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कोसी के पानी का बदला रंग, तटबंध के अंदर बसे लोगों को सताने लगी बाढ़ की चिंता

Updated at : 19 May 2025 6:46 PM (IST)
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कोसी के पानी का बदला रंग, तटबंध के अंदर बसे लोगों को सताने लगी बाढ़ की चिंता

अप्रैल माह बीत जाने के बाद भी कोसी नदी के पानी का रंग अब रंग बदलते ही तटबंध के अंदर रहने वाले लोगों को चिंता सताने लगी है. वैसे तो कोसी के पानी का रंग हर वर्ष बदलते रहता है.

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– गेरुआ रंग का पानी जल प्रवाह क्षेत्र में पानी बढ़ने का देता है संकेत सुपौल तटबंध निर्माण के बाद कोसी में गाद की मोटी परत 25 फीट तक जम गई है. इसी परत के कारण बांध के टूटने का खतरा हर साल बढ़ा रहा है. जानकारों के अनुसार कोसी हर साल 05 करोड़ 50 लाख टन गाद लाती है. बराह क्षेत्र में नदी के प्रवाह में हर साल 924.8 लाख घन मीटर सिल्ट गुजरता है. इसमें 198.20 लाख घन मीटर मोटा बालू, 247.90 लाख घन मीटर मध्यम आकार का बालू, 553.90 लाख घन मीटर महीन बालू है. नदी की पेटी में जमा होने वाला बालू बाढ़ के पानी के रास्ते में रूकावट पैदा करता है और नदी का पानी इस गाद को काट कर नया रास्ता बना लेता है. जिससे बांध पर खतरा हर साल बढ़ता है. अप्रैल माह बीत जाने के बाद भी कोसी नदी के पानी का रंग अब रंग बदलते ही तटबंध के अंदर रहने वाले लोगों को चिंता सताने लगी है. वैसे तो कोसी के पानी का रंग हर वर्ष बदलते रहता है. कभी मटमैला, तो कभी हरा और कभी लाल यानी गेरुए रंग का पानी. जानकर बताते हैं कि कोसी के भीतर पानी में लौह की मात्रा कम रहती है. जबकि इस इलाके में अधिकांश चापानलों से गेरुए रंग का पानी निकलता है. क्योंकि इस पानी में लौह (आयरन) की मात्रा अधिक रहती है. कभी पूर्णिया को काले पानी के नाम से जाना जाता था. इसका सूत्र भी पानी के कारण रहा है. कोसी के जल बहाव क्षेत्र में पानी के रंग परिवर्तन का दृश्य नया नहीं है. लोगों का कहना है कि जिस साल पानी के बढ़ने की संभावना बनी रहती है, उस साल कोसी में गहरे कत्थई रंग का पानी प्रचुर मात्रा में आता है. जल प्रवाह क्षेत्र में पानी के बढ़त की आशंका को गेरुआ रंग प्रमाणित करता है. तटबंध निर्माण के बाद 25 फीट गाद की परत जमी तटबंध निर्माण के बाद कोसी में गाद की मोटी परत 25 फीट तक जम गई है. इसी परत के कारण बांध के टूटने का खतरा हर साल बढ़ा रहा है. बराह क्षेत्र में नदी के प्रवाह में हर साल 924.8 लाख घन मीटर सिल्ट गुजरता है. इसमें 198.20 लाख घन मीटर मोटा बालू, 247.90 लाख घन मीटर मध्यम आकार का बालू, 553.90 लाख घन मीटर महीन बालू है. नदी की धारा में बहकर आने वाला गाद बाढ़ के पानी के रास्ते में बड़ा रुकावट कोसी की बाढ़ पर कई शोध पुस्तक प्रकाशित कर चुके आईआईटीयन व बाढ़ मुक्ति अभियान के संयोजक नदी विशेषज्ञ दिनेश कुमार मिश्र ने कहा कि नदी में बहकर आने वाले गाद (सिल्ट) की मात्रा अधिक होती है. उनकी पुस्तक दुइ पाटन के बीच में…प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कोसी हर साल 5 करोड़ 50 लाख टन गाद लाती है. सिंचाई आयोग बिहार की 1994 की एक रिपोर्ट के अनुसार बराह क्षेत्र में नदी के प्रवाह में हर साल 924.8 लाख घन मीटर सिल्ट गुजरता है. इसमें 198.20 लाख घन मीटर मोटा बालू, 247.90 लाख घन मीटर मध्यम आकार का बालू, 553.90 लाख घन मीटर महीन बालू है. श्री मिश्र के अनुसार नदी की पेटी में जमा होने वाला बालू बाढ़ के पानी के रास्ते में रूकावट पैदा करता है और नदी का पानी इस गाद को काट कर नया रास्ता बना लेता है. जिससे बांध पर खतरा हर साल बढ़ता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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