मेरा विद्यालय निपुण, मैं भी निपुण 2.0 के तहत मूल्यांकनकर्ताओं का प्रशिक्षण पूरा

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प्रशिक्षण के समापन अवसर पर डीइओ प्रवीण रंजन व अन्य | Prabhat Khabar Network

जिले में 'मेरा विद्यालय निपुण, मैं भी निपुण 2.0' कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. जिला मूल्यांकनकर्ताओं के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हो गया है. इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता का निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित करना है.

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जिले में मेरा विद्यालय निपुण, मैं भी निपुण 2.0 कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गयी है. इसी क्रम में जिला मूल्यांकनकर्ताओं के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण गुरुवार को जिला समग्र शिक्षा सभागार में संपन्न हुआ. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विद्यालयों के मूल्यांकन से जुड़ी प्रक्रिया, मानक और जरूरी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गयी.

प्रमाण के आधार पर होगा विद्यालयों का मूल्यांकन

प्रशिक्षण में मूल्यांकनकर्ताओं को बताया गया कि विद्यालयों का आकलन केवल औपचारिकता के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध प्रमाण और निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाना है. मूल्यांकन प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके.

बच्चों के सीखने के स्तर पर रहेगा फोकस

डीइओ सह डीपीओ प्रवीण रंजन ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था और बच्चों के सीखने के स्तर की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है. उन्होंने मूल्यांकनकर्ताओं से तय मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सही मूल्यांकन से विद्यालयों की कमियों और बेहतर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों की पहचान होगी. इसके आधार पर शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार की जा सकेगी.

एप से कराया गया मूल्यांकन का अभ्यास

प्रशिक्षण के दूसरे दिन मूल्यांकनकर्ताओं को एप के माध्यम से मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया. उन्हें विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी दर्ज करने और मूल्यांकन से जुड़े चरणों को समझाया गया. इस दौरान प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया.

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा मूल्यांकन

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जिला मूल्यांकनकर्ता निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार स्कूलों का दौरा कर मूल्यांकन करेंगे. इससे जिले के विद्यालयों में बुनियादी शिक्षा की स्थिति, बच्चों के सीखने के स्तर और शैक्षणिक गतिविधियों का आकलन किया जायेगा. कार्यक्रम के माध्यम से सामने आने वाले परिणामों के आधार पर विद्यालयों में आवश्यक सुधार की दिशा तय करने में मदद मिलेगी.


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