11वीं की छात्रा रिशु की हत्या में युवक दोषी करार, सजा 25 को

By Prabhat Khabar Digital Desk
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धनबाद : मटकुरिया घुरनी जोरिया में 11 वीं की छात्रा रिशु तिवारी की नृशंस हत्या के मामले में शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा की अदालत ने जेल में बंद सुलेख को भादवि की धारा 307/302/452 में दोषी करार दिया. सजा 25 फरवरी 2020 को सुनायेगी. 29 अगस्त 17 की रात को सुलेख नामक युवक छत का करकट हटा कर घर में घुसा था.

बरामदे में एक ताला-चाबी पड़ा था. उस ताले को छात्रा के माता-पिता के कमरे में बाहर से लगा दिया. इसके बाद छात्रा के कमरे में घुस कर उसकी हथेली पर भुजाली से वार किया. वह चीखने लगी. बगल में सो रहा उसका भाई भी जग गया. युवक ने उसके भाई पर भी भुजाली चला दी, जिससे वह जख्मी हो गया. रिशु व उसके भाई को जख्मी हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने रिशु को मृत घोषित कर दिया.
घटना के बाद पुलिस ने अरविंद कुमार तिवारी के फर्द बयान पर बैंक मोड़ थाना में कांड संख्या 196/17 दर्ज किया. केस के आइओ ने 27 नवंबर 17 को चार्जशीट दाखिल किया. अदालत ने 21 मार्च 2018 को आरोपी सुलेख के खिलाफ आरोप गठन किया. अभियोजन ने केस विचारण के दौरान 14 गवाहों की गवाही करायी.
छात्रा की मां ने की फांसी की मांग : दोषी करार दिये जाने के वक्त मृतका की मां पूनम तिवारी भी अदालत में मौजूद थी. उसने अदालत पर भरोसा जताते हुए दोषी सुलेख को फांसी की सजा देने की मांग की, ताकि भविष्य में लोग ऐसी घटना को अंजाम देने के पहले सोचें.
मेयर मामले में कोर्ट ने मांगा ओरिजनल वाउचर
धनबाद नगर निगम द्वारा रितिका प्रिन्टेक प्राइवेट लिमिटेड को सरकार राशि का अधिक भुगतान करने के मामले में सुनवाई शनिवार को न्यायिक दंडाधिकारी प्रतिमा उरांव की अदालत में हुई. केस अभिलेख पर संज्ञान पर आदेश के लिए निर्धारित था. शिकायतकर्ता रंजीत सिंह परमार अदालत में उपस्थित थे. उन्होंने बताया कि अदालत ने 31 जनवरी 2020 को नगर निगम को पत्र भेज कर 30 करोड़ 42 लाख रुपये का ओरिजनल वाउचर मांगा है.
अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 23 मार्च 2020 मुकर्रर की. ज्ञात हो कि शिकायतकर्ता श्री परमार ने 23 मार्च 2019 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में इस मामले में मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल, एडिशनल सिटी कमिशनर महेश संथालिया, सिटी कमिशनर राजीव रंजन, अकाउंटेंट अनिल मंडल, कैशियर रामपुकार शर्मा, रितिका कंपनी के डायरेक्टर रूपेश सिन्हा व पीयूष कुमार के खिलाफ सीपी केस नंबर 882/19 दर्ज कराया था.
रामधीर सिंह मामले में हुई सुनवाई
पुलिस हिरासत से रामधीर सिंह को छुड़ा लिये जाने के मामले की सुनवाई शनिवार को अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी शिखा अग्रवाल की अदालत में हुई. इस दौरान कांड के आरोपी रामधीर सिंह को वीसीएस से पेश किया गया. पूर्व मंत्री बच्चा सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता दिलीप सिंह ने पैरवी की. रामधीर सिंह और बच्चा सिंह की ओर से बहस हो चुकी है. अदालत ने शेष आरोपियों की बहस के लिए अगली तारीख 3 मार्च 2020 निर्धारित कर दी.
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