फरार नक्सलियों पर दर्ज होगा कोर्ट की अवमानना का केस
Updated at : 27 May 2019 1:05 AM (IST)
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अमन तिवारी रांची : भाकपा माओवादी के सेंट्रल कमेटी के फरार नक्सलियों पर भी कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज होगा. चार नक्सलियों के नाम का चयन कर प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा सीआइडी मुख्यालय ने संबंधित जिले के एसपी से की है. प्राथमिकी दर्ज करने के लिए जिन चार नक्सलियों को चिह्नित किया गया […]
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अमन तिवारी
रांची : भाकपा माओवादी के सेंट्रल कमेटी के फरार नक्सलियों पर भी कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज होगा. चार नक्सलियों के नाम का चयन कर प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा सीआइडी मुख्यालय ने संबंधित जिले के एसपी से की है. प्राथमिकी दर्ज करने के लिए जिन चार नक्सलियों को चिह्नित किया गया है.
उनमें 24 परगना निवासी प्रशांत बोस उर्फ किशन दा उर्फ मनीष दा, गिरिडीह निवासी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल उर्फ सागर जी, धनबाद का प्रयाग मांझी उर्फ विवेक उर्फ फुसना उफ करण दा और पश्चिम बंगाल के मिदनापुर निवासी आशीष मंडल उर्फ आकाश उर्फ असीम मंडल शामिल है.
झारखंड पुलिस ने घोषित कर रखा है इनाम
जानकारी के अनुसार प्रशांत बोस और मिसिर बेसरा भाकपा माओवादी के सेंट्रल कमेटी में पोलित ब्यूरो मेंबर हैं. दोनों के खिलाफ झारखंड पुलिस ने पहले से एक-एक करोड़ रुपये इनाम घोषित कर रखा है. जबकि प्रयाग मांझी उर्फ विवेक पहले स्पेशल एरिया कमेटी का मेंबर था. लेकिन बाद में उसे सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया था.
उसके खिलाफ सरकार ने 28 दिसंबर 2018 को एक करोड़ रुपये इनाम की घोषणा की थी. वहीं, दूसरी ओर आकाश भी पहले स्पेशल एरिया कमेटी का मेंबर था, तब उसके खिलाफ 25 लाख रुपये इनाम की घोषणा झारखंड पुलिस ने की थी. लेकिन बाद में उसे भी सेंट्रल कमेटी का सदस्य बनाया गया था.
सीआइडी मुख्यालय ने चारों नक्सलियों के खिलाफ मांगी जानकारी
सीआइडी मुख्यालय ने संबंधित जिले के एसपी से चारों नक्सलियों के खिलाफ इस बिंदु पर जानकारी मांगी है कि कितने केस में संबंधित नक्सली को फरार घोषित किया जा चुका है. अगर फरार घोषित करने की कार्रवाई की जा चुकी है, तब संबंधित नक्सली के खिलाफ धारा 174 ए अर्थात कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज करते हुए इसकी जानकारी सीआइडी मुख्यालय को उपलब्ध करायी जाये.
उल्लेखनीय है कि न्यायालय के निर्देश पर झारखंड के विभिन्न जिलों में फरार अपराधियों और उग्रवादियों पर न्यायालय की अवमानना का केस दर्ज करने की कार्रवाई पहले से की जा रही है. ऐसे केस के अनुसंधान के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा एसओपी भी तैयार किया गया था.
ताकि केस में नक्सलियों और अपराधियों को सजा दिलायी जा सके. ऐसे सभी मामलों की मॉनिटरिंग सीआइडी मुख्यालय कर रही है. लेकिन बाद में यह निर्णय हुआ था फरार बड़े नक्सलियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाये, ताकि इसका असर पड़े. जिसके बाद सीआइडी ने बड़े नक्सलियों का नाम चिह्नित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई शुरू की है.
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