राजधानी में जालसाजी कर जमीन की बड़े पैमाने पर हो रही है हेराफेरी

Updated at : 16 Feb 2020 1:21 AM (IST)
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राजधानी में जालसाजी कर जमीन की बड़े पैमाने पर हो रही है हेराफेरी

रांची : जालसाजी कर गैर मजरूआ व बकाश्त भूमि का लगान निर्धारण न सिर्फ बड़ागाईं अंचल में किया गया, बल्कि ऐसी जालसाजी नामकुम अंचल की जमीन के लगान निर्धारण और रसीद काटने में भी की गयी है. मामले की पुष्टि राजस्व विभाग की टीम द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट से भी होती है. राजस्व, निबंधन एवं […]

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रांची : जालसाजी कर गैर मजरूआ व बकाश्त भूमि का लगान निर्धारण न सिर्फ बड़ागाईं अंचल में किया गया, बल्कि ऐसी जालसाजी नामकुम अंचल की जमीन के लगान निर्धारण और रसीद काटने में भी की गयी है. मामले की पुष्टि राजस्व विभाग की टीम द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट से भी होती है. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन ने मामले की जांच के लिए सीआइडी मुख्यालय को भेजे अपने पत्र में लिखा है कि झारभूमि का संचालन एनआइसी द्वारा किया जा रहा है.

जिले की ओर से इस वेबसाइट से संबंधित कई समस्याओं को विभाग के संज्ञान में लाया गया. जिसे समय-समय पर एनआइसी के पास समाधान के लिए भेजा गया. लेकिन एनआइसी के असहयोग के कारण उन समस्याओं में अधिकांश का समाधान नहीं हो पा रहा है.
उन्होंने लिखा है कि सॉफ्टवेयर में संशोधन के लिए एनआइसी को अनुरोध किया गया है, लेकिन अब तक संशोधन नहीं किया गया. इस कारण दुरुपयोग की संभावना बनी हुई है. एनआइसी के स्तर से झारभूमि वेबसाइट में छेड़छाड़ कर ऑनलाइन राजस्व अभिलेख में बिना अंचल अधिकारी की स्वीकृति के दर्ज किये जाने की शिकायत प्राप्त हुई है.
मामले की जांच के लिए पूर्व में समिति गठित की गयी थी. लेकिन एनआइसी के असहयोग के कारण जांच पूर्ण नहीं की जा सकी. जांच रिपोर्ट भेजने के बावजूद एनआइसी ने कोई कार्रवाई नहीं की. इसलिए सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग की जांच किये जाने की आवश्यकता है.
बड़ागाईं अंचल के बाद अब नामकुम अंचल में जालसाजी का मामला आया सामने
सीओ ने स्वीकृति आदेश से किया इनकार
जांच के दौरान बड़ागाईं अंचल अधिकारी द्वारा बताया गया कि मौजा बूटी के भाग संख्या-01 और पृष्ठ संख्या 393 में एक नयी जमाबंदी बनायी गयी है. इसकी जांच के दौरान एनआइसी के कर्मियों ने पहले बताया कि जमाबंदी पूर्व में खोली गयी थी.
वर्तमान में कर्मचारी सोहन सिंह मुंडा द्वारा उसमें एक जून को डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से रकबा जोड़ने के लिए सीआइ और सीओ के पास भेजा गया. जिसके बाद छह जून को सीआइ और सीओ ने डिजिटल हस्ताक्षर कर स्वीकृति दी. जब मामले की जानकारी बड़ागाईं सीओ से ली गयी, तो उन्होंने स्वीकृति आदेश से मना कर दिया.
मौजा का नाम आरा की जगह जोरदाग दिख रहा है
जांच रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि अंचल अधिकारी नामकुम द्वारा बताया गया कि नामकुम अंचल के हल्का-01, मौजा जोरदगा 178 वर्तमान पृष्ठ संख्या 158 संदिग्ध जमाबंदी के अंतर्गत आता है. इसकी रसीद भी निर्गत हो चुकी है. साथ ही मौजा का नाम आरा होना था, जबकि अभी जोरदाग दिख रहा है. रजिस्टर में जमाबंदी-2 में जमाबंदी का प्रकार रैयती है, जबकि खतियान गैर मजरूआ है.
इस मामले में एनआइसी के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि सरकार द्वारा जीएम लैंड की रसीद निर्गत करने के आदेश के अनुसार, इस जमाबंदी की रसीद निर्गत की गयी है. अगर किसी जमाबंदी की रसीद निर्गत नहीं होनी है, तो अंचल अधिकारी द्वारा केस बाइ केस में लॉक करने की आवश्यकता है.
जमीन का म्यूटेशन करने के लिए आवेदन किस माध्यम से प्राप्त हुआ, इसके बारे भी कोई जानकारी नहीं है.
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