Chaibasa News : शोषितों की आवाज बनकर उभरा है दलित साहित्य : प्रो शाबिद
Edited by AKASH
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नोवामुंडी कॉलेज में हिंदी दलित साहित्य पर कार्यशाला आयोजित
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तस्वीर: 29 नोवामुंडी 1कार्यशाला में जानकारी देते शिक्षक
प्रतिनिधि, नोवामुंडी
नोवामुंडी कॉलेज में हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो शाबिद हुसैन की अध्यक्षता में ””””हिंदी दलित साहित्य : स्वर, संवेदना और सामाजिक परिवर्तन”””” विषय पर कार्यशाला आयोजित की गयी. कार्यशाला में विद्यार्थियों, शोधार्थियों व शिक्षकों को दलित साहित्य की सामाजिक प्रासंगिकता, संवेदनात्मक गहराई व परिवर्तनकारी भूमिका के बारे में बताया गया. हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो शाबिद हुसैन ने कहा कि हिंदी साहित्य की दुनिया में दलित साहित्य एक ऐसी सशक्त धारा के रूप में उभरा है. इससे न केवल सामाजिक व्यवस्था को झकझोरा है, बल्कि साहित्य के स्वरूप और उद्देश्य को भी परिभाषित किया है. उन्होंने कहा कि दलित साहित्य वह साहित्य है जो सदियों से वंचित, उपेक्षित और उत्पीड़ित समाज की आवाज बनकर उभरा है. प्रो भवानी कुमारी ने बताया कि दलित साहित्य वह चेतना है, जो शोषित वर्ग की आवाज बनकर समग्र समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है.इन्होंने भी रखे विचार
डॉ मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि दलित साहित्य सामाजिक न्याय का साहित्य है. मौके पर प्रो. परमानंद महतो, राजकरण यादव, संतोष पाठक व छात्राओं में पूजा कैवर्त एवं निशा दास ने भी विचार साझा किये. इस अवसर पर प्रो परमानंद महतो, डॉ मुकेश सिंह, संतोष पाठक, राजकरण यादव, धनीराम महतो, तन्मय मंडल, नरेश पान, लक्ष्मी मोदक, मंजूलता सिंकू सहित काफी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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