उमंग व उत्साह के साथ मनाया भैया दूज

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उमंग व उत्साह के साथ मनाया भैया दूज फोटो – 1कैप्सन – भाई से निमंत्रण ले रही बहन.प्रतिनिधि, सुपौलभाई व बहन के स्नेह का त्योहार भैया दूज जिले भर में उमंग व उत्साह के साथ मनाया गया. कार्तिक माह को महापर्व के रूप में जाना जाता रहा है. हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा इस माह में कृष्ण […]

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उमंग व उत्साह के साथ मनाया भैया दूज फोटो – 1कैप्सन – भाई से निमंत्रण ले रही बहन.प्रतिनिधि, सुपौलभाई व बहन के स्नेह का त्योहार भैया दूज जिले भर में उमंग व उत्साह के साथ मनाया गया. कार्तिक माह को महापर्व के रूप में जाना जाता रहा है. हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा इस माह में कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि से लेकर शुक्ल द्वितीया तक पांच दिवसीय त्योहार मनाये जाने की परंपरा रही है. वहीं भाई दूज के त्योहार को लेकर पौराणिक कथा भी प्रचलित है. भैया दूज को लेकर बालिका सहित महिलाएं एक सप्ताह पूर्व से ही तैयारी में जुट गयी थीं. शुक्रवार के सुबह ही महिलाओं ने पूजन सामग्री एकत्रित कर हर्षोल्लास के साथ भाई के सुख व समृद्धि की कामना की. वहीं भाईयों को विभिन्न प्रकार के व्यंजन बना कर खाना खिलाया. जबकि इस त्योहार के मौके पर भाईयों ने ससामर्थ्य उपहार देकर अपनी बड़ी बहनों से आशीर्वाद प्राप्त किया. साथ ही छोटी बहनों को स्नेह पूर्वक सौभाग्य रहने का कामना किया. भैया दूज को लेकर पौराणिक कथा भैया दूज त्योहार मनाये जाने को लेकर पौराणिक कथा भी प्रचलित है. मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को पुण्य सलीला यमुना ने भाई यम को अपने घर बुला कर भोजन कराया था. जहां यम ने बहन यमुना को वर मांगने को कहा. जहां पुण्य सलीला यमुना ने अपने भाई से कहा कि उक्त तिथि को जो भी बहन यमुना जल से स्नान कर अपने भाईयों को भोजन करायेगा वे सभी यम की यातना से मुक्त हो जायेंगे. बहन यमुना द्वारा भाई यम से की गयी. याचना पर उन्होंने वरदान की स्वीकृति दे दिया. तभी से कार्तिक द्वितीया शुक्ल तिथि को भैया दूज का त्योहार मनाया जाता रहा है. उपवास कर लेती हैं निमंत्रण भैया दूज के मौके पर सभी बहन उपवास में रहती है. वहीं छोटी- छोटी बच्ची फलाहार कर अपने भाई का आशीर्वाद लेने के उपरांत भोजन करती है. बहनों द्वारा भाईयों के माथे पर रोली, अक्षत आदि का टीका लगा कर निमंत्रण लिया जाता है. इसके साथ ही बहन अपने भाई से संकट के समय साथ देने का वचन लेते हुए हाथ में कलावा बांधती हैं. साथ ही विविध प्रकार के व्यंजन बना कर भाइयों के समक्ष परोसा जाता है. उपहार देने की है परंपरा वैसे तो उपहार देने की परंपरा त्योहार के आरंभिक काल से ही रहा है. लेकिन आधुनिक दौर में भाईयों द्वारा अपने बहन को ससामर्थ्य विशेष तरीके का उपहार दिया जा रहा है. कहीं वस्त्र व रुपये देकर तो कहीं जेवरात या फिर बहन को मनोनुकूल उपहार दिया गया.

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