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फुसरो बाजार : व्यवसाय पहले जैसी रहा नहीं, अपराधी मांग रहे हैं रंगदारी

Updated at : 16 Jun 2024 11:11 PM (IST)
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फुसरो बाजार : व्यवसाय पहले जैसी रहा नहीं, अपराधी मांग रहे हैं रंगदारी

फुसरो बाजार : व्यवसाय पहले जैसी रहा नहीं, अपराधी मांग रहे हैं रंगदारी

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राकेश वर्मा, बेरमो : बेरमो कोयलांचल की राजनीतिक व आर्थिक ह्रदयस्थली फुसरो बाजार. पहले बेरमो का प्रमुख बाजार बेरमो रेलवे स्टेशन से सटे मजदूर टॉकिज के बगल में हुआ करता था. 60-70 के दशक में बेरमो बाजार टूटने के बाद जब फुसरो बाजार अस्तित्व में आया तो यहां बेरमो बाजार के ही कई पुराने व्यवसायियों ने दुकान व मकान खरीदा. 70 के दशक में फुसरो बाजार मेें आज की तरह इतनी रौनक नहीं थी. बाजार की रौनक 80 के दशक के बाद से धीरे-धीरे बढ़ने लगी तथा 90 के दशक आते-आते यह बाजार काफी फैल गया. फुसरो बाजार में ही गिरिडीह के पूर्व सांसद रवींद्र कुमार पांडेय, बेरमो के विधायक व इंटक नेता कुमार जयमंगल का आवास है. साथ ही विभिन्न दलों के कई छोटे-बड़े नेताओं का फुसरो ही मुख्य कार्यस्थल रहा है. इसके अलावा बेरमो के कई नामी-गिरामी ट्रांसपोर्टर व व्यवसायी भी यही रहते हैं. यहां स्व कृष्ण मुरारी पांडेय कांग्रेस के बलशाली नेता के रूप में चर्चित हुए. वहीं व्यवसायी स्व कामेश्वर शर्मा का भी रुतबा हुआ करता था. बाजार के व्यवसायियों को पूर्व मंत्री व इंटक नेता स्व राजेंद्र प्रसाद सिंह, पूर्व सांसद रवींद्र कुमार पांडेय व पूर्व मंत्री स्व जगरनाथ महतो का भी समय-समय पर मार्गदर्शन मिलता रहा. एक समय था जब बाजार के व्यवसायी जबरन चंदा उगाही से परेशान रहते थे. बाद में यहां के व्यवसायी एकजूट हुए और इस तरह के कार्य पर अंकुश लगाया. इसके बाद कुछ व्यवसायियों का पैसे के लिए अपहरण ही हुआ. इधर, हाल के कुछ माह से फुसरो बाजार के व्यवसायियों को टारगेट कर अपराधियों द्वारा गोलीकांड जैसी घटना को अंजाम दिया जा रहा है. इससे सभी व्यवसायी दहशत के माहौल में जी रहे हैं. पिछले एक-डेढ़ दशक के अंतराल में फुसरो बाजार का लगातार गिरते व्यवसाय के कारण अब पहले जैसी कमाई व्यवसायियों की नहीं रही, जबकि अपराधी उनसे रंगदारी मांग रहे हैं. ऐसे में व्यवसायी पुलिस प्रशासन से लगातार सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं.

कई कारण हैं फुसरो का व्यवसाय चरमराने का :

फुसरो बाजार का व्यवसाय हाल के कुछ वर्षों से चरमराया है तो इसके कई कारण हैं. मालूम हो कि फुसरो बाजार का पूरा व्यवसाय कोल इंडिया पर आश्रित है. सीसीएल के ढोरी, बीएंडके व कथारा एरिया की विभिन्न कोलियरियों में पहले लोकल सेल के सुचारू रूप से चलने के कारण रोजाना फुसरो बाजार में रौनक रहा करती थी. लेकिन लोकल सेल की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रही. आज की तारीख में 80 फीसदी कोयला रेलवे रैक के माध्यम से भेजा जा रहा है. दूसरी ओर कोल इंडिया का मैन पावर लगातार कम होना भी एक बड़ा कारण है. पहले तीनों एरिया का मैन पावर 25-30 हजार था, अब 10 हजार के आसपास रह गया है. कोयला व छाई ट्रांसपोर्टिंग में पहले हजारों हाइवा ट्रक चलते थे, जिसकी संख्या काफी कम रह गयी है. सैकड़ों हाइवा ट्रक यहां से बाहर चले गये हैं. पहले फुसरो में सैकड़ों छोटे-बड़े गैराज थे, जो दर्जन भर रह गये है. फुसरो के रामरतन स्कूल के पीछे पहले गैराज में ट्रकों की कतार लगी रहती थी. कही पार्किंग का जगह नहीं मिलता था, आज वह स्थल वीरान सा लगता है. फुसरो बाजार में कई नामी-गिरामी मिस्त्री हुआ करते थे. मैकेनिकल में आजम मिस्त्री, इंजन में शामू मिस्त्री, सेल्फ व डायनमो में अकबर मिस्त्री, डेटिंग-पेटिंग में बंधू मिस्त्री, लुडू मिस्त्री, मैकेनिकल मिस्त्री में टेनी मिस्त्री, आजम व जसीम के अलावा ट्रक डाला व लैथ मशीन बनाने के काफी चर्चित मिस्त्री के रूप में मंहगू मिस्त्री का नाम था. अब इनमें से अधिकतर मिस्त्री का गैराज व व्यवसाय बंद हो गया. इन गैराजों में सैकड़ों लोग काम किया करते थे. साथ ही यहां बाहर से बड़े-बड़े वाहन बनने के लिए आते थे. पार्ट्स के दुकानों की काफी बिक्री थी.

कई परिवार शिफ्ट कर गये बोकारो :

फुसरो बाजार के कई लोग से अपने बच्चों के 10वीं एवं 12वीं के बाद स्तरीय पढ़ाई के लिए बोकारो पूरे परिवार के साथ शिफ्ट कर गये. कई लोग शुरू से ही अपने बच्चों को बोकारो के स्तरीय स्कूल में शिक्षा के लिए यहां से शिफ्ट कर गये. साथ ही कई ऐसे लोग हैं जो सीसीएल की कमाई से आर्थिक रूप से काफी संपन्न हो गये, ऐसे लोग भी पूरे परिवार के साथ बोकारो शिफ्ट कर गये.

सीसीएल की कोलियरी में रोजगार से जुड़े थे कई लोग :

पहले सीसीएल के तीनों एरिया व वाशरी में फुसरो बाजार के कई लोग पार्ट्स सप्लाई, रिपेयरिंग के अलावा छोटे-मोटे सिविल वर्क से जुड़े थे. अब इन सभी के बंद हो जाने से बाजार पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा है. पिछले एक साल से दो लाख से नीचे का सिविल वर्क बंद कर दिया गया. इसके अलावा फुसरो नगर परिषद क्षेत्र के हर कॉलोनियों में लगातार सभी तरह की दुकानों का खुलना, ऑन लाइन मार्केटिंग का दिन प्रतिदिन बढ़ता प्रचलन भी फुसरो बाजार का व्यवसाय गड़बड़ाने का प्रमुख कारण है.

10-15 फीसदी दुकानदार ही हैं कर्ज मुक्त :

फुसरो बाजार के कई व्यवसायी बातचीत में बताते हैं कि अब पहले जैसी कमाई नहीं रही, व्यापार में सिर्फ पैसे का रोटेशन हो रहा है. मुश्किल से 10-15 फीसदी दुकानदार कर्ज मुक्त हैं. कियी पर बैंक का तो कई पर महाजन का कर्ज है. कई व्यवसायी बाजार में होने वाली सोसाइटी (लॉटरी) से पैसे का उठाव कर व्यापार में लगाते है और उसी से व्यापार का रोटेशन करते रहते हैं.

कई व्यवसायी कर गये पलायन :

फुसरो बाजार में कभी हरियाणा मोटर्स, कृष्णा मोटर्स, शिवा मोटर्स, वर्मा ऑटोमोबाइल्स, अंबिका ऑटोमोबाइल्स, इंडिया डीजल, पूरन मिस्त्री का गैराज आदि काफी प्रसिद्ध था. इनमें से मात्र हरियाणा मोटर्स व अंबिका ऑटोमोबाइल्स रनिंग में है. व्यवसायी पप्पू जैन, मोती राम जैन, गणेश ट्रेडिंग,कार ऑटो सेंटर, काका बाबू, कल्पना वस्त्रालय, खेमका वस्त्रालय, दुर्गा भंडार आदि यहां से बाहर चले गये.

फुसरो के कई ट्रांसपोर्टरों के पास अब पहले जैसा काम नहीं :

पहले फुसरो बाजार में कई नामी-गिरामी कोल ट्रांसपोर्टर हुआ करते थे. इनमें मुख्य रूप से आरकेटी, बीकेबी, एबी सिंह, सर्वेश्वरी एवं मानिक राज ट्रांसपोर्ट, जुगनू ट्रांसपोर्ट, कामेश्वर शर्मा, जेटीसी आदि शामिल हैं. अब इनमें से 90 फीसदी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के पास कोई काम नहीं है. कोलियरियों में बाहर की बड़ी-बड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियां कोल प्रोडक्शन व ओबी निस्तारण का काम कर रही हैं. इन सभी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के अधीन सैकड़ों ट्रक थे तो सैकड़ों लोग रोजगार से जुड़े थे, जिससे फुसरा बाजार की रौनक थी.

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