बढ़ गयी तंबाकू उत्पाद की कीमत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 May 2016 12:56 AM

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तंबाकू निषेध. कोटपा के बहाने जमाखोरों की कट रही चांदी, प्रशासन उदासीन राज्य सरकार ने तंबाकू व तंबाकू उत्पादों पर पुन: प्रतिबंध लगाने की घोषण की है. इसके साथ ही जिला मुख्यालय में पान मसाला सहित तंबाकू उत्पादों की कालाबाजारी शुरू हो गयी है. इन उत्पादों की कालाबाजारी में लगे लोग ज्यादा मुनाफा कमाने में […]

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तंबाकू निषेध. कोटपा के बहाने जमाखोरों की कट रही चांदी, प्रशासन उदासीन

राज्य सरकार ने तंबाकू व तंबाकू उत्पादों पर पुन: प्रतिबंध लगाने की घोषण की है. इसके साथ ही जिला मुख्यालय में पान मसाला सहित तंबाकू उत्पादों की कालाबाजारी शुरू हो गयी है. इन उत्पादों की कालाबाजारी में लगे लोग ज्यादा मुनाफा कमाने में लग गये हैं.
सुपौल : राज्य सरकार द्वारा तंबाकू व तंबाकू उत्पादों पर पुन: प्रतिबंध लगाये जाने की चर्चा प्रारंभ होते ही जिला मुख्यालय में पान मसाला सहित तंबाकू उत्पादों की कालाबाजारी शुरू हो गयी है. इन उत्पादों की कालाबाजारी में लगे लोग चांदी काट रहे हैं. पान मसाला के कारोबार पर जिला स्तर पर प्रशासनिक अंकुश नहीं रहने के कारण कालाबाजारी में लिप्त धंधेबाजों का हौसला बुलंद हैं.
स्थिति यह है कि महज एक सप्ताह के भीतर पान मसाला व तंबाकू उत्पादों के मूल्य में कालाबाजारी के कारण 15 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गयी है. वहीं दूसरी तरफ तंबाकू एवं इससे बने उत्पादों के बिक्री व सेवन को लेकर जिला मुख्यालय में प्रशासनिक स्तर पर ढील रहने की वजह से इसकी बिक्री बेरोकटोक जारी है. हैरत है कि समाहरणालय, व्यवहार न्यायालय सहित अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर भी इसका सेवन खुलेआम किया जा रहा है.
सरकारी कार्यालय में हो रहा धूम्रपान: जिला प्रशासन की अध्यक्षता में गत दिनों हुई बैठक में घोषणा की गयी थी कि सरकारी कार्यालय व सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करते पाये जाने पर संबंधित व्यक्ति से जुर्माना वसूला जायेगा, लेकिन इस घोषणा के विपरीत सरकारी कार्यालय सहित सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान व तंबाकू का सेवन निरंतर जारी है. आलम यह है कि इन दिनों व्यवहार न्यायालय परिसर में लोगों द्वारा तंबाकू व गुटका खाकर थूकने की वजह से जगह-जगह दीवार व फर्श रंगे नजर आते हैं. कुछ यही स्थिति अधिकांश सरकारी संस्थानों व सार्वजनिक स्थलों की भी बनी हुई है. सरकारी कार्यालय का मुख्य द्वार तंबाकू खाकर थूकने वालों की मनमाफिक जगह बनी हुई है.
14 का रजनीगंधा 17 रुपये में मिल रहा: कालाबाजारी के कारण तंबाकू उत्पादों एवं पान मसाला के थोक एवं बड़े कारोबारी इन दिनों अपनी मनमरजी चला रहे हैं. जमाखोरी के कारण 14 रुपये में बिकने वाला रजनीगंधा पान मसाला इन दिनों 17 रुपये, पांच रुपये में मिलने वाला तुलसी का पाउच सात रुपये में बिक रहा है.
वहीं मधु पान मसाला की कीमत भी पांच से सात रुपये पाउच हो चुकी है. बाजार में उपलब्ध अन्य पान मसाला के पाउच के मूल्य में भी इसी तरीके से अचानक बढ़ोतरी की गयी है. बाजार के पान विक्रेता बताते हैं कि थोक विक्रेता द्वारा अचानक पान मसाला एवं तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर 20 से 25 फीसदी कीमतों की बढ़ोतरी की गयी है. इस कारण खुदरा बिक्री में भी कीमत को बढ़ाना मजबूरी हो गयी है.
एक जमाखोर के पास दर्जन गोदाम: पान मसाला के कालाबाजारी में जुटे बड़े धंधेबाजों के पास एक नहीं अनेक गोदाम मौजूद हैं. इसका खुलासा करते हुए एक ठेला चालक ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि एक व्यवसायी अपना कम से कम पांच से 12 गोदाम तक रखते हैं. कोटपा की घोषणा होते ही मुनाफाखोरों ने करोड़ों का पान मसाला सहित अन्य तंबाकू उत्पाद अपने गोदाम में भर लिया है. अब सभी व्यवसायी से ऊंची कीमत वसूल कर पान मसाला उपलब्ध करवा रहे हैं.
बहाना कोटपा का, कर रहे जमाखोरी
राज्य सरकार द्वारा कोटपा के तहत तंबाकू एवं अन्य नशीले उत्पादों को प्रतिबंधित किये जाने का पूंजीपति- व्यवसायी जम कर फायदा उठा रहे हैं. कोटपा कानून को ढाल बना कर ऐसे जमाखोर बड़े मुनाफा के चक्कर में लगे हुए हैं.
छोटे दुकानदार बताते हैं कि कोटपा का बहाना बता कर पान मसाला के थोक व बड़े कारोबारी पहले माल उपलब्ध नहीं होने का प्रचार प्रसार करवाते हैं. फिर एकाध दिन बाद ऊंची कीमत में माल दूसरे जिला से मंगवाने की बात कह कर छोटे दुकानदारों से मनमानी कीमत वसूल लेते हैं. और तो और ऐसे धंधेबाज पान मसाला का पेटी अपने दुकान में नहीं रख समीप के अन्य गोदाम में रखते हैं.
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