चिकेन के भाव बिक रहे लहसुन व अदरक सेब से भी महंगा हुआ गोभी व प्याज

Updated at : 06 Nov 2019 8:10 AM (IST)
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चिकेन के भाव बिक रहे लहसुन व अदरक सेब से भी महंगा हुआ गोभी व प्याज

शंकर कुमार, सुपौल : जिले में इन दिनों साग-सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं. जिसके कारण खास तौर पर गरीब, मध्यम व निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के घरेलू बजट का बंटाधार हो गया है. आलम यह है कि बाजार में इन दिनों आम सब्जियों के दाम औसतन 50 रुपये प्रति किलो के ऊपर चला […]

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शंकर कुमार, सुपौल : जिले में इन दिनों साग-सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं. जिसके कारण खास तौर पर गरीब, मध्यम व निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के घरेलू बजट का बंटाधार हो गया है. आलम यह है कि बाजार में इन दिनों आम सब्जियों के दाम औसतन 50 रुपये प्रति किलो के ऊपर चला गया है. यह स्थिति करीब दो महीने से बनी हुई है. बारिश प्रारंभ होने के बाद से ही सब्जियों की कीमत में बेतहाशा वृद्धि शुरू हो गयी थी.

जो समय के साथ बढ़ता चला गया. अब जबकि मानसून के साथ ही पर्व-त्योहार का मौसम भी समाप्त हो चुका है. बावजूद साग-सब्जियों की कीमत में आग लगी हुई है. जिससे समाज का हर वर्ग और तबका हलकान है. स्थिति यह है कि कई सब्जियों के दाम तो पनीर व चिकन की कीमत को भी पार कर चुकी है. नतीजा है कि लोग सब्जी के बजाय अन्य खाद्य पदार्थों का विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिये हैं.
कई लोगों ने बताया कि उनके घरों में बेसन बड़ी, अदौरी, पनीर व कंचु के पत्तों जैसी सब्जियों का उपयोग शुरू हो गया है. वहीं कुछ सामिष लोगों ने तो यह भी कहा कि सब्जियों के दाम में उछाल आने के बाद उनके घरों में अंडे व चिकन आदि की खपत बढ़ गयी है. हालांकि प्याज व लहसुन जैसी जरूरी सब्जियों की कीमत में बढ़ोतरी के कारण कुछ भी बनाना महंगा साबित हो रहा है.
पानी में बर्बाद हुई फसल : जानकार बताते हैं कि कई प्रमुख सब्जियों की खेती जून-जुलाई के महीने में की जाती है. जिसका उत्पाद शरद ऋतु प्रारंभ होने तक जारी रहता है. लेकिन दुर्भाग्यवश इस साल मानसून के प्रारंभिक काल में करीब एक सप्ताह तक जम कर बारिश हुई. जिससे सब्जी के नौनिहाल पौधों व लताओं को भारी नुकसान पहुंचा.
वहीं भादो माह के अंतिम दिनों में पांच दिनों तक लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने बची-खुची कसर पूरी कर दी. नतीजा हुआ कि सब्जियों की खेती पूरी तरह चौपट हो गयी. जिसके कारण इसकी कीमतों में जबरदस्त उछाल आया.
समस्तीपुर व फारबिसगंज से होता है आयात
जिले में सब्जी की खेती चौपट हो जाने के बाद इस व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों ने बाहर से सब्जी खरीद कर लाना शुरू कर दिया. स्वभाविक रूप से इसकी कीमत में वृद्धि हुई.
कई सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि सुपौल जिले में मुख्य रूप से अररिया के फारबिसगंज एवं पश्चिम दिशा में समस्तीपुर जिले से सब्जी का आयात किया जाता है. समस्तीपुर जिला सब्जी की खेती के लिये पूर्व से प्रसिद्ध है. जबकि फारबिसगंज मंडी में बंगाल के सिलीगुड़ी एवं पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी सब्जी पहुंचती है. जिसे खरीद कर सुपौल के बाजार में बेचना महंगा साबित होता है.
सब्जियों की कीमत
प्याज : 80 रुपये किलो
आलू : 20 रुपये किलो
बैंगन : 50 रुपये
मूली : 60 रुपये
परवल : 60 रुपये
गोभी : 80-100 रुपये
टमाटर: 60 रुपये
मिर्च : 60-70 रुपये
खीरा : 60 रुपये
भिंडी : 50 रुपये
पत्ता गोभी : 40-50 रुपये
सरसों साग : 20 रुपये
गाजर : 120 रुपये
शिमला मिर्च : 160 रुपये
लहसुन : 200 रुपये
अदरक : 200 रुपये
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