बीएसएल के 130 कर्मियों के अधिकारी बनने पर लगा ग्रहण
Updated at : 04 Oct 2018 6:41 AM (IST)
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बोकारो : बोकारो स्टील प्लांट के 130 कर्मियों के अधिकारी बनने पर ‘ग्रहण’ लग गया है. सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने अपने आदेश में 15 जुलाई 2018 को जूनियर ऑफिसर के लिए आयोजित लिखित परीक्षा के माध्यम से होने वाली नियुक्ति पर रोक लगा दी है. न्यायाधीश ने इस मामले में इस्पात मंत्रालय, सेल प्रबंधन […]
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बोकारो : बोकारो स्टील प्लांट के 130 कर्मियों के अधिकारी बनने पर ‘ग्रहण’ लग गया है. सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने अपने आदेश में 15 जुलाई 2018 को जूनियर ऑफिसर के लिए आयोजित लिखित परीक्षा के माध्यम से होने वाली नियुक्ति पर रोक लगा दी है. न्यायाधीश ने इस मामले में इस्पात मंत्रालय, सेल प्रबंधन व भिलाई इस्पात संयंत्र को पक्षकार बनाया है. भिलाई श्रमिक सभा (एचएमएस) के महासचिव प्रमोद कुमार मिश्रा ने कैट में याचिका दायर की थी.
इसकी सुनवाई 28 सितंबर को हुई. यूनियन की ओर से एडवोकेट रोमीर एस गोयल ने न्यायाधीश रमेश सिंह ठाकुर के समक्ष पूरी वस्तुस्थिति को स्पष्ट किया. सर्कुलर में व्याप्त खामियों को उजागर किया, जिसमें बैकलॉग पदों को भरने, पदों की संख्या बढाने व वरीयता और कार्य अनुभव को प्राथमिकता देने की मांग की. सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने याचिका को स्वीकृत करते हुए जूनियर ऑफिसर के लिए आयोजित लिखित परीक्षा के माध्यम से होने वाली नियुक्ति पर रोक लगाते हुए कहा है कि जब तक इस मूल आवेदन पर निर्णय नहीं हो जाता, नियुक्ति नहीं की जा सकेगी.
कैट ने लिखित परीक्षा के माध्यम से होने वाली नियुक्ति पर रोक लगायी, सेल, बीएसपी व इस्पात मंत्रालय को बनाया पक्षकार
2010 के बाद सीधे वर्ष 2018 में परीक्षावर्ष 2008 में कर्मी को अधिकारी बनने का मौका देने के लिए हर दो साल पर परीक्षा लेने संबंधी सर्कुलर जारी हुआ था. परीक्षा वर्ष 2008 में हुई, रिजल्ट भी निकला. रिजल्ट पर काफी विवाद भी हुआ. उसके बाद वर्ष 2010 में परीक्षा हुई. वर्ष 2010 के बाद सीधे वर्ष 2018 (जुलाई) में यह परीक्षा ली गयी. इस बीच के कई कर्मी अधिकारी बनने की आस में रिटायर हो गये.
दो वर्ष में इ-0 में नियुक्ति परंपरा बंद : बीएसएल सहित सेल में वरीय कर्मियों को कार्य अनुभव व वरीयता के आधार पर गैर कार्यपालक से कार्यपालक बनाने की पुरानी परंपरा थी. लेकिन, प्रतिवर्ष दो वर्ष में ई-0 में नियुक्ति की परंपरा को वर्ष 2007 में बंद कर दिया गया. वर्ष 2008 में सेल प्रबंधन की ओर से वरीयता व कार्य अनुभव को दरकिनार कर लिखित परीक्षा की नयी परंपरा की शुरुआत की गयी.
2011 से 2017 तक कोई सर्कुलर नहीं : बीएसएल सहित सेल कर्मियों ने अंतत: इसी प्रक्रिया (दो साल पर परीक्षा) को स्वीकार कर लिया. लेकिन, सेल प्रबंधन ने 2011 से 2017 तक कोई सर्कुलर जारी नहीं किया, जबकि पॉलिसी में स्पष्ट उल्लेख था कि चयन प्रक्रिया हर दो वर्ष में की जायेगी. 11 अगस्त 2017 को नयी पॉलिसी को जारी किया गया. इसमें वरीयता को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया. कारण, बड़ी संख्या में पात्र कर्मी आक्रोशित हुए.
20 अप्रैल 2018 को लिखित परीक्षा का सर्कुलर
कर्मी भिलाई श्रमिक सभा (एचएमएस) के द्वार पर पहुंचे. यूनियन ने अगस्त 2017 से अप्रैल 2018 तक लगातार चयन प्रक्रिया में सुधार के लिए भिलाई से दिल्ली तक कई बार पत्राचार किया और प्रबंधन से चर्चा की. 20 अप्रैल 2018 को सेल प्रबंधन की ओर से सर्कुलर (लिखित परीक्षा) जारी किया गया. कर्मी ने फिर भिलाई श्रमिक सभा का दरवाजा खटखटाया. महासचिव प्रमोद कुमार मिश्र ने पुन: सीइओ व चेयरमैन को पत्र लिखा और पॉलिसी में बदलाव की मांग की.
लेकिन, प्रबंधन की ओर से कोई पहल नहीं की गयी. कर्मियों की डिमांड पर यूनियन की ओर से छत्तीसगढ उच्च न्यायालय की डबल बेंच में एडवोकेट रोमीर एस गोयल की ओर से याचिका दायर की गयी. इसकी सुनवाई 13 जुलाई को हुई. उच्च न्यायालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश का का हवाला देकर प्रकरण को कैट को स्थानांतरित कर दिया गया.
चयन प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप : लिखित परीक्षा के माध्यम से किसी कर्मचारी की कार्यकुशलता व कार्य दक्षता का आकलन करना संभव नहीं था. वर्ष 2008 व 2011 में सेल प्रबंधन की ओर से की गयी चयन प्रक्रियाओं में अनियमितता का आरोप लगा.
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