प्राणियों की नौका डूबोते हैं 18 छद्रि

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प्राणियों की नौका डूबोते हैं 18 छिद्र जैन श्वेतांबर तेरा पंथ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी महाराज ने किया प्रवचन फोटो – 15 व 16कैप्सन – संबोधित करते आचार्य व उपस्थित श्रद्धालु प्रतिनिधि, प्रतापगंज काल, वाणी व मन को समेटे हमारा शरीर एक नौका है. यह प्राणियों को संसार रूपी सागर से पार लगाता […]

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प्राणियों की नौका डूबोते हैं 18 छिद्र जैन श्वेतांबर तेरा पंथ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी महाराज ने किया प्रवचन फोटो – 15 व 16कैप्सन – संबोधित करते आचार्य व उपस्थित श्रद्धालु प्रतिनिधि, प्रतापगंज काल, वाणी व मन को समेटे हमारा शरीर एक नौका है. यह प्राणियों को संसार रूपी सागर से पार लगाता है. यह बातें जैन श्वेतांबर तेरा पंथ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी महाराज ने प्रखंड मुख्यालय स्थित दो दिवसीय मंगल प्रवास के अंतिम दिन शनिवार को प्रवचन के दौरान अनुयायियों से कही. आचार्य जी ने बताया कि मानव रूपी नौका में हिंसा, क्रोध, लोभ, झूठ, नशा, चोरी व अन्य 18 छिद्र हैं. जो प्राणियों के नौका को डूबोये रहते हैं. अनुयायियों से कहा कि आप सभी ने मानव रूपी जीवन पाया है तो आपको संसार रूपी सागर से पार पाने को लेकर शरीर रूपी 18 छिद्रों को बंद करना होगा. बताया कि शरीर स्थित सभी छिद्रों का संबंध एक दूसरे से है.गुरु देते हैं छिद्र सुरक्षित रखने के उपाय आचार्य ने बताया कि प्राणी अपनी चतुराई के साथ अपने झूठ पर परदा डाल देते हैं. लेकिन यहां से बच निकलना चतुराई नहीं है. क्योंकि ईश्वर के दरबार में इससे बच निकलना कठिन व दुरुह है. कहा कि सृष्टि पर कभी कभार निरअपराधों को सजा मिल जाता है और अपराधी बच निकलते हैं. आचार्य ने कहा कि यह पूर्व जन्म के कर्म का फल प्राणियों को इस जन्म में भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने द्वारा किये गये बुरे कर्मों को दूसरों से धरती पर छिपा सकता. लेकिन सत्य के संसार यानी कर्मोंं के दरबार से बच पाना मुश्किल है. जिस कारण जन्म- मरण के संसार से पार पाने हेतु सभी छिद्रों को सुरक्षित करने का उपाय गुरु के द्वारा ही किया जा सकता है. उन्होंने जन्म व मरण से मुक्ति को गुरु का कृपा बताया. साधना के हैं 12 भाग प्रवचन के दौरान आचार्य जी ने बताया कि प्राणियों के लिए 12 प्रकार की साधनाएं हैं. बताया कि मनुष्यों द्वारा निरंतर साधना किये जाने से तन व मन दोनों शुद्ध होता है. उन्होंने कहा कि बिहार की भूमि भगवान महावीर की जन्म भूमि है. जिस कारण यहां की धरती धन्य है. इसके पूर्व साध्वी कनक प्रभा ने अनुयायियों से कहा कि गुरु सोये हुए लोगों को जगाता है. कहा कि प्राणियों को प्रात: जगने के साथ ही गुरु का भजन, वंदना आदि करना चाहिए. कहा कि उक्त कार्य से दैनिकी जीवन प्रारंभ करने से प्राणियों को अमृत रस की प्राप्ति होती है. कहा कि मनुष्य को जीवन में अणु ब्रतों को अपनाना चाहिए. बताया कि अहिंसा, सत्य, नशा मुक्त जीवन, सरलता व क्रोध ये सभी अणु व्रत हैं. इसे अपनाने से प्राणियों का जीवन सुधर जायेगा. कहा कि विवेक चक्षु को नहीं जानने वाले ही गलत राह पर निकलते हैं. प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित कमल मुनि ने भगवान महावीर के दर्शन को विस्तार पूर्वक बताया. साथ ही उमेश महतो, गंग परिवार, महिला मंडल की अध्यक्ष दुर्गा देवी भदानी, किशोर मंडल, रौनक कुमार, अभय राज छाजेड़ आदि ने आचार्य की वाणी का वंदना करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया.

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