एलपीजी किल्लत की मार: रांची में लौट गया कोयलायुग, छोटे दुकानों की सप्लाई बंद

Updated at : 04 Apr 2026 3:37 PM (IST)
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LPG Cylinder Crisis

बीआईटी मेसरा में तैयार किया जा रहा कोयला चूल्हा (ऊपर) और नीचे कोयले के चूल्हे. फोटो: प्रभात खबर

LPG Cylinder Crisis: रांची में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से जनजीवन प्रभावित है. होटल, स्ट्रीट फूड और छोटे दुकानदार कोयले व वैकल्पिक साधनों का सहारा ले रहे हैं. खाने-पीने की कीमतें बढ़ गई हैं और कई जगह सप्लाई ठप है. गैस संकट के बीच पीएनजी कनेक्शन की मांग तेजी से बढ़ रही है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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प्रभात खबर की टीम

LPG Cylinder Crisis: एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की मार अब घर से लेकर दुकानों और संस्थानों पर दिखाई देने लगी है. झारखंड की राजधानी रांची में लोग अब एक बार फिर कोयलायुग में वापस लौटने लगे हैं. घरेलू रसोई गैस से लेकर लेकर कॉमर्शियल सिलेंडर मिलने में दिक्कतें आ रही है. इसका असर हर जगहों पर दिखने लगा है. छोटे-बड़े होटलों से लेकर स्ट्रीट फूड दुकानों और कॉलेज कैंटीनों पर भी खासा असर दिखने लगा है. सबसे बड़ा असर यह है कि खाने-पीने की चीजों के दामों में बढ़ोत्तरी हो गयी है. ऐसे में खाद्य से संबंधित व्यावसायिक कार्य करने वाले मालिक डीजल भट्टी, व्यावसायिक इलेक्ट्राॅनिक इंडक्शन, लकड़ी के चूल्हे का प्रयोग कर रहे हैं, ताकि लोगों को आसानी से सभी खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराया जा सके.वहीं, कई होटल मालिकों ने ऐसे भोजन को परोसना बंद कर दिया है, जिसे पकाने में अधिक समय लग रहा है. इससे होटल व्यवसाय में भी फर्क पड़ गया है. कई होटलों, रेस्टूरेंटों और कैंटीन में वैकल्पिक के रुप में कोयला वाला चूल्हा अपना लिया है.

कई जगहों पर सप्लाई हुई ठप

गैस नहीं मिलने के कारण कई ठेले बंद हो गये हैं, तो कई लोकल ब्रेड, बिस्किट, नमकीन, सेव आदि बनाने वालों की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गयी है. जबकि, कुछ वैकल्पिक उपाय से सामानों का निर्माण भी कर रहे हैं. वहीं, जो होटल और ठेले खुले हैं, उन्होंने अपने-अपने सामानों की कीमतें बढ़ा दी हैं. ठेले पर बिकने वाला एक प्लेट इडली 20 रुपये से बढ़ कर 25 रुपये प्रति प्लेट, चालू चाय पांच की जगह सात रुपये और स्पेशल चाय 10 रुपये की जगह 12 रुपये, आठ रुपये का समोसा 10 रुपये हो गया है. इसी प्रकार, धीरे-धीरे अन्य सामानों की कीमतें भी बढ़ रही है.

होटलों के मेन्यू में कटौती

कॉमर्शियल सिलेंडर की किल्लत के कारण होटलों के मेन्यू में कटौती हो गयी है. होटल प्रताप रेसीडेंसी के प्रोपराइटर त्रिलोचन सिंह ने कहा कि पहले पनीर और चिकन के 10-12 आइटम बनाते थे. गैस की किल्लत के कारण अब मात्र दो-दो आइटम बना रहे हैं. न्यू राजस्थान कलेवालय के प्रोपराइटर निरंजन शर्मा ने कहा कि कोयला और डीजल भट्ठियों से काम कर रहे हैं. इसमें बहुत परेशानी आ रही है. स्टाफ को काम करने में दिक्कतें आ रही हैं. सिलेंडर की दिक्कतों के कारण कई आइटमों की वेराइटी घटा दी गयी है. पहले मिठाइयों की 40-45 वेराइटी रहती थी, अभी 15-20 वेराइटी बना रहे हैं. इसी तरह , नमकीन के आइटम 50 प्रतिशत कम हो गये हैं. खाने में चुनिंदा आइटम बना रहे हैं. वहीं, चाइनीज आइटम पूरी तरह से बंद हो गया है.

सिलेंडर की जगह कोयला से हो रहा काम

सिलेंडर नहीं मिलने के कारण छोटे-छोटे दुकानदार जैसे फास्ट फूड, मोमो, चाय बनाने वालों को परेशानी हो रही है. इससे कईयों का रोजगार प्रभावित हो गया है. सिलेंडर की दिक्कतों के कारण वे कोयला का प्रयोग कर रहे हैं. दुकानदारों का कहना है कि पहले एक बाेरा कोयला 200 रुपये में मिल रहा था. अब यह 350 रुपये में मिल रहा है. इसे चाय, पकौड़ी, धुसका, पकौड़ी आदि के दाम बढ़ गये है.

स्ट्रीट फूड वालों से बातचीत

डोरंडा निवासी सुनिता तिग्गा घाघरा बस्ती में चाय पकौड़ी , धुसका, चिकन पकौड़ा का ढेला लगाती थी. कहती हैं कि गैस नहीं मिलने के कारण दुकानें बंद करनी पड़ी. जो अब बंद करना पड़ा. कहती हैं कि गैस की एलपीजी समस्या के कारण दुकान बंद करनी पड़ी.

इडली-डोसा में पांच से 10 रुपये की बढ़ोतरी

दीपाटोली स्थित साउथ इंडियन स्टॉल में इडली में पांच रुपये की बढ़ोतरी कर दी गयी है. एक प्लेट इडली के दाम 20 रुपये से बढ़ कर 25 रुपये प्लेट हो गये हैं. वहीं, डोसा की कीमत 10 रुपये बढ़ा दी गयी है. प्रोपराइटर परमेश्वर प्रसाद ने कहा कि कोयले की बढ़ी कीमत के कारण व्यंजनों के दर में बढ़ोत्तरी हो गयी है. अब कोयले का प्रयोग अधिक करना पड़ रहा है.

चाय की कीमतों में बढ़ोतरी

क्यूरेस्टा अस्पताल, कोकर चौक के निकट चाय का स्टॉल लगाने वाले कनक हल्दर ने कहा कि गैस की कमी के कारण चाय की कीमत दो रुपये बढ़ानी पड़ी. चालू चाय पांच की जगह सात रुपये और स्पेशल चाय 10 रुपये की जगह 12 रुपये में बिक्री करनी पड़ रही है.

पीएनजी की बढ़ गयी डिमांड

वर्तमान में पीएनजी कनेक्शन की डिमांड बढ़ गयी है. हर दिन औसतन लगभग 100 नये उपभोक्ताओं द्वारा रजिस्ट्रेशन एवं सिक्योरिटी डिपोजिट जमा कराया जा रहा है. शहर में लोगों तक पीएनजी का कनेक्शन देने में मैनपावर के रुप में लगभग 50 लोग लगे हुए हैं. इससे हर दिन लगभग 60-75 कनेक्शन हो रहा है. वहीं, वर्तमान में कनेक्शन की संख्या बढ़ाने के लिए काम चल रहा है. इसके लिए मैनपावर को 150 किया जा रहा है. कनेक्शन की संख्या को बढ़ा कर हर दिन लगभग 200 से अधिक करने का लक्ष्य है.

कॉलेज के हॉस्टल में विकल्प तैयार

रांची के विभिन्न रेसिडेंशियल कॉलेज के हॉस्टल में हजारों छात्र-छात्रायें रहते हैं. जिनका खाना-पीना कॉलेज मेस और कैंटीन के माध्यम से होता है. फिलहाल सभी संस्थानों के हॉस्टल में पर्याप्त गैस सिलेंडर की व्यवस्था है. वर्तमान स्थिति को देखते हुए गैस संकट से निपटने के लिए विकल्प तैयार किये जा रहे हैं.

बीआईटी मेसरा में तैयार हो रहा कोयला चूल्हा

बीआईटी मेसरा में कुल 14 हॉस्टल हैं, जिनमें लगभग पांच हजार छात्र-छात्राएं रहते हैं. बीआइटी मेसरा के हॉस्टल मेस के लिए वैकल्पिक तैयारी करते हुए 25 टन कोयला मंगाया गया है. साथ ही चूल्हा भी बनाया जा रहा है. हालांकि, सभी हॉस्टल के मेस में पर्याप्त गैस सिलिंडर की सप्लाई हो रही है. संस्थान से मिली जानकारी के अनुसार सभी हॉस्टल में गैस सिलिंडर उपलब्ध हैं और मांग के अनुसार सप्लाई भी हो रही है. लेकिन भविष्य में किसी प्रकार के गैस संकट होने पर मेस पर असर न पड़े और मेस व्यवस्थित चले, इसकी तैयारी की गयी है.

एनआईएएमटी रांची में लगाया गया कोयला के चूल्हा

एनआईएएमटी रांची के छह हॉस्टल के लिए तीन मेस की व्यवस्था है. जिसमें लगभग 1,000 छात्र- छात्रायें खाना खाते हैं. यहां पर कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद हो गयी है. घरेलू सिलेंडर का सप्लाई हो रहा है, वह भी मांग से कम हो रही है. ऐसे में विकल्प के तौर पर मेस में कोयला चूल्हा लगाया गया है. साथ ही मेन्यू में भी बदलाव किया गया है. मेन्यू में फल, ड्राई फ्रूट्स, मिठाई आदि जोड़ा गया है.

एनयूएसआरएल में अभी पर्याप्त गैस सिलेंडर

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल) रांची से मिली जानकारी के अनुसार हॉस्टल मेस के लिए अभी पर्याप्त गैस सिलेंडर हैं. लेकिन आने वाले समय में किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए विकल्प पर भी चर्चा की जा रही है. यहां दो हॉस्टल में लगभग 700 छात्र छात्रायें रहते हैं.

रिम्स में गैस बचाकर चलने के निर्देश

राजधानी के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान सहित कई जगहों पर सरकारी अस्पतालों में फिलहाल एलपीजी गैस या ईंधन की किल्लत नहीं है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा है, जिसका पालन हो रहा है. आपातकालीन योजनायें भी तैयार की गई हैं. अस्पतालों को गैस ईंधन बचा कर चलने और बैकअप स्टॉक रखने के निर्देश दिये गये हैं. हालांकि, रांची के रिम्स और सदर अस्पताल में यह स्टॉक अगले दो से तीन दिन के लिए पर्याप्त स्टॉक है.

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सदर अस्पताल में आठ दिन तक की गैस

सदर अस्पताल के सेंट्रल किचन में मरीजों के लिए खाना पकता है. यहां 19 केजी वाला कॉमर्शियल सिलेंडर की क्षमता 16 है. सोमवार तक आठ सिलेंडर की खपत हो चुकी है. मेस इंचार्ज ने कहा कि उनके पास आठ दिनों तक किचन सप्लाई बरकरार रखने की क्षमता है. पीएनजी कनेक्शन की आपूर्ति के लिए भी प्रबंधन स्तर पर वार्ता कर इसे सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जा रहा है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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