का निर्माण नहीं हो सका है. इसके कारण हर वर्ष बरसात के मौसम में दर्जनों गांवों का संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है. ग्रामीणों का जीवन प्रभावित होता है और कई गांव टापू में तब्दील हो जाते हैं.

पूरी तरह बाधित हो जाता है आवागमन

बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है. स्कूली बच्चों और आंगनबाड़ी केंद्र जाने वाले बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है. एक गांव से दूसरे गांव का संपर्क भी टूट जाता है. वहीं, बीमार लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाती है. कई गांवों के लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला राशन भी समय पर नहीं उठा पाते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सरकार से पुल-पुलिया निर्माण की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है.

प्रखंड के कोजरम गांव की हथवार एवं द्वारपार नदी, लोटवा गांव की पथरा नदी, बनियाडीह गांव की हरिनबंधवा और बांझा नदी, हारूल गांव की बिच्छुलिया नदी, बाचकुम गांव की कोयल नदी, उलवार गांव की जमुना नदी, मसूरिया तरी गांव की निलांजन नदी, सीधाबारी गांव की पत्थर कुदवा नदी, कुटिल-गोईनदी गांव की दूधमटिया नदी, रजवाड़ गांव की सिंदुरिया नदी और बंठा गांव की बड़की नदी सहित कई अन्य नदियों पर आज तक पुल-पुलिया का निर्माण नहीं हो पाया है. इसका सीधा असर हजारों ग्रामीणों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है.

अक्सर किसी अनहोनी का बना रहता है डर

ग्रामीण लक्ष्मण गंझू ने बताया कि नदी पर पुल नहीं होने के कारण लोगों को घंटों नदी का पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है. बरसात के दिनों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है, जिससे किसानों, मजदूरों और छात्रों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है. वहीं संजय गंझू ने कहा कि नदी में जलस्तर बढ़ने पर स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करानी पड़ती है. हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहता है. उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है.

विधायक जनार्दन पासवान ने कहा कि क्षेत्र में सड़क और पुल-पुलिया निर्माण को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि डीएमएफटी मद से कुंदा प्रखंड की नवादा पंचायत के टटेज गांव की दोनों नदियों पर पुल निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है. इसके अलावा लुकुइया-बुकुइया गांव सड़क निर्माण का टेंडर भी हो चुका है. उन्होंने बताया कि बुटकुइया नदी पर पुल निर्माण के लिए हाल ही में इंजीनियरों द्वारा प्राक्कलन संबंधी परीक्षण कराया गया है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में क्षेत्र की अन्य नदियों पर भी पुल और सड़कों का निर्माण कराया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को आवागमन की समस्या से स्थायी राहत मिल सके.


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Dinbandhu Thakur

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