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आजादी के 75 साल बाद भी इस आदिवासी बहुल गांव में पक्की सड़क नहीं, वन विभाग बना रहा मिट्टी मोरम पथ

Updated at : 08 Dec 2024 1:54 PM (IST)
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बोकारो जिले के ललपनिया के आदिवासी बहुल गांव में वन विभाग करा रहा मिट्टी मोरम सड़क का निर्माण. फोटो : प्रभात खबर

Bokaro News: आजादी के 75 साल बाद भी झारखंड के आदिवासी बहुल ढोढी गांव में पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ. लोग परेशान थे. वन विभाग मिट्टी मोरम पथ बना रहा है.

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Bokaro News|ललपनिया (बोकारो), नागेश्वर : बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड में एक ऐसा गांव है, जहां आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ. आदिवासी बहुल ढोढी गांव बड़कीचिदरी पंचायत में है. अच्छी खबर यह है कि अब जाकर हजारीबाग वन प्रमंडल ने गांव तक मोरम पथ बनवा रहा है.

3 किलोमीटर लंबी सड़क, 3 पुलिया का भी हो रहा निर्माण

हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल के चतरोचट्टी फॉरेस्ट बीट में पड़ने वाले इस गांव तक जाने के लिए सड़क बनाई जा रही है. करीब 3 किलोमीटर मिट्टी मोरम पथ के रास्ते में 3 पुलिया का भी निर्माण हो रहा है. इस सड़क के बन जाने से ग्रामीणों का आवागमन सुलभ हो जाएगा. गांव में शुद्ध पेयजल के लिए प्रखंड कार्यालय ने कूप, डोभा आदि बनवाए हैं.

गांव में सड़क नहीं होने से लोग थे परेशान

गांव में सड़क नहीं होने की वजह से लोग बेहद परेशान थे. ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव में रहने वाले 50 आदिवासी परिवार मजदूरी करके जीवन यापन करते हैं. सभी दिहाड़ी मजदूर हैं. गांव में अगर कोई बीमार पड़ जाए, तो उसे एंबुलेंस से अस्पताल भी नहीं ले जा सकते, क्योंकि गांव तक वाहन जाने की सड़क नहीं है. मरीजों को लिंक रोड तक आने के लिए 2 से 3 किलोमीटर तक डोली में बिठाकर या लिटाकर लाना पड़ता है.

विकास की उम्मीद में हर बार करते हैं वोट – ग्रामीण

ग्रामीण कहते हैं कि जब भी चुनाव आता है, वे वोट जरूर करते हैं. उम्मीद रहती है कि सरकार बनेगी, तो उनके दुख-दर्द दूर करेगी. उनके गांव में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाएगी. मुखिया से लेकर अलग-अलग दलों के राजनेताओं के प्रतिनिधियों से अपील की गई कि गांव में सड़क बनवा दें, लेकिन, किसी ने कोई पहल नहीं की.

बीडीओ बोले- वन भूमि की वजह से नहीं बन पाई पक्की सड़क

प्रखंड विकास पदाधिकारी ने मनरेगा और अन्य योजनाओं से कूप, आवास, डोभा आदि का लाभ लोगों को दिया. चतरोचट्टी फॉरेस्ट बीट ने चेक डैम का निर्माण करवाया है. गांव से लिंक रोड तक वन विभाग ने मिट्टी मोरम पथ का निर्माण शुरू कर दिया है. वन विभाग की देखरेख में काम तेजी से हो रहा है.

वन भूमि के चलते नहीं हो सका पथ का निर्माण : बीडीओ

प्रखंड विकास पदाधिकारी महादेव महतो से जब इस पूछा गया कि गांव में पक्की सड़क का निर्माण क्यों नहीं हुआ है, तो उन्होंने कहा कि गांव में विकास के काम हुए हैं. कई और योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को मिलेगा. सड़क की जमीन वन भूमि है. इसलिए मनरेगा से मिट्टी मोरम पथ का निर्माण नहीं हो पाया. उपायुक्त को इस संबंध में जानकारी दी गई है.

बहुत जल्द होगा पीसीसी पथ का निर्माण – योगेंद्र प्रसाद

झारखंड सरकार के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि उनके संज्ञान में यह मामला नहीं है. वर्ष 2025 में ही लिंक पथ से गांव तक पीसीसी पथ का निर्माण कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के सभी गांवों को पक्की सड़क से जोड़ा जाएगा.

वन क्षेत्रों में हो रहे हैं विकास कार्य – रेंजर

वन क्षेत्र पदाधिकारी सुरेश राम ने कहा कि डीएफओ के दिशा-निर्देशन में चतरोचट्टी फॉरेस्ट बीट में ग्रामीण विकास के कई काम हो रहे हैं. पथ, पुलिया, चेक डैम, वन रोपन के कार्य संचालित हो रहे हैं. इसी क्रम में ढोढी गांव में पथ का निर्माण किया जा रहा है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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