मिलीभगत. जब साहब सहाय रहें गुरुजी पर तो...

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Mar 2016 6:31 AM

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बिना योगदान लेते हैं वेतन सदर प्रखंड के बीइओ व निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की मिलीभगत से शिक्षिका के घर बैठे वेतन पाने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है. जानकारों की मानें तो मध्य विद्यालय धोरे कटैया की शिक्षिका सुलेखा झा तो एक बानगी मात्र हैं. जिले में ऐसे सैकडों शिक्षक व शिक्षिकाएं बीइओ […]

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बिना योगदान लेते हैं वेतन

सदर प्रखंड के बीइओ व निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की मिलीभगत से शिक्षिका के घर बैठे वेतन पाने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है. जानकारों की मानें तो मध्य विद्यालय धोरे कटैया की शिक्षिका सुलेखा झा तो एक बानगी मात्र हैं. जिले में ऐसे सैकडों शिक्षक व शिक्षिकाएं बीइओ के कृपा से घर बैठे वेतन का लाभ ले रहे हैं.
सुपौल : जिले के विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षकों पर नियंत्रण रखने, शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने समेत अन्य कार्यों के लिए शिक्षा विभाग द्वारा पदाधिकारियों की पदस्थापना की जाती है. लेकिन जिले में पदस्थापित शिक्षा विभाग के कई अधिकारी नियम और विभागीय निर्देश की अवहेलना कर निजी स्वार्थ की पूर्ति पर अधिक ध्यान दे रहे हैं. यही वजह है कि बिना विद्यालय में योगदान किये ही लंबे समय तक शिक्षिका का वेतन भुगतान किया जाता रहा.
प्रतिनियोजन के लिए तय है सुविधा शुल्क : शिक्षकों के गैर शैक्षणिक एवं शैक्षणिक कार्य के नाम पर प्रतिनियोजन का मुख्य रूप से संचालन बीइओ कार्यालय से ही होता है. यहां प्रतिनियोजन के एवज में सुविधा शुल्क तय है. तय सुविधा शुल्क दे कर कोई भी शिक्षक जब तक चाहें कहीं प्रतिनियुक्त रह सकते हैं. जानकारी अनुसार मनमाफिक विद्यालय जहां ड्यूटी नहीं करनी पड़े में प्रतिनियोजन के लिए तीन से चार हजार रुपये का शुल्क तय है.वहीं कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं
जो आधा वेतन दे कर विद्यालय जाने के झमेले से मुक्ति पा जाते हैं. सूत्रों की मानें तो प्रतिनियोजन के नाम पर बीइओ कार्यालय में प्रति माह लाखों रुपये की अवैध उगाही हो रही है. इस प्रतिनियोजन की वजह से जहां विद्यालयों में पठन-पाठन कार्य प्रभावित होता है. वहीं उच्च न्यायालय, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, निदेशक एवं आरडीडीइ के आदेश को ठेंगा दिखा कर बीइओ कार्यालय के बीआरपी एवं अन्य मालामाल हो रहे हैं.
आदेश से होती है सुविधा शुल्क में वृद्धि : न्यायालय एवं विभाग ने शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्य में प्रतिनियाजन को अवैध माना है. इसके लिए विभाग के वरीय पदाधिकारियों द्वारा समय-समय पर कड़े निर्देश भी जारी किये जाते हैं. लेकिन प्रतिनियोजन के इस खेल से जुड़े प्रखंड स्तर के पदाधिकारी व कर्मियों के लिए उक्त आदेश फल दायक ही होता है.जानकारी अनुसार वरीय पदाधिकारी द्वारा जारी आदेश के बाद प्रतिनियोजित शिक्षकों का प्रतिनियोजन कागज पर तत्काल रद्द कर दिया जाता है.वहीं कुछ दिनों के बाद वरीय पदाधिकारी के आदेश का भय दिखा कर सुविधा शुल्क में वृद्धि के बाद पुन: उक्त शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति कर दी जाती है.
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