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Bokaro News : प्रेरणादायी है ट्रक चालक की बेटी के कांस्टेबल बनने की कहानी

Updated at : 07 Mar 2025 11:04 PM (IST)
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Bokaro News : प्रेरणादायी है ट्रक चालक की बेटी के कांस्टेबल बनने की कहानी

Bokaro News : बेरमो कोयलांचल के संडे बाजार निवासी ट्रक चालक मो अली अख्तर की बेटी परवीन अख्तर का ऑल इंडिया ताइक्वांडो में गोल्ड मेडल जीतने से लेकर कांस्टेबल बनने तक का सफर प्रेरणादायक है.

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राकेश वर्मा, बेरमो : बेरमो कोयलांचल के संडे बाजार निवासी ट्रक चालक मो अली अख्तर की बेटी परवीन अख्तर का ऑल इंडिया ताइक्वांडो में गोल्ड मेडल जीतने से लेकर कांस्टेबल बनने तक का सफर प्रेरणादायक है. 17 मार्च 2021 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेशनल गेम्स में मेडल जीतने वाले जमशेदपुर, रांची व धनबाद के 40 खिलाड़ियों को नियुक्त पत्र सौंपा था. इसमें परवीन अख्तर भी शामिल थीं. परवीन फिलहाल जमशेदपुर शक्ति कमांडो में कांस्टेबल के पद पर पदस्थापित हैं. सड़क पर स्कूली छात्राओं और लड़कियों के साथ छेड़खानी नहीं हो, इस पर पैनी नजर रखती हैं. लड़कियों व छात्राओं में लड़ने के लिए जज्बा व आत्मविश्वास भी पैदा करती हैं.

ट्राउजर खरीदने के लिए नहीं थे पैसे

परवीन ने संडे बाजार स्थित शिशु विकास विद्यालय से पांचवीं तक की पढ़ाई की. इसी दौरान उसका लगाव ताइक्वांडो खेल की तरफ हुआ और वह निरंतर अभ्यास में जुट गयी. क्लास छह से 10 तक की पढ़ाई खासमहल (अब गांधीनगर) स्थित कृष्णा सुदर्शन सेंट्रल स्कूल से की. प्राचार्य व फिलहाल निदेशक डॉ एसके सिंह के प्रयास से यहां से उसे निशुल्क शिक्षा दी गयी. उस दौरान घर की माली हालत ठीक नहीं रहने के कारण परवीन के पास खेल में हिस्सा लेने के लिए ट्राउजर खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे. लेकिन उसने अपना आत्मबल को कभी गिरने नहीं दिया तथा निरंतर ताइक्वांडो प्रतियोगिता में हिस्सा लेती रही और मेडल जीतती रही. 10वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद परवीन ने केबी कॉलेज बेरमो से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद 2017-19 में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन नागपुर यूनिवर्सिटी से किया. वर्ष 2021 में जॉब मिलने के बाद भी उसने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी. नागपुर यूनिवर्सिटी से ही मास्टर ऑफ फिजिकल एडुकेशन की डिग्री ली.

जीते कई पदक

वर्ष 2006 में स्कूली पढ़ाई के दौरान धनबाद में आयोजित ताइक्वांडो स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल

वर्ष 2011 में झारखंड में आयोजित बिरसा मुंडा ताइक्वांडो राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल

वर्ष 2014 में केरला में हुए नेशनल ताइक्वांडो गेम्स में कांस्य पदक

वर्ष 2017 में हरियाणा में आयोजित ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में कांस्य पदक

जून 2024 में आसाम में आयोजित ऑल इंडिया ताइक्वांडो पुलिस गेम्स में कांस्य पदक

जनवरी 2024 में जयपुर में आयोजित नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल

सितंबर 2024 में झारखंड में आयोजित ओपेन नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में रजत पदक

लड़कियों को हौसला बुलंद रखना चाहिए : परवीन

परवीन ने शुक्रवार को प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि घर की माली हालत ठीक नहीं होने के कारण काफी कठिनाइयों के दौर से गुजरना पड़ा. प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए बाहर जाते समय कभी उसके पास मात्र 200 रुपये हुआ करते थे. लेकिन मेरी उपलब्धि के पीछे माता-पिता का संघर्ष रहा. कई लोग कहा करते थे कि ताइक्वांडो का खेल खेलती है, हाथ-पैर टूट जायेगा तो इससे शादी कौन करेगा. परवीन ने कहा कि लड़कियों को हौसला बुलंद रखना चाहिए. पुरुषों से किसी मामले में महिलाएं पीछे नहीं हैं. आज हर क्षेत्र में महिलाओं का डंका बज रहा है. परवीन के पिता मो अली अख्तर ने कहा कि बेटी पर नाज है. उसकी मां सबीहा बानो भी परवीन के संघर्षों में साथ खड़ी रही. मो अली अख्तर के तीन पुत्री व दो पुत्र हैं. दो बेटी नाहीद अख्तर व साहीन अख्तर की शादी हो चुकी है. एक बेटा दुबई में इलेक्ट्रिशियन तथा एक बेटा टाटा में पढ़ाई कर रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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