Tej Pratap Yadav : नाम में गांधी लिखने से कोई गांधीवादी नहीं हो जाता- राहुल गांधी पर तेज प्रताप का बड़ा हमला

Tej Pratap's big attack on Rahul Gandhi
Tej Pratap Yadav : तेज प्रताप यादव ने राहुल गांधी के ‘गांधीवाद’ पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा, गांधी सिर्फ नाम नहीं, एक जीवनशैली और विचारधारा हैं, जिसे अपनाए बिना कोई खुद को गांधीवादी नहीं कह सकता.
Tej Pratap Yadav : जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला है. बुधवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि नाम में ‘गांधी’ लगाने से कोई गांधीवादी नहीं हो जाता.
राहुल गांधी की जीवनशैली और विचार महात्मा गांधी के आदर्शों से मेल नहीं खाते. तेज प्रताप ने सवाल किया कि गांधी के अपमान की चिंता राहुल गांधी को क्यों है, पहले यह देखा जाना चाहिए कि खुद कौन गांधी के विचारों को कितना जी रहा है.
गांधी सिर्फ नाम नहीं, जीवन का रास्ता हैं
तेज प्रताप यादव ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम लेना आसान है, लेकिन उनके आदर्शों को अपनाना कठिन. गांधी सादगी, आत्मनिर्भरता और अहिंसा के प्रतीक थे. उन्होंने देश को चरखा और खादी का संदेश दिया, जीवन में सादगी को आंदोलन का रूप दिया. ऐसे में आज के नेता अगर खुद महंगे कपड़ों, जींस और टी-शर्ट में घूमते हैं, तो वे किस आधार पर गांधीवाद की बात करते हैं.
उन्होंने कहा कि गांधी को मानने का मतलब सिर्फ भाषण देना या पोस्टर पर तस्वीर लगाना नहीं है, बल्कि अपने जीवन में भी उनके विचारों की झलक दिखानी होती है. अगर कोई सच में गांधीवादी है, तो उसके आचरण, पहनावे और सोच में गांधी दिखाई देने चाहिए.
मनरेगा विवाद पर राहुल गांधी को घेरा
तेज प्रताप यादव से जब मनरेगा का नाम बदले जाने और कांग्रेस द्वारा इसे महात्मा गांधी के अपमान से जोड़ने के सवाल पर पूछा गया, तो उन्होंने तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि गांधी का अपमान कौन कर रहा है और कौन नहीं, इसकी चिंता राहुल गांधी को क्यों है.
उन्होंने यह भी कहा कि गांधीजी ने कभी हिंसा या गोली का रास्ता नहीं अपनाया, बल्कि अहिंसा के जरिए देश को आजादी की राह दिखाई. ऐसे में गांधी के नाम पर राजनीति करना और उनके विचारों से दूर रहना, यह सबसे बड़ा विरोधाभास है.
आज के नेताओं की जीवनशैली पर सवाल
तेज प्रताप ने कहा कि आज गांधी का नाम लेने वालों को पहले यह सोचना चाहिए कि वे खुद उनके विचारों से कितने जुड़े हुए हैं. महात्मा गांधी का जीवन सादगी और त्याग का उदाहरण था. उन्होंने आम आदमी की तरह जीवन जिया और आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा.
ऐसे में जो नेता दिखावे की राजनीति करते हैं और भौतिक सुख-सुविधाओं को अपनी पहचान बना लेते हैं, वे गांधीवाद की बात कैसे कर सकते हैं. गांधी के आदर्शों का सम्मान तभी होगा, जब नेता अपने जीवन में भी उनकी झलक उतारें.
वाराणसी की घटना पर भी सरकार को पत्र
तेज प्रताप यादव ने वाराणसी में बिहार की एक लड़की की मौत के मामले का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने इस पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटनाओं पर राजनीति से ऊपर उठकर कार्रवाई होनी चाहिए.
तेज प्रताप यादव के इस बयान से बिहार की राजनीति में गांधीवाद को लेकर नई बहस छिड़ गई है. एक तरफ कांग्रेस गांधी के नाम और विरासत को लेकर मुखर है, तो दूसरी तरफ तेज प्रताप यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या आज के नेता वास्तव में गांधी के रास्ते पर चल रहे हैं या सिर्फ उनके नाम का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रहे हैं.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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