श्रमदान से बने सुरक्षा बांध को ले प्रशासन व ग्रामीणों का मंथन
Author Prabhat khabar digital desk
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किसनपुर : कोसी बांध के अंदर नौआबाखर एवं बौरहा के बीच श्रमदान एवं जन सहयोग से बनाए गए 600 मीटर लंबे सुरक्षा बांध को लेकर जिला प्रशासन तथा ग्रामीणों के बीच 15 दिनों से मंथन का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. रविवार को जिला पदाधिकारी की उपस्थिति में समाहरणालय में करीब […]
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किसनपुर : कोसी बांध के अंदर नौआबाखर एवं बौरहा के बीच श्रमदान एवं जन सहयोग से बनाए गए 600 मीटर लंबे सुरक्षा बांध को लेकर जिला प्रशासन तथा ग्रामीणों के बीच 15 दिनों से मंथन का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. रविवार को जिला पदाधिकारी की उपस्थिति में समाहरणालय में करीब दो दर्जन ग्रामीणों के साथ वार्ता किया गया. वार्ता के बाद निर्णय के आलोक में एसडीओ कयूम अंसारी ने शिष्टमंडल के साथ सुरक्षा बांध पर पहुंचकर निरीक्षण किया.
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एसडीओ के पहुंचते ही स्थानीय ग्रामीण सुरक्षा बांध पर बांध को तोड़ने से मना करते हुए कहा कि इससे पूर्व चैनल की कुछ खुदाई कर कंपनी छोड़ कर चला गया. अगर चैनल की सफाई की जाती है तो पानी का बहाव सीधा हो जाएगा. जिससे पूर्वी तथा पश्चिमी किसी भी बांध पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
अभी वर्तमान में धीमी गति से पानी बह रहा है. ग्रामीणों के कहने पर स्थाई निदान हेतु एसडीओ द्वारा उस स्थान का मुआयना किया गया. जिसके बाद एसडीओ ने कहा कि कोसी विभाग के इंजीनियर से जांच करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. जिला पदाधिकारी ने शिष्ट मंडल से कहा कि प्रशासन नहीं चाहता की बांध तोड़कर आप लोगों की क्षति हो. मगर बनाया गया बांध टेक्निकल तरीका से नहीं बनाया गया है.
अगर बांध टूट जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होगा. रिपोर्ट में साफ लिखा है कि सुरक्षा बांध के कारण पानी का बहाव 30 प्रतिशत कम हो जाएगा. जिसका सीधा असर पश्चिमी तटबंध पर पड़ेगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि अक्टूबर महीने में केंद्रीय टीम द्वारा जांच करवा कर वहां स्थायी बांध बनाने की पहल की जाएगी. इसी सहमति पर एसडीओ ने स्थल पर जाकर लोगों से आग्रह किया. लेकिन ग्रामीणों ने बांध तोड़ने से मना कर दिया. एसडीओ ने कहा अचानक पानी बढ़ जाने से कुशहा त्रासदी जैसी स्थिति बन सकती है.
जिसका कोपभाजन प्रशासन को सहना होगा. प्रशासन जान-माल की सुरक्षा हेतु काम करेगी. उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि जल संसाधन विभाग ने अपना फायदे के लिए डीएम को गलत रिपोर्ट दिया है. बाद में ग्रामीणों द्वारा कहा गया कि अगर प्रशासन द्वारा बांध तोड़ा जाता है तो विरोध नहीं करेंगे. लेकिन स्वयं से बांध नहीं तोड़ सकते. उपस्थित ग्रामीणों में सूर्यनारायण यादव प्रसाद, सुशील यादव, उदय चौधरी, जगदीश यादव, राम प्रसाद साह, गुलाब हसन आदि लोग मौजूद थे.
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