बोकारो में हाथी और सियार की हड्डी, 120 गोह के अंग व विभिन्न प्राणियों की खाल जब्त

Updated at : 30 Jul 2024 11:14 PM (IST)
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बोकारो में हाथी और सियार की हड्डी, 120 गोह के अंग व विभिन्न प्राणियों की खाल जब्त

वन्यजीवों व उनके अंगों की तस्करी का खुलासा, बोकारो वन प्रमंडल की टीम ने पांच जगहों पर की छापेमारी, छह लोगों पर मामला दर्ज, 21 जुलाई से चल रहा था अभियान

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बोकारो. बोकारो जिले में वन्यजीवों व उनके अंगों की तस्करी का मामला सामने आया है. बोकारो वन प्रमंडल में पांच जगहों पर छापेमारी के बाद यह खुलासा हुआ है. छापेमारी में विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों की हड्डी, खाल और अंग आदि बरामद किये गये हैं, जिनकी अवैध बिक्री हो रही थी. कार्रवाई 21 जुलाई से चल रही थी. मंगलवार को इसे मीडिया के सामने लाया गया. छापेमारी में तकरीबन 120 हत्थाजोड़ी (गोह प्राणी का अंग), हाथी व सियार की हड्डियां, कस्तूरी, विभिन्न प्राणियों की खाल व पॉर्क्यूपाइन (साही) का कांटा जब्त किया गया. छापेमारी में ज्यादातर पूजा भंडार शामिल हैं, जिनके पास ये सामग्री पायी गयी. जानकारी के अनुसार, इन सामान का प्रयोग काला जादू में किया जाता है. मामले में बालीडीह के रोहित गुप्ता, यदुवंश नगर चास के परम गुप्ता, टुपरा के गणेश सिंह चौधरी, यदुवंश नगर चास के रामदर्शन साह, भागवती कॉलोनी चास के विजय कुमार और शिवपुरी कॉलोनी चास के विजय कुमार को आरोपी बनाया गया है.

बोकारो में ऐसा पहला मामला :

गुप्त सूचना के आधार पर बोकारो वन प्रमंडल के प्रशिक्षु अधिकारी संदीप कारभरी शिंदे ( भावसे, झा0-2022) ने चास टीम को छापेमारी के लिए सूचना दी. टीम ने चास व पेटरवार में पांच जगहों पर छापेमारी की. जांच कर छह अभियुक्तों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत जिला न्यायालय, बोकारो में मुकदमा दायर किया गया. इस मामले में तीन से सात साल तक की सजा का प्रावधान है. वन प्रमंडल पदाधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि हत्थाजोड़ी से संबंधित मामला बोकारो प्रमंडल में पहली बार पाया गया है. यह संगीन वन्यजीव अपराध है, जिससे पर्यावरण के संतुलन में हानि हो सकती है. उन्होंने बताया कि बालीडीह में सबसे पहले मामला आया, इसके बाद जांच के आधार पर अन्य मामले पकड़े गये. उक्त वन्यजीव अपराध में लिप्त गिरोह का पर्दाफाश करने में रुद्र प्रताप सिंह प्रभारी वनपाल, रतन राय वनरक्षी व भगवान दास हेंब्रम वनरक्षी की मुख्य भूमिका रही. डीएफओ ने सभी पूजा भंडार को निर्देश दिया कि ऐसी खरीद-फरोख्त में नहीं आयें.

कोटगोह शिड्यूल 01 का प्राणी है, जिसका शिकार कर उसके अंग से हत्थाजोड़ी बनायी जाती है. लोग इसे एक पेड़ की जड़ी-बूटी मानते हैं. लेकिन वास्तविकता में वह एक प्राणी का अंग होता है. आम नागरिक काला जादू के बहकावे में नहीं आयें. हत्थाजोड़ी के लेन-देन व खरीद-बिक्री से दूर रहें.

रजनीश कुमार,

वन प्रमंडल पदाधिकारी

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