BOKARO NEWS : बेरमो के दो सीएचपी का शिलान्यास करेंगे प्रधानमंत्री

Updated at : 24 Sep 2024 10:40 PM (IST)
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BOKARO NEWS : बेरमो के दो सीएचपी का शिलान्यास करेंगे प्रधानमंत्री

BOKARO NEWS : सीसीएल के बीएंडके एरिया अंतर्गत कोनार एवं कारो परियोजना में बनने वाले सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट) का ऑनलाइन शिलान्यास दो अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे.

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गांधीनगर. सीसीएल के बीएंडके एरिया अंतर्गत कोनार एवं कारो परियोजना में बनने वाले सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट) का ऑनलाइन शिलान्यास दो अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. उस दिन प्रधानमंत्री का झारखंड में कार्यक्रम प्रस्तावित है. सीसीएल के डीटी (पीएंडपी) सतीश कुमार झा ने मंगलवार को खासमहल कोनार परियोजना का निरीक्षण किया. उन्होंने कोनार परियोजना के लिए बरवाबेड़ा गांव के समीप बनने वाले सीएचपी के प्रारंभिक कार्यों को देखा और वहां कार्य कर रही कंपनी के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिया. उन्होंने माइंस के प्रस्तावित व्यू प्वाइंट स्थल से माइंस का अवलोकन किया और जीएम के रामकृष्णन, पीओ केएस गेवाल, खान प्रबंधक सुमेधा नंदन आदि से माइंस विस्तार के बारे में जानकारी ली. उत्पादन गति में तेजी लाने और माइंस की स्थिति और बेहतर करने के निर्देश दिया.

पत्रकारों से बातचीत में डीटी ने कहा कि एक रैक को भरने में तीन से पांच घंटे का समय लगता है. सीएचपी बनने के बाद एक घंटा में ही एक रैक लोड हो जायेगा. साथ रोड ट्रांसपोर्टिंग के कारण होने वाला प्रदूषण नहीं होगा. रैक में ओवरलोडिंग व अंडर लोडिंग की समस्या समाप्त हो जायेगी. कहा कि जहां भी चार मिलियन टन या उससे अधिक क्षमता वाली माइंस खुल रही है, वहां सीएचपी बन रहा है. उन्होंने कहा कि सीसीएल में भी हाइवाल माइनिंग की शुरुआत हो गयी है. बेरमो के ढोरी क्षेत्र में हाइवाल माइनिंग की जायेगी. यहां मशीन आ गयी है. परंतु कुछ परमिशन का मामला है.

बंद खदानों को खोलने को लेकर प्रबंधन गंभीर

डीटी ने कहा कि बंद खदानों को खोलने को लेकर भी कंपनी गंभीर है. कई बंद खदानें खोली जा रही हैं. कुजू एरिया की सारुबेड़ा में माइंस पुन: शुरू हुई है. इसके दूसरे पैच में भी कार्य शुरू हो रहा है. बेरमो की अंगवाली पिछरी माइंस में भी उत्पादन शुरू होगा. यहां टॉप सिम से कोयला निकासी कर ली गयी है. अब नीचे से कोयला निकाला जाना है. बोकारो कोलियरी में भी फज टू का अप्रूवल मिल गया है. यहां से प्रति वर्ष दो मिलियन टन कोयला का उत्पादन होगा. माइंस विस्तार में विस्थापितों का अहम योगदान है. उनकी समस्याओं के निदान को लेकर भी प्रबंधन गंभीर है. राज्य विभाजित होने के बाद कई रिकॉर्ड रैयतों के पास नहीं है. इसके कारण उन्हें अपनी जमीन की पहचान कराने में परेशानी हो रही है. जिनका लैंड रिकॉर्ड सही है, उन्हें प्रावधान के तहत मुआवजा, नौकरी व सुविधा दी जा रही है. मौके पर केडी प्रसाद, शंभू झा, बीके ठाकुर, गौतम मोहंती, सत्येंद्र सिंह, मैनेजर सुमेधानंद सहित कई अधिकारी उपस्थित थे.

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