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Yogendra Prasad News: पंचायत अध्यक्ष से झारखंड का मंत्री बनने तक का ऐसा रहा है योगेंद्र प्रसाद का सफर

Updated at : 05 Dec 2024 9:00 PM (IST)
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राजभवन में मंत्री के रूप में शपथ लेते योगेंद्र प्रसाद.

Yogendra Prasad Political Journey: गोमिया विधायक योगेंद्र प्रसाद झारखंड के मंत्री बने हैं. पंचायत अध्यक्ष से मंत्री बनने तक की उनकी ऐसी रही है राजनीतिक यात्रा.

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Yogendra Prasad News|कसमार (बोकारो), दीपक सवाल : लगभग 21 साल के बाद गोमिया के किसी विधायक को एक बार फिर मंत्री बनने का मौका मिला है. करीब 95 हजार वोट पाकर गोमिया विधानसभा सीट पर जीतने वाले योगेंद्र प्रसाद को हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनाया गया है.

माधवलाल सिंह और छत्रुराम महतो बन चुके हैं मंत्री

इससे पहले माधवलाल सिंह वर्ष 2000 में नवंबर महीने तक अविभाजित बिहार में राबड़ी देवी की सरकार में और फिर 18 मार्च 2003 से 2005 तक अर्जुन मुंडा की सरकार में झारखंड सरकार में परिवहन मंत्री बनाये गये थे. योगेंद्र प्रसाद गोमिया के तीसरे विधायक हैं, जिन्हें मंत्री बनाया गया है. अविभाजित बिहार में छत्रुराम महतो भी वित्त राज्यमंत्री बने थे.

योगेंद्र प्रसाद के मंत्री बनने की खुशी में बंटी मिठाइयां, फूटे पटाखे

योगेंद्र प्रसाद को हेमंत सोरेन सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर शुरू से कयास लगाये जा रहे थे. गुरुवार को जैसे ही पता चला कि योगेंद्र प्रसाद मंत्री बन रहे हैं, समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई. जगह-जगह मिठाइयां बंटने लगीं. पटाखे छोड़े जाने लगे.

दो बार विधायक बनने वाले पहले विधायक बने योगेंद्र प्रसाद

इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में योगेंद्र प्रसाद ने इस बार न केवल सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि गोमिया विधानसभा सीट पर दो बार जीतने का भी रिकॉर्ड बना दिया है. वर्ष 2014 में उन्हें 97 हजार से अधिक वोट मिले थे. उस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता माधवलाल सिंह को योगेंद्र प्रसाद ने शिकस्त दी थी.

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95170 वोट मिले योगेंद्र प्रसाद को

वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में योगेंद्र प्रसाद को 95,170 वोट मिले. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जेएलकेएम प्रत्याशी पूजा कुमारी को 36,093 मतों के अंतर से पराजित किया. पूजा कुमारी को 59,077 वोट मिले. एनडीए प्रत्याशी डॉ लंबोदर महतो को 54,508 वोट मिले थे.

गोमिया में खुद तैयार की अपनी राजनीतिक जमीन

योगेंद्र प्रसाद मूल रूप से रामगढ़ जिले के मुरूबंदा निवासी हैं. कांग्रेस पार्टी में एक पंचायत अध्यक्ष के रूप में राजनीति शुरू की थी. फिर जिला अध्यक्ष से विधायक बनने का सफर काफी दिलचस्प एवं संघर्षपूर्ण रहा. यूं कहें कि योगेंद्र प्रसाद ने गोमिया विधानसभा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन खुद तैयार की. हजारीबाग जिले के रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत बड़की पोना पंचायत कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष से लेकर झारखंड विधानसभा के सदस्य और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचे. उनकी छवि जुझारू और संघर्षशील नेता की है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे.

अपने समर्थकों के साथ योगेंद्र प्रसाद (हैट पहने हुए). फोटो : प्रभात खबर

संघर्षों से भरी है योगेंद्र प्रसाद की दास्तां

मुरूबंदा निवासी साधारण कुड़मी किसान घर में जन्मे योगेंद्र 3 भाइयों में सबसे बड़े हैं. प्रारंभिक शिक्षा बुनियादी स्कूल, मुरूबंदा में हुई. पहली से आठवीं तक क्लास के मॉनिटर रहे. 1983 में मैट्रिक की परीक्षा केबी हाइ स्कूल, लारी से पास की. यहां भी क्लास मॉनिटर रहे. छोटानागपुर कॉलेज रामगढ़ से वर्ष 1988 में स्नातक की परीक्षा पास की. इसी बीच, 1986 में तत्कालीन विधायक यमुना प्रसाद शर्मा से जुड़ गए. सबसे पहले कांग्रेस सेवादल बड़की पोना पंचायत के अध्यक्ष बने.

इसी वर्ष रामगढ़ प्रखंड कांग्रेस के अध्यक्ष बनाये गये. वर्ष 1986-1990 तक कांग्रेस विधायक यमुना प्रसाद शर्मा के विधायक प्रतिनिधि रहे. वर्ष 1991 में कांग्रेस पार्टी हजारीबाग जिला उपाध्यक्ष बने. फिर 1995 में जिलाध्यक्ष भी बने. कुछ महीने बाद ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गये.

वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य का गठन हुआ, तो वह सुदेश महतो की पार्टी आजसू में शामिल हो गए. वर्ष 2007 में आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने गोमिया विधानसभा क्षेत्र में आजसू की जमीन तैयार करने के लिए योगेंद्र प्रसाद को गोमिया में सक्रिय किया. उन्होंने वर्ष 2009 का विधानसभा चुनाव गोमिया विधानसभा से लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे. आजसू के केंद्रीय महासचिव को वर्ष 2014 में पार्टी ने टिकट नहीं दिया, तो वह झामुमो में शामिल हो गए. 97 हजार से अधिक वोट लाकर गोमिया के विधायक बने. झामुमो ने उन्हें केंद्रीय प्रवक्ता और सचिव की भी जिम्मेदारी दी.

2018 में योगेंद्र की पत्नी बनीं विधायक

विधायक बनने के 3 वर्ष बाद वर्ष 2018 में एक मामले में कोर्ट ने योगेंद्र प्रसाद की विधायिकी समाप्त कर दी. उसके बाद गोमिया विधानसभा उपचुनाव में उनकी पत्नी बबीता देवी विधायक बनीं. वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी फिर चुनाव लड़ीं, लेकिन आजसू के डॉ लंबोदर महतो ने उन्हें पराजित कर दिया. वर्ष 2022 में योगेंद्र महतो को झारखंड राज्य समन्वय समिति का सदस्य एवं बाद में जनवरी 2024 में झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया गया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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