नहीं है ऑटो पड़ाव, यात्रियों को परेशानी
नहीं है ऑटो पड़ाव, यात्रियों को परेशानी फोटो – 12कैप्सन – सड़क किनारे ऑटोसुपौल कोसी के इलाके के लोगों ने सुपौल के जिला बनने पर काफी खुशी जाहिर किया था. लोगों ने सोचा था कि अब इस पिछड़े क्षेत्रों का समुचित विकास होगा. साथ ही जिला मुख्यालय का सीरत व सूरत में भी व्यापक बदलाव […]
नहीं है ऑटो पड़ाव, यात्रियों को परेशानी फोटो – 12कैप्सन – सड़क किनारे ऑटोसुपौल कोसी के इलाके के लोगों ने सुपौल के जिला बनने पर काफी खुशी जाहिर किया था. लोगों ने सोचा था कि अब इस पिछड़े क्षेत्रों का समुचित विकास होगा. साथ ही जिला मुख्यालय का सीरत व सूरत में भी व्यापक बदलाव किया जायेगा. लेकिन आवागमन को लेकर पड़ाव सहित समुचित व्यवस्था नहीं रहने से लोगों को जिला मुख्यालय में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आलम यह है कि सुपौल को तकरीबन ढ़ाई दशक पूर्व जिला बनने का गौरव प्राप्त हुआ. आलम यह है कि शौचालय व पेयजल की व्यवस्था तो दूर. अब तक मुख्यालय स्थित एक भी स्थायी ऑटो पड़ाव भी नहीं बनवाया गया है. इसे विभागीय उदासीनता कहें या फिर कुछ और. इसका खामियाजा प्रतिदिन ग्रामीण सहित दूर दराज से आये लोगों ही उठाना पड़ रहा है. मुख्यालय में ऑटो पड़ाव का है अभाव विभागीय उदासीनता के कारण मुख्यालय स्थित ऑटो पड़ाव नहीं बनाये जाने के कारण दैनिकी आवाजाही करने वाले यात्रियों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. मालूम हो कि सुपौल जिले में 11 प्रखंड शामिल हैं. जहां से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग जिला मुख्यालय का आवाजाही कर रहे हैं. जिला मुख्यालय से विभिन्न क्षेत्रों की आवाजाही को लेकर तकरीबन सैकड़ों की संख्या में ऑटो का परिचालन हो रहा है. बावजूद इसके विभाग द्वारा यात्रियों के मद्देनजर समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराया गया है. जिस कारण ऑटो चालकों को सड़क किनारे वाहन खड़ी कर यात्रियों को चढ़ाने व उतारने की विवशता है. ऑटो चालकाें की है विवशता ऑटो चालकों ने बताया कि स्थायी पड़ाव को लेकर कई बार संबंधित विभाग को अवगत कराया है. लेकिन विभाग द्वारा इस दिशा में किसी प्रकार का पहल नहीं किया जा रहा है. बताया कि विभाग द्वारा वाहनों के टैक्स वसूली को लेकर प्रति वर्ष सैरात व बंदोबस्ती की जाती रही है. साथ ही संवेदक द्वारा उन सबों से प्रति ट्रिप 10 रुपये भी वसूला जा रहा है. लेकिन स्थायी पड़ाव की दिशा में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है. कई चालकों ने बताया कि वे अपने घर से निकलते समय बोतल में पानी लेकर चलते हैं. ताकि दिन भर स्वच्छ जल ग्रहण कर सके. बताया कि कभी कभार पानी को लेकर तरस रहे ग्रामीण क्षेत्र के यात्रियों को भी पिला देते हैं. लेकिन इस तरह की व्यवस्था से वाहन चालक हताश व निराश हैं. बताया कि पड़ाव नहीं रहने के कारण सड़क किनारे ही वाहन खड़ी करने की विवशता है.दुकानदारों के साथ होता है नोक झोक ऑटो चालको ने बताया कि पड़ाव के अभाव में यात्रियों को चढ़ाने व उतारने को लेकर सड़क के किनारे वाहन को खड़ी करनी पड़ती हैं. बताया कि कुछ चौराहे पर हाट सहित भीड़ वाले दिनों में स्थानीय दुकानदारों से नोक झोंक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. जहां यात्रियों सहित अन्य लोगों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत होता है. लेकिन चालकों की विवशता है कि पड़ाव नहीं रहने के कारण वे अपनी वाहन को कौन सी स्थान पर खड़ी करे. बताया कि विभाग द्वारा स्थायी पड़ाव बनाये जाने पर एक हद तक जाम की समस्या से भी निजात मिल सकता है. साथ शहर की सूरत व सीरत दोनों में परिवर्तन देखने को मिलेगा यात्रियों ने सुनायी व्यथा स्थानीय सहित दूर- दराज क्षेत्रों के लोगों ने बताया कि मुख्यालय का आवागमन एक बड़ी समस्या बन रही है. खास कर सफर में महिला यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. स्थिति यह है कि दूर दराज क्षेत्र से आये महिलाओं को शौचालय के लिए या तो स्थानीय लोगों के घर का सहारा लेना पड़ता है. या फिर दो – तीन किलोमीटर की दूरी तय कर रेलवे स्टेशन व बस पड़ाव स्थित सुलभ शौचालय जाने को विवश होना पड़ रहा है. साथ ही सुलभ शौचालय में शुल्क देकर प्रसाधन का उपयोग करने से उन लोगांे को आर्थिक क्षति का भी सामना करना पड़ रहा है. यात्रियों ने बताया कि सरकार द्वारा सभी जगहों पर मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है. जब जिला मुख्यालय की स्थिति इस कदर बना हुआ है. तो प्रखंड मुख्यालय की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. बताया कि सरकार से लेकर विभाग द्वारा घर – घर शौचालय व स्वच्छ पेयजल को लेकर बढ़ चढ़ कर विज्ञापन किया जा रहा है. लेकिन विभाग को समझ आनी चाहिए कि कम से कम मुख्यालय में पहले इन सुविधाओं को उपलब्ध करावे. ताकि लोग मुख्यालय के बनावट से सीख लेकर स्वयं व अपने परिवारों को इस अनुरूप ढ़ाल सके.
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