गृह मंत्रालय ने डीआइजी पर लगे आराेपों की रिपाेर्ट मांगी

Updated at : 15 Sep 2019 1:03 AM (IST)
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गृह मंत्रालय ने डीआइजी पर लगे आराेपों की रिपाेर्ट मांगी

रांची : हजारीबाग के डीअाइजी पंकज कंबोज के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति देने से जुड़े मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव राजीव कुमार निगम ने झारखंड के मुख्य सचिव को इस संबंध में पत्र भेजा है.बता दें कि झारखंड इंटीग्रेटेड पावर लिमिटेड परियोजना […]

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रांची : हजारीबाग के डीअाइजी पंकज कंबोज के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति देने से जुड़े मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव राजीव कुमार निगम ने झारखंड के मुख्य सचिव को इस संबंध में पत्र भेजा है.बता दें कि झारखंड इंटीग्रेटेड पावर लिमिटेड परियोजना के लिए केरेडारी में जमीन उपलब्ध करवाने को लेकर हजारीबाग नगर भवन में 16 मई 2012 को जन सुनवाई आयोजित की गयी थी. इसका विरोध करने के दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, केपी शर्मा, गौतम सागर राणा आदि घायल हो गये थे.

घटना की जांच के बाद तत्कालीन आयुक्त नितिन मदन कुलकर्णी ने हजारीबाग के तत्कालीन डीसी मनीष रंजन व तत्कालीन एसपी पंकज कंबोज के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी. इस मामले में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने गृह मंत्रालय से शिकायत की थी.
कार्रवाई के लिए लंबित है अभियोजन स्वीकृति
जनसुनवाई के दौरान पुलिस के हमले से पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के कान का पर्दा फट गया था. श्री साव ने इस मामले में हजारीबाग के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में तत्कालीन उपायुक्त मनीष रंजन, तत्कालीन एसपी पंकज कंबोज, एसडीओ रचना भगत, सदर थाना प्रभारी आभास कुमार, दारोगा लक्ष्मण सिंह, केरेडरी बीडीओ रितेश जायसवाल समेत 50-60 अन्य पर परिवाद वाद 742/2012 दायर किया था. कोर्ट में गवाही के बाद आरोपियों पर आरोप तय करने के लिए अभियोजन स्वीकृति की अनुशंसा की गयी थी, लेकिन अब तक सरकार के स्तर पर अभियोजन स्वीकृति का आदेश नहीं दिया गया है.
राज्यपाल के निर्देश पर तत्कालीन आयुक्त ने जांच में दोषी पाने के बाद की थी कार्रवाई की अनुशंसा
राज्यपाल के निर्देश पर हजारीबाग के तत्कालीन आयुक्त नितिन मदन कुलकर्णी ने मामले की जांच की थी. जांच में हजारीबाग के तत्कालीन डीसी मनीष रंजन व तत्कालीन एसपी पंकज कंबोज को दोषी पाते हुए इनके खिलाफ सरकार से आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की थी.
आयुक्त ने रिपोर्ट में कहा था कि तत्कालीन उपायुक्त मनीष रंजन व एसपी पंकज कंबोज द्वारा कंपनी के प्रभाव में आकर जनसुनवाई के दौरान व्यापक अनियमितता बरती गयी. दोनों ने जनता के हितों व नियमों को प्राथमिकता न देकर निजी कंपनी को लाभ देने के लिए अनियमितता की. इससे विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हुई. इसकी पुष्टि स्थानीय अखबारों में छपी खबरों से भी होती है.
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