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Success Story: बंजर भूमि पर सब्जी उगाकर स्वरोजगार की नयी राह दिखा रहे जयप्रकाश महतो

Updated at : 14 Mar 2025 3:40 PM (IST)
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लीज पर 14 एकड़ जमीन लेकर खेती कर रहे जयप्रकाश. फोटो : प्रभात खबर

Success Story: बोकारो जिले के कसमार प्रखंड में एक युवक कई साल से बंजर भूमि पर खेती करके अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं. 10 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. ऐसी है जयप्रकाश की कहानी.

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Success News| कसमार (बोकारो), दीपक सवाल : स्नातक की पढ़ाई करने के बाद अधिकतर युवक छोटी-मोटी नौकरी की तलाश में जुट जाते हैं. नौकरी की आस में वर्षों भटकते हैं, लेकिन जयप्रकाश महतो ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती करने की ठानी. आज वह अपने गांव में बंजर भूमि पर खेती करके मोटी कमाई कर रहे हैं. तरह-तरह की सब्जियों की खेती करते हैं. जयप्रकाश कसमार प्रखंड के बगदा पंचायत के मुंगो गांव के रहने वाले हैं. गांव में ही खांजो नदी के किनारे मां छिन्नमस्तिका मंदिर के निकट उनकी 2 एकड़ पैतृक जमीन है. उस पर उनके पिता भुवनेश्वर महतो पिछले कई दशक से खेती कर रहे हैं. करीब 8 साल पहले रामगढ़ कॉलेज, रामगढ़ से स्नातक करने के बाद कुछ समय तक जयप्रकाश ने भी नौकरी की तलाश की. मन लायक नौकरी नहीं मिली, तो पिता के रास्ते पर चलने का निर्णय लिया.

2021 में लीज पर ली थी 14 एकड़ बंजर जमीन

जयप्रकाश ने अपनी पैतृक भूमि के बगल में ही बंजर पड़ी लगभग 14 एकड़ टांड़ भूमि को वर्ष 2021 में लीज पर लिया. इस जमीन पर खेती शुरू कर दी. वह हर साल कद्दू, झींगा, करेली, परवल, कोहड़ा, दमबोदी, खीरा, तरबूज, टमाटर, बैंगन, मकई समेत और कई तरह की सब्जियों की खेती करते हैं. वह बताते हैं कि उपजायी गयी अधिकतर सब्जियां खैराचातर के हाट-बाजार में खप जाती हैं. जयप्रकाश ने बताया कि खेती से उन्हें हर वर्ष अच्छी-खासी आमदनी हो जाती है.

जयप्रकाश महतो. फोटो : प्रभात खबर

जैविक खाद का करते हैं उपयोग

खास बात तो यह है कि जयप्रकाश खेती में जैविक खाद का ही उपयोग करते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 5 साल में छटांक भर भी यूरिया का उपयोग नहीं किया. वह कहते हैं कि इससे उपज भले थोड़ी कम होती है, लेकिन इस बात की संतुष्टि होती है कि लोगों को कीटनाशक रहित सब्जियां उपलब्ध करा पाते हैं. उनकी फसल खाकर किसी के स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होता. उन्होंने कहा कि जैविक खाद के उपयोग की वजह से ही इनकी सब्जियां और सभी फसलें आसानी से बिक जाती हैं.

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खांजो नदी से करते हैं पटवन

जयप्रकाश महतो खांजो नदी के पानी से अपने खेतों में पटवन करते हैं. करीब 300-400 मीटर की दूरी पर यह नदी है. मोटर लगाकर पाइप के जरिये खेतों तक पानी पहुंचाते हैं. इससे दिक्कत तो होती है, लेकिन फिलहाल सिंचाई के लिए अन्य कोई उपाय भी नहीं है. जयप्रकाश ने कहा कि आगे सिंचाई का साधन मिल जाये, तो खेती और भी अच्छी तरह से हो सकती है.

बंजर भूमि पर उगायी गयी सब्जियां. फोटो : प्रभात खबर

10 लोगों को दे रहे रोजगार

जयप्रकाश ने खेती शरू की, तो 10 स्थानीय ग्रामीण महिला-पुरुषों को नियमित रोजगार मिला. ये सभी खेती में मदद करते हैं. इसके एवज में सभी को मजदूरी का भुगतान किया जाता है. जयप्रकाश ने बताया कि खेती को और विस्तार देने की योजना है. इससे और भी अधिक ग्रामीणों को रोजगार मिल सकेगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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