सुपौल में सफाई संकट पर लगा विराम: हड़ताल स्थगित, पांच दिन का अल्टीमेटम

30 टन कचरा सड़कों पर, लोगों का जीना हुआ मुश्किल
– पुलिस की कार्रवाई से भड़का विवाद – शहर में 36 घंटे तक ठप रही सफाई व्यवस्था सुपौल. नगर परिषद कर्मियों पर पुलिस की कथित एकपक्षीय कार्रवाई को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला, जिसके चलते सफाईकर्मी सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे. बताया गया कि बिना स्पष्ट कारण कर्मियों को हिरासत में लेकर बाद में पीआर बॉन्ड पर छोड़ने की घटना के विरोध में यह आंदोलन शुरू हुआ. मंगलवार को सभी सफाईकर्मी लोहियानगर चौक और नगर परिषद कार्यालय के समीप धरने पर बैठ गए. हड़ताल के कारण सुपौल नगर क्षेत्र में पिछले 36 घंटों से सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई, जिससे शहर के कई स्थानों पर कचरा जमा हो गया, वहीं जिला पदाधिकारी के आश्वासन पर तत्काल पांच दिनों के अल्टीमेटम पर सफाईकर्मियों ने हड़ताल स्थगित कर दिया. 30 टन कचरा सड़कों पर, लोगों का जीना हुआ मुश्किल हड़ताल का असर यह हुआ कि शहर के करीब 10 हजार घरों और प्रतिष्ठानों से प्रतिदिन निकलने वाला लगभग 30 टन कचरा जगह-जगह जमा हो गया. सड़कों पर फैली गंदगी और उससे उठती दुर्गंध ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया. कचरे के ढेर पर आवारा पशु घूमते नजर आए, जिससे हालात और भी खराब हो गए. शहर के कई इलाकों में लोगों को घर से निकलना मुश्किल हो गया. वहीं बाजारों में भी इसका असर साफ देखने को मिला. जनप्रतिनिधियों ने संभाला मोर्चा, डीएम से की मुलाकात स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद के मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा राघव के नेतृत्व में वार्ड पार्षदों और शहर के गणमान्य नागरिकों का एक शिष्टमंडल जिलाधिकारी सावन कुमार को पूरी स्थिति से अवगत कराया. जिलाधिकारी द्वारा मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद मुख्य पार्षद श्री झा ने धरना स्थल पर पहुंचकर सफाईकर्मियों को वार्ता की जानकारी दी. मुख्य पार्षद ने जैसे ही हड़ताल समाप्त करने की बात कही तो सफाई कर्मी ने इसका विरोध शुरू कर दिया. सफाई कर्मियों का कहना था कि जब तक थानाध्यक्ष व दोषी पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है. तब तक यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा. इसके बाद आधे घंटे तक नप अध्यक्ष सहित गणमान्य नागरिकों द्वारा सफाई कर्मियों को डीएम के आश्वासन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए समझाया गया. इसके बाद मुख्य पार्षद से कहा कि हम लोग पांच दिनों तक आंदोलन स्थगित करते हैं. अगर पांच दिनों में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन उग्र किया जायेगा. शिष्टमंडल में नगर परिषद के मुख्य पार्षद के अलावे जदयू जिलाध्यक्ष राजेंद्र यादव, अधिवक्ता नागेंद्र नारायण ठाकुर, डॉ विजय शंकर चौधरी, युगल किशोर अग्रवाल, राजद नेता अनोज कुमार आर्य उर्फ लव यादव, मो जमालउद्दीन, धर्मेंद्र सिंह पप्पू, विनय भूषण सिंह, वार्ड पार्षद मनीष सिंह, गगन ठाकुर, मिथिलेश मंडल, संदीप कुमार, सुनील कुमार सिंह, अमरेंद्र कुमार यादव आदि मौजूद थे. पांच दिन का अल्टीमेटम देकर हड़ताल स्थगित डीएम के आश्वासन के बाद सफाईकर्मियों ने फिलहाल अपनी हड़ताल स्थगित कर दी, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है. कर्मियों ने कहा कि यदि पांच दिनों के भीतर दोषी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे पुनः अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. हड़ताल स्थगित होने के बाद अब नगर परिषद के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर की सफाई व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य करना है. वहीं प्रशासन पर भी दबाव है कि वह समय सीमा के भीतर मामले का समाधान करें, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो. फिलहाल शहरवासियों को राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन आने वाले पांच दिन प्रशासन के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हो सकते हैं. नप बोर्ड की आपात बैठक, निंदा प्रस्ताव पारित घटना के बाद सोमवार को नगर परिषद की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी पार्षदों ने एकजुट होकर पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की. संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया. यह प्रस्ताव बिहार सरकार के गृह मंत्री को भेजने का निर्णय लिया. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नगर परिषद के सदस्य अब पुलिस विभाग द्वारा आयोजित किसी भी बैठक में भाग नहीं लेंगे. सरकारी कार्यालयों की सफाई और मानवबल की प्रतिनियुक्ति भी समाप्त की जाएगी.
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