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ट्यूशन के दौरान हुआ था प्रेम शादी के बाद हुआ था खूनी संघर्ष

Updated at : 06 Jun 2019 3:32 AM (IST)
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ट्यूशन के दौरान हुआ था प्रेम शादी के बाद हुआ था खूनी संघर्ष

महिषी : स्थानीय ग्रामीण रामप्रवेश राय का पुत्र रूपेश गांव के ही भूपेंद्र यादव की पुत्री रूपम को ट्यूशन पढ़ाता था. इस दौरान दोनों के बीच बढ़ा आकर्षण दोनों पक्षों के बीच तनाव का कारण बना. रूपेश व रूपम दोनों ने एक दूसरे के साथ जिंदगी निर्वहन करने का मन बना 24 अगस्त 2017 को […]

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महिषी : स्थानीय ग्रामीण रामप्रवेश राय का पुत्र रूपेश गांव के ही भूपेंद्र यादव की पुत्री रूपम को ट्यूशन पढ़ाता था. इस दौरान दोनों के बीच बढ़ा आकर्षण दोनों पक्षों के बीच तनाव का कारण बना. रूपेश व रूपम दोनों ने एक दूसरे के साथ जिंदगी निर्वहन करने का मन बना 24 अगस्त 2017 को गांव छोड़ दरभंगा के श्यामा मंदिर में शादी रचा ली थी. इसके बाद 25 अगस्त को दरभंगा में लेख्य प्रमाणक के समीप स्वेच्छा से शादी करने व साथ-साथ जीने मरने का प्रण लिया था.

लड़की के पिता ने लड़का व उसके परिजनों पर अपहरण का मामला दर्ज कराया था. मामले को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी बढ़ती गयी व राजनीतिक तूल पकड़ने लगा. तत्कालीन थानाध्यक्ष रणवीर कुमार ने स्थिति को गंभीरता से लेते व क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों के सहयोग से लड़की बरामद कर मामले का पटाक्षेप करने की कोशिश की.
लड़की के परिजन अपने प्रभाव बल से लड़की को अपने घर ले गये. लेकिन दुश्मनी का भाव अंदर ही अंदर पनपता रहा व दोनों पक्ष एक दूसरे से प्रतिशोध की भावना को साथ लिए मौके की तलाश में लगे रहे. जनवरी माह में सरस्वती पूजा में रास्ता विवाद का बहाना बना खूनी संघर्ष हुआ व मारपीट में कई घायल भी हुए. लड़के वालों के घर व आटा चक्की वाले फूस के घर को जलाने के आरोप में भी कई लोग नामजद हुए थे. जातीय खुन्नस ने आखिर पुनः एक वारदात को अंजाम दिया.
लड़की के पिता सहित परिजनों पर घटना का लगाया आरोप: मृतक के भाई जुगेश ने जानकारी देते बताया कि हमलावर चार बाइक पर सवार थे. इनमें भूपेंद्र यादव, भाई राकेश यादव, अजय यादव, संतोष यादव, सुभाष यादव, जयजय राम यादव, ललन यादव के साथ उनके समर्थक आनंदी भगत, संजीत भगत व रंजीत भगत ने मौका ए वारदात पर घटना को अंजाम दिया व चलते बने. वैसे कुछ लोगों की जुबां पर जातीय उन्माद को बढ़ावा देने की साजिश की बात भी कहते निर्दोषों को भी फंसाने की बात सुनी जा सकती थी. मामला जो हो ऐसी भी चर्चा है कि दोनों पक्षों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है व भविष्य में भी घटना की पुनरावृत्ति भी हो सकती है.
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