चास में पाताल जा रहा है पानी, पिछले साल की तुलना में 20-30 फुट नीचे गया भूगर्भ जलस्तर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Apr 2019 8:09 AM
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चास : अभी अप्रैल माह बीत ही रहा है और चास व आसपास के इलाकों में जलसंकट गहराता जा रहा है. निगम क्षेत्र के अधिकतर तालाब सूख चुके हैं या सूखने के कगार पर हैं. दामोदर नदी में भी पानी स्तर काफी घट गया है. इसकी वजह चास शहरी क्षेत्र के भूगर्भ का जलस्तर भी […]
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चास : अभी अप्रैल माह बीत ही रहा है और चास व आसपास के इलाकों में जलसंकट गहराता जा रहा है. निगम क्षेत्र के अधिकतर तालाब सूख चुके हैं या सूखने के कगार पर हैं. दामोदर नदी में भी पानी स्तर काफी घट गया है. इसकी वजह चास शहरी क्षेत्र के भूगर्भ का जलस्तर भी तेजी से नीचे गिर रहा है. मई-जून में जब गर्मी परवान पर होगी, तब की स्थिति भांप कर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है.
चास में डीप बोरिंग का काम करने वाले गंगाधर महतो और गणेश कुमार ने बताया कि चास इलाके के जलस्तर में पिछली साल की तुलना में 20 से 30 फुट नीचे चला गया है. कहीं 400 तो कहीं 600 फुट गहराई पर भी पानी मिलना मुश्किल हो रहा है. कई जगह तो 1000 फुट बोरिंग करने के बाद पानी आ रहा है.
यही वजह है कि पहले की ज्यादातर बोरिंग फेल होती जा रही है. निगम क्षेत्र की गुजरात कॉलोनी के रवि कुमार, रामनगर कॉलोनी के अश्विनी ओझा, संतोष कुमार, प्रभात कॉलोनी के संजय कुमार, तेलीडीह रोड के बहादुर कुमार ने बताया कि उनके घरों की डीप बोरिंग अब जवाब देने लगी है. रात भर छोड़ने पर सुबह सिर्फ घर के काम-काज के लिए ही पानी मिल पा रहा है.
तीन-चार घंटे बाद पानी जमा होने पर ही दुबारा पानी मिल रहा है. 10-12 साल पहले चास क्षेत्र में 80 से 120 फुट बोरिंग कराने पर ही पानी मिल जाता था. अब धड़ाधड़ हो रही डीप बोरिंग के कारण भी भूगर्भ का जलस्तर नीचे जा रहा है.
चास में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर गंभीर नहीं है निगम
लोगों का कहना है कि जल संकट से बेखबर नगर निगम वार्डों को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए ही राशि खर्च कर रहा है. क्षेत्र का जलस्तर बढ़ाने के लिए फिलहाल निगम के पास कोई योजना ही नहीं है.
निगम की ओर से करीब दो वर्ष पूर्व आदेश जारी कर कहा गया था कि जो भी घर बनवाने के लिए नक्शा पास करवायेगा, उन्हें आवश्यक तौर पर सोख्ता का निर्माण करना होगा. लेकिन, निगम की ओर से इस ओर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी. इसका परिणाम है कि जलस्तर और नीचे जा रहा है. वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से भूगर्भ के जलस्तर को बनाये रखा जा सकता है.
लेकिन निगम इसको लेकर कभी भी गंभीर नहीं हुआ. निगम क्षेत्र में कहीं भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है. ऊंची-ऊंची इमारतें बनती जा रही हैं, लेकिन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर निगम ध्यान नहीं दे रहा है. जबकि नगर विकास विभाग के नये बिल्डिंग बायलॉज में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है. निगम को लोगों के बीच जागरूकता अभियान भी चलाने की जरूरत है.
तालाबों का नहीं हुआ जीर्णोंद्धार
चास नगर निगम के अधीन करीब 18 तालाब हैं. इनमें महतो बांध, पुराना बांध, भोलूर बांध व सोलागीडीह तालाब मुख्य हैं. इनकी नीलामी होती है, परंतु सरकार की ओर से इनका रखरखाव नहीं होता है. पुराना बांध 12 महीने सूखा रहता है. इधर, कई जगह जैसे-जैसे मकानों की संख्या बढ़ती गयी और तालाबों की जमीन पर अतिक्रमण होने लगा. सरकारी तालाबों के जीर्णोंद्धार व इसकी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर निगम का ध्यान नहीं है.
भूगर्भ का जल स्तर बनाये रखने के लिए निगम क्षेत्र में सोख्ता या वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने पर जोर दिया गया है. बिना सोख्ता या वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाये नक्शा पास नहीं किया जायेगा. निगम की ओर से जल बचाने के लिए शीघ्र ही जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. तालाबों के जीर्णोंद्धार को लेकर भी योजनाएं बनायी गयी हैं.
सभी तालाबों के सर्वे का आदेश दिया गया है. प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जायेगा. किसी वार्ड में पानी की कमी पायी जायेगी तो वहां टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जायेगा. डीप बोरिंग करने का आदेश वहीं दिया जा रहा है, जो सोख्ता या हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने की बात करते हैं.
शशि प्रकाश झा, अपर नगर आयुक्त, चास नगर निगम
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