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Bokaro News : घट रहा मैनपावर, बढ़ रहा प्रोडक्शन, फिर भी इंसेंटिव फॉर्मूला 18 वर्ष पुराना

Updated at : 09 Dec 2024 1:44 AM (IST)
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Bokaro News : घट रहा मैनपावर, बढ़ रहा प्रोडक्शन, फिर भी इंसेंटिव फॉर्मूला 18 वर्ष पुराना

Bokaro News : बीएकेएस ने निदेशक कार्मिक सेल को लिखा पत्र, इंसेंटिव रिवार्ड फॉर्मूले में संशोधन की मांग

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Bokaro News : सुनील तिवारी, बोकारो. सेल-बीएसएल में जहां साल-दर-साल मैनपावर घट रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रोडक्शन व लेबर प्रोडक्टिविटी बढ़ रहा है. फिर भी 18 वर्ष पुराना इंसेंटिव फॉर्मूला लागू है. बीएकेएस ने निदेशक कार्मिक सेल को लिखा पत्र, इंसेंटिव रिवार्ड फॉर्मूले में संशोधन की मांग की है. यूनियन ने अपने पत्र में लिखा है कि एक तरफ “ग्रेट प्लेस टू वर्क ” की उपाधि से सेल को विभूषित किया गया है. दूसरी तरफ, बोकारो इस्पात संयंत्र में विगत 20 वर्षों से गैर कार्यपालक कर्मियों का इंसेंटिव/रिवार्ड फॉर्मूला का संशोधन नहीं किया गया है. विगत 20 वर्षों में बोकारो इस्पात संयंत्र के गैर कार्यपालक कर्मचारियों ने अपनी कर्मठता व लगनशीलता की बदौलत ओवेन पुशिंग, सिंटर उत्पादन, हॉट मेटल, क्रूड स्टील, सैलेबल स्टील के उत्पादन में लगातार वृद्धि की है. कम होते मैनपावर के बावजूद कर्मियों ने उत्पादन को बढ़ाया है. इसका एक प्रमाण विगत 18 वर्षों में बोकारो इस्पात संयंत्र की लेबर प्रोडक्टिविटी में 300% की वृद्धि भी है.

कार्मिकों के लगन व विशिष्ट कार्यशैली से उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज :

वित्त वर्ष 2004-05 में सेल स्तर की लेबर प्रोडक्टिविटी 137 टन क्रूड स्टील प्रति एम्पलाई प्रति वर्ष थी, जो 2023-24 में 422% बढ़ कर 579 टन क्रूड स्टील प्रति एम्पलाई/प्रति वर्ष हो गयी है. वित्त वर्ष 2024-25 मे 600 टीसीएस/कर्म/वर्ष के पार होने की संभावना है. वहीं, बीएसएल की लेबर प्रोडक्टिविटी 2006-07 में 230 टीसीएस/कर्म/वर्ष थी, जो 2023-24 में 300% बढ़ कर 689 टीसीएस/कर्म/वर्ष हो गयी है. जून 2024 पहली तिमाही का औसतन लेबर प्रोडक्टिविटी भी 764 टीसीएस/कर्म/वर्ष दर्ज की गयी है.

एनजेसीएस में सुधार पर तीन माह में निर्णय ले इस्पात मंत्रालय :

दिल्ली उच्च न्यायालय

बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ की ओर से एनजेसीएस में सुधार करने पर लगातार पत्र देने के बावजूद इस्पात मंत्रालय की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाने पर संघ की ओर से दिल्ली उच्च न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराया गया था. इस पर न्यायमूर्ति संजीव नरुला ने फैसला दिया कि यूनियन की मांग व सुझाव पर इस्पात मंत्रालय तीन माह में कदम उठायें.

सेल/बीएसएल कर्मियों को सिर्फ डीए बेसिक पर ला दिया गया है :

हरिओमबीएकेएस बोकारो के अध्यक्ष हरिओम ने कहा : सेल/बीएसएल कर्मियों को सिर्फ डीए बेसिक पर ला दिया गया है. एनजेसीएस यूनियन नेताओं द्वारा दिये गये मौन समर्थन के बल पर प्रबंधन सभी सुविधाओं व आर्थिक लाभ को या तो बंद कर रहा है या संशोधित भी नहीं कर रहा है. इंसेंटिव रिवार्ड, बोनस, फेस्टिवल एडवांस, छात्रवृत्ति, लांग सर्विस अवार्ड, हाउस पर्क्युजिट, एलटीसी/एलएलटीसी मद में आयकर छूट आदि सुविधाओं से कर्मियों को वंचित रखा गया है. गैर कार्यपालक कार्मिकों के मनोबल व आर्थिक स्थिति को सशक्त करने के लिए इंसेंटिव रिवार्ड फॉर्मूले को बदला जाए.

मैन पावर व लेबर प्रोडक्टिविटी पर आधारित हो इंसेंटिव/रिवार्ड फॉर्मूला :

श्री हरिओम ने कहा : इंसेंटिव/रिवार्ड फॉर्मूले को ऐसा बनाया जाए, जो उत्पादन, मैन पावर व लेबर प्रोडक्टिविटी पर आधारित हो. एनजेसीएस को बगैर निर्वाचित नेताओं के समूहों ने कब्जा कर लिया है, जो मैनेजमेंट के इशारे पर लगातार कर्मचारी विरोधी समझौते कर रहे हैं. कहा : कर्मियों के हक व अधिकार की लड़ाई बीएकेएस सड़क से लेकर संसद तक लड़ने को तैयार है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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