Bokaro News : जिला परिषद की बैठक में नहीं हो सका कोई निर्णय
Published by : JANAK SINGH CHOUDHARY Updated At : 22 May 2026 11:50 PM
Bokaro News : जिला परिषद की सामान्य बैठक 90 दिन की जगह 153 दिन बाद हुई, इसमें भी कोई निर्णय नहीं हुआ.
जिला परिषद की सामान्य बैठक 90 दिन की जगह 153 दिन बाद हुई, इसमें भी कोई निर्णय नहीं हुआ. इससे पहले बैठक दिसंबर में हुई थी. शुक्रवार को जिप कार्यालय के सभागार में हुई बैठक की अध्यक्षता जिप अध्यक्ष सुनीता देवी ने की. बैठक में हर जिला परिषद क्षेत्र में एंबुलेंस की सुविधा देने व पेयजल की समस्या को देखते हुए 10-10 चापाकल लगाने, लाभुक समिति की ओर से टेंडर निकालने की बात उठी. इसका लगभग हर जिप सदस्य ने समर्थन किया. पिछली बैठक में प्रतिवेदन व अनुपालन की समीक्षा की गयी. लेकिन, जानकारी के मुताबिक कोई निर्णय बैठक में नहीं हुआ. जिप उपाध्यक्ष बबीता देवी ने बताया कि बैठक में कोई निष्कर्ष नहीं निकला.
सदस्यों के एजेंडा स्वीकार करने के बजाय डीडीसी
शताब्दी मजूमदार ने जिप का बजट व आय स्रोत देखने की बात कही. इसके बाद ही एजेंडा स्वीकार करने की बात उनकी तरफ से कही गयी. इस परसदस्यों ने कहा कि जब एजेंडा पर स्वीकार्यता ही नहीं होगी, तो बैठक का क्या मतलब. जिप उपाध्यक्ष ने बताया कि बैठक के दौरान एक लाभुक समिति बनाने की मांग हुई. इसी समिति के जरिये टेंडर व काम करने की बात हुई. इस पर सभी
सदस्यों ने सहमति जतायी. जिप सदस्य रिंपा चक्रवर्ती ने कहा कि क्षेत्र में सड़क की सुविधा बहाल हो. हर घर तक नल से जल पहुंचे, इस दिशा में तेजी से काम हो. बैठक में सभी सदस्य व विभागीय पदाधिकारी मौजूद थे. सदस्यों ने कहाजिप सदस्य डॉ सुरेंद्र राज ने कहा कि जिला परिषद चारागाह बन गया है. किसी कार्य की गुणवत्ता पर चर्चा तक नहीं होती. 6.80 लाख रुपया की लागत से एक सोलर डीप बोरिंग लगता है. ठेकेदार को तीन साल तक इसका देखभाल करना है, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है. ज्यादातर सोलर डीप बोरिंग व लिफ्ट एरिगेशन सिस्टम बेकार पड़ा है. संवेदक कोई भी टेंडर 30-35 प्रतिशत नीचे हासिल कर रहा है. इससे गुणवत्ता प्रभावित होती है. जिप
सदस्यों ने कार्य गुणवत्ता के दृष्टिकोण से सुझाव दिया कि जिस क्षेत्र में काम हो रहा है, उसका लेखा-जोखा संबंधितसदस्यों के पास रहे. जिप सदस्य के मुआयना व एनओसी निर्गत किये जाने के बाद ही संवेदक को काम का पेमेंट किया जाये. जिप सदस्य ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि जिप सदस्य बनने के साथ ही पहला एजेंडा गोदोनाला की सफाई का था. इसकी सफाई डीएफएमटी फंड से कराने की मांग की गयी थी. लेकिन, इस पर कोई काम नहीं हुआ. अधिकारी को स्पष्ट कर देना चाहिए कि नाला की सफाई होगी या नहीं.
उन्हीं योजनाओं पर खर्च करना है, जो आय का स्रोत बने : डीडीसीडीडीसी ने बताया कि जिला परिषद के तहत
उन्हीं योजनाओं पर खर्च करना है, जो आय का स्रो बन सके. योजना के नाम पर डुप्लीकेशन नहीं होना चाहिए. जिला में 24 हजार से अधिक चापाकल क्षेत्र में हैं. फिर से चापाकल लगाने की मांग डुप्लीकेशन का कारण बनेगा, भविष्य में फिर इसे जस्टिफाई नहीं किया जा सकेगा.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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