उद्घाटन की बाट जोह रहा तारानारी का संस्कृत विद्यालय, छात्रों को नहीं मिल पा रहा लाभ
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 04 Apr 2026 4:09 PM
चंद्रपुरा के तारानारी में बना विद्यालय भवन. फोटो: प्रभात खबर
Sanskrit School: बोकारो के तारानारी गांव में 1.35 करोड़ की लागत से बना राजकीय संस्कृत विद्यालय एक साल से उद्घाटन का इंतजार कर रहा है. पढ़ाई शुरू नहीं होने से छात्र लाभ से वंचित हैं. स्थानीय लोगों ने जल्द संचालन की मांग उठाई है, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा सुविधा मिल सके. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
फुसरो नगर से उदय गिरि की रिपोर्ट
Sanskrit School: झारखंड के बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड स्थित तारानारी गांव का राजकीय संस्कृत विद्यालय उद्घाटन की बाट जोह रहा है. करीब 1.35 करोड़ रुपये की लागत से बना यह विद्यालय भवन पूरी तरह तैयार है, लेकिन आज तक यहां पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है. एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इसका उपयोग नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है.
निर्माण पूरा, लेकिन पढ़ाई शुरू नहीं
विद्यालय भवन का निर्माण कार्य काफी पहले पूरा हो चुका है. इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के कारण इसका उद्घाटन नहीं हो पाया है. क्षेत्र के लोग लंबे समय से इस विद्यालय के शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है.
पूर्व शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने किया था शिलान्यास
इस विद्यालय का शिलान्यास 26 फरवरी 2023 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने बड़े उत्साह के साथ किया था. उस समय इसे क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया था. लेकिन उनके निधन के बाद इस परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ गई और अब तक इसका उद्घाटन नहीं हो सका है.
हाईटेक संस्कृत शिक्षा का था सपना
इस विद्यालय को एक आधुनिक और हाईटेक संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना थी. यहां कक्षा एक से दसवीं तक संस्कृत शिक्षा देने के साथ-साथ आवासीय सुविधा भी प्रस्तावित थी. छात्रों को टैब के माध्यम से पढ़ाई कराने की योजना बनाई गई थी, ताकि पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीक का भी समावेश हो सके.
छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ
विद्यालय चालू नहीं होने के कारण क्षेत्र के छात्रों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है. बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर-दराज के स्कूलों में जाना पड़ रहा है, जिससे समय और संसाधनों की भी बर्बादी हो रही है. अगर यह विद्यालय शुरू हो जाता, तो स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा की सुविधा मिल सकती थी.
रख-रखाव को लेकर बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों ने यह भी चिंता जताई है कि लंबे समय तक भवन खाली रहने से इसकी स्थिति खराब हो सकती है. यदि समय रहते इसका उपयोग नहीं किया गया, तो रख-रखाव के अभाव में भवन जर्जर होने का खतरा है. इससे सरकारी धन का भी नुकसान होगा.
समाज के लोगों ने उठाई आवाज
विद्यालय को जल्द चालू कराने के लिए स्थानीय समाज के लोग भी सक्रिय हो गए हैं. कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासमिति के प्रदेश अध्यक्ष अमरेश गणक और प्रदेश उपाध्यक्ष अमित शर्मा ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर चंद्रपुरा और नावाडीह प्रखंड के लोगों ने पहल की है. उन्होंने बताया कि पिछले महीने पूर्व मंत्री बेबी देवी को ज्ञापन सौंपकर विद्यालय जल्द शुरू कराने की मांग की गई है. इस पर उन्होंने सकारात्मक पहल का आश्वासन भी दिया है.
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सरकार से कार्रवाई की उम्मीद
अब क्षेत्र के लोगों को सरकार से ठोस कार्रवाई की उम्मीद है. उनका कहना है कि यदि जल्द ही विद्यालय का उद्घाटन कर पढ़ाई शुरू कर दी जाती है, तो इससे न सिर्फ संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय छात्रों को भी बेहतर अवसर मिल सकेंगे. तारानारी का यह संस्कृत विद्यालय फिलहाल उद्घाटन का इंतजार कर रहा है. अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस दिशा में कदम उठाता है और छात्रों को इसका लाभ कब मिल पाता है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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