आत्मा का कभी नाश नहीं होता

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सिमराही : जीव से जीवन, जीवन से धर्म और धर्म से मनुष्य को मनुष्यता का बोध होता है. साथ ही प्राणियों को सद्गति मिलती है. उक्त बातें जैन धर्म के श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी महाराज ने राघोपुर स्थित मारवाड़ी टोला में आयोजित प्रवचन समारोह में कहीं. उन्होंने बताया कि […]

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सिमराही : जीव से जीवन, जीवन से धर्म और धर्म से मनुष्य को मनुष्यता का बोध होता है. साथ ही प्राणियों को सद्गति मिलती है. उक्त बातें जैन धर्म के श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी महाराज ने राघोपुर स्थित मारवाड़ी टोला में आयोजित प्रवचन समारोह में कहीं. उन्होंने बताया कि जगत में जीव व अजीव दोनों विद्यमान है.

बताया कि चैतन्य जानने की प्रवृत्ति ही जीव है. जिन्होंने चैतन्य को नहीं जाना, वही अजीव का कारण है. प्राणियों को कर्म के अनुरूप फल भुगतना ही पड़ता है. साथ ही सद्कर्म करने वाले प्राणी ही इस जगत में महान बन कर आते हैं. जन्म व मरण सृष्टि का शाश्वत नियम है, जो अनवरत चलता ही रहेगा. पर, प्राणियों को मृत्यु के बाद चार गति झेलनी पड़ती है.

नरक, नियंत्रक, मनुष्य व देव ये चार गति प्राणियों को जीवन में किये गये कर्म के अनुरूप प्राप्त होते हैं. प्राणियों को अपने जीवन में अच्छे कर्म करने की जरूरत है, ताकि मनुष्य का जीवन चक्र उनके अनुरूप चलता रहे.शुभ कर्म के हैं तीन सूत्रआचार्य महाश्रमण जी ने प्राणियों को अच्छे कर्म करने के लिए तीन उपाय बताये. कहा कि आप जिस धर्म व संप्रदाय को मानते हैं,

उन्हीं को मानें, लेकिन जीवन भर शुभ कर्म करने की ही पहल करें. शुभ कर्म के तीन सूत्र नैतिकता, नशा मुक्ति व अहिंसा को अपना कर प्राणी अपने जीवन को सार्थक व धन्य कर सकते हैं. बताया कि मनुष्य अपने जीवन में शुभ वअशुभ कर्म का आवश्यक रूप से भोग करता है. साथ ही मनुष्य को कर्म के अनुरूप ही सद्गति मिलती है. आचार्य ने शरीर व शरीरी पर चर्चा करते हुए बताया कि शरीरी नश्वर होता है, जबकि शरीर में बसने वाली आत्मा अजर, अमर व अविनाशी है.

आत्मा चेतन है जिसका कभी भी नाश नहीं होता. पर जब ये आत्मा शरीर को छोड़ देता है तो शरीर जिसे जड़ कहा जाता है. वह कोई कार्य नहीं कर सकता. बताया कि प्राणी ईमानदारी, नैतिकता व अहिंसा की राह अपना कर अपने जीवन को सार्थक कर सकता है.जन प्रतिनिधियों ने आयोजन को सराहाराघोपुर श्वेतांवर जैन तेरा पंथ के सदस्य संत एवं साध्वी का अभिवादन महिला मंडल के सदस्यों द्वारा वन्दना व गीत की प्रस्तुति देकर किया गया.

मौके पर उपस्थित क्षेत्रीय विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव ने आचार्य महाश्रमन जी महाराज का अविवादन करते कहा कि आचार्य जी की यह यात्रा महात्मा गांधी व विनोबा भावे की यात्रा की तरह है .उन्होंने कहा कि जब भी देश में महापुरुषों व विद्व जनों द्वारा पद यात्रा आरंभ किया गया. देश में व्यापक बदलाव आया है.

उन्होंने आचार्य जी को अहिंसा की पुजारी के साथ साथ इंसानियत और मानवता की पुजारी बताया. उन्होंने प्रवचन श्रवण करने आये लोगों से आचार्य जी के तीन सूत्र अहिंसा, नैतिकता और नशामुक्ति को अपनाने की अपील की. बीजेपी नेता सचिन माधोगरिया ने अपनी कविता ‘हे मनुष्य अब देर न कर जीवन बड़ा अनमोल है ‘

पढ़ कर लोगो को इस राह पर चलने की अपील की. बीडीओ मनोज कुमार ने आचार्य का अभिवादन करते कहा कि 540 वीसी में बिहार की धरती पर ही इस धर्म का उदय हुआ था. उन्होंने भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए, देश की आर्थिक उन्नति को बरकरार रखने के लिये तथा विश्व में मानवता व नैतिकता को बचाने के लिए आचार्य की इस राह पर चलने की अपील लोगों से किया.

20 सूत्री अध्यक्ष प्रो कमल प्रसाद यादव ने आचार्य द्वारा निकाली गयी अहिंसा यात्रा को सत सत नमन करते हुए कहा कि धर्म की राह पर चल कर पुरे विश्व को मानवता की पाठ पढ़ाने वाले इस महान पुरुष को भुलाया नहीं जा सकता. इनकी मुखारविंद से निकलने वाली हर एक शव्द अमृत वाणी की तरह है. इस मौके पर प्राचार्य वैद्यनाथ भगत, राजकुमार माधोगरिया, बैद्यनाथ यादव सहित दर्जनो लोगो ने जैन धर्म के सदस्यों का अभिवादन किया.

आयोजन के मौके पर लिया संकल्पराघोपुर प्रखंड के मारवाड़ी टोला में आयोजित एक दिवसीय प्रवचन सभा में जैन श्वेतांवर तेरापंथ संघ के आचार्य श्री महा श्रमन जी महाराज ने उपस्थित श्रोताओ व छात्र – छात्राओं को जीवन में नशा नहीं करने का संकल्प दिलाया.

मौके पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने संत महाराज के अमृत वाणी से प्रभावित होकर जीवन में किसी तरह की नशा नहीं करने का संकल्प लिया. वहीं अपने उम्र भर नशा नहीं करने की संकल्प लेने वाले में पूर्व प्राचार्य सह 20 सूत्री अध्यक्ष प्रो कमल प्रसाद यादव,जदयू नेता वैद्यनाथ प्रसाद यादव, जदयू विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, प्राचार्य वैद्यनाथ भगत, राघोपुर बीडीओ मनोज कुमार सहित दर्जन भर छात्र छात्रा, स्थानीय महिला सहित अन्य शामिल हैं.

जय घोष के साथ हुआ स्वागतराघोपुर प्रखंड क्षेत्र में प्रवेश के साथ ही जैन तेरा पंथ धर्म संघ के मानने वाले अनुयायी की भीड़ ने आचार्य महाश्रमण जी महाराज व उनके साथ चल रहे करीब सैकड़ों साधू एवं साध्वी का स्वागत जय घोष के साथ किया. इस दौरान सैकड़ों की संख्या में विद्यालयों के छात्र छात्रा एनएच 57 के दोनों किनारे कतार बद्ध होकर बाबा की दर्शन के लिए खड़े दिखे.

आयोजन कर्ता द्वारा जगह जगह दर्जनो तोरण द्वार बनाया गया था. जहां आचार्य के पीछे उनके साथ साथ साधू एवं साध्वी चल रहे थे. साथ ही श्रदालुओं का हुजूम रहने के कारण घंटों भर फोर लेन पर यातायात वन वे देखा गया.

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