Chaibasa News : कानपुर बांध का गेट खुला, वैतरणी नदी को मिली संजीवनी

Edited by ATUL PATHAK
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स्विस गेट निर्माण के लिए बंद किया गया था पानी, निचले इलाकों में मचा था त्राहिमाम

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जैंतगढ़. ओडिशा की दूसरी सबसे बड़ी और जीवनदायिनी वैतरणी नदी आखिरकार अपने मूल रूप में लौटने लगी है. कानपुर बांध में स्विस गेट निर्माण के कारण करीब तीन महीने से बंद पानी को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत छोड़ दिया गया है. इससे झारखंड और ओडिशा के लाखों लोगों को जल संकट से बड़ी राहत मिली है. बुजुर्गों के अनुसार, वैतरणी नदी में ऐसा पहली बार हुआ, जब फरवरी माह से नदी सूखने लगी और मार्च आते-आते बिल्कुल मैदान में तब्दील हो गयी. स्थिति यह थी कि लोग बिना पैर भिगोये नदी पार कर रहे थे. केवल कुछ गड्ढों में नाममात्र का पानी बचा था. 1 फरवरी से गेट बंद होने के कारण निचले इलाकों में हाहाकार मच गया था.

जैंतगढ़ में ठप होने के कगार पर थी जलापूर्ति:

जैंतगढ़ ग्रामीण जलापूर्ति केंद्र के कर्मियों ने बताया कि इंटेक वेल के पास गड्ढा खोदकर किसी तरह कटौती के साथ पानी की सप्लाई की जा रही थी. वहां केवल एक सप्ताह का पानी शेष था. अगर समय पर पानी नहीं छोड़ा जाता, तो क्षेत्र की जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो जाती.

दो राज्यों की लाइफलाइन है वैतरणी

विदित हो कि इस नदी पर ओडिशा के लाखों लोगों के साथ-साथ झारखंड के नोवामुंडी, जगन्नाथपुर और मझगांव प्रखंड के दर्जनों गांवों की खेती और पेयजल व्यवस्था टिकी है. पानी छोड़े जाने के बाद अब नदी में जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

प्रभात खबर ने उठाया था मामला

इस गंभीर मुद्दे को ””””प्रभात खबर”””” ने प्राथमिकता के साथ प्रकाशित किया था. खबरों के प्रभाव और सामाजिक संगठनों के दबाव के बाद प्रोजेक्ट इंचार्ज को अपनी योजना बदलनी पड़ी. पहले मानसून तक गेट बंद रखने की बात कही गयी थी, लेकिन जनहित को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था कर पानी छोड़ा गया.

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