अखबार में खाना परोसा तो हो सकती है जेल; जानिए सेहत को कितना नुकसान

Published by : Abhishek Pandey Updated At : 06 Jun 2026 1:50 PM

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सांकेतिक तस्वीर (फोटो/AI)

FSSAI Bans Serving Food In Newspapers : सावधान! अब अखबार में समोसा या वड़ा-पाव परोसा तो खैर नहीं. FSSAI ने देश भर के फूड वेंडर्स और रेस्टोरेंट्स के लिए जारी की सख्त चेतावनी, जानें शरीर के लिए यह कितना खतरनाक है.

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FSSAI Bans Serving Food In Newspapers : अगर आप भी शाम के वक्त ऑफिस से निकलते हुए या बाजार में घूमते हुए सड़क किनारे ठेले पर अखबार में लिपटा हुआ गरमा-गरम वड़ा-पाव, समोसा, ब्रेड पकोड़ा या चाट बड़े चाव से खाते हैं, तो अपनी यह आदत तुरंत बदल लीजिए.

आपकी यह छोटी सी पसंद आपको बेहद गंभीर रूप से बीमार बना सकती है. इस मामले में अब देश की सबसे बड़ी फूड सेफ्टी संस्था FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) ने कड़ा रुख अपनाया है. FSSAI ने देश के सभी रेस्तरां मालिकों, स्ट्रीट फूड वेंडर्स (ठेले वालों), कैटरर्स और छोटे दुकानदारों को सख्त चेतावनी जारी करते हुए खाने-पीने की चीजों को अखबार में पैक करने या परोसने पर तत्काल प्रभाव से रोक (Ban) लगा दी है.

मुंबई के मशहूर वड़ा-पाव वाले पर एक्शन के बाद आया फैसला

यह कड़ा आदेश हाल ही में मुंबई में हुई एक बड़ी छापेमारी के बाद जारी किया गया है. मुंबई के एक बहुत ही मशहूर वड़ा-पाव विक्रेता को अपने ग्राहकों को अखबार में खाना पैक करके देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था. इसके बाद FSSAI की पश्चिमी क्षेत्र टीम और मुंबई नगर निगम (BMC) ने मिलकर उस दुकान पर बड़ी संयुक्त कार्रवाई की. इस घटना के बाद अथॉरिटी ने साफ कर दिया है कि जो भी दुकानदार, हॉकर या मोबाइल फूड वेंडर इस आदेश को हल्के में लेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

आखिर अखबार में खाना खाना क्यों है ‘धीमा जहर’?

FSSAI ने इसके पीछे दो सबसे बड़े और वैज्ञानिक कारणों का खुलासा किया है, जिन्हें जानना हर नागरिक के लिए जरूरी है.

स्याही का केमिकल लोचा (Toxic Ink): अखबार की छपाई (Printing) में जिस स्याही का इस्तेमाल होता है, उसमें कई तरह के खतरनाक केमिकल्स, सिंथेटिक रंग, पिगमेंट और सीसा (Lead) जैसी भारी और जहरीली धातुएं होती हैं. जब कोई भी गर्म या तैलीय (Oily) खाना अखबार पर रखा जाता है, तो यह स्याही पिघलकर सीधे खाने में चिपक जाती है. लंबे समय तक ऐसा खाना खाने से यह केमिकल हमारे शरीर के अंगों को अंदर से खोखला करने लगता है.

बैक्टीरिया और वायरस : छपाई के बाद अखबार बंडलों में बंधकर, लॉजिस्टिक्स से होते हुए, हॉकरों और अनगिनत लोगों के हाथों से गुजरकर दुकानदारों तक पहुंचता है. इस पूरी यात्रा में अखबार पर धूल-मिट्टी के साथ-साथ कई खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस जमा हो जाते हैं. जब इसमें गर्म खाना रखा जाता है, तो ये कीटाणु पेट में जाकर फूड पॉइजनिंग, डायरिया और पेट के गंभीर इन्फेक्शन का कारण बनते हैं.

पहले से है कानूनन

अखबार में खाना लपेटना आज से नहीं, बल्कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशन 2018 के तहत ही पूरी तरह से बैन और गैरकानूनी है. लेकिन जमीन पर इसका पालन न होने की वजह से अब प्रशासन ने सख्ती से चेकिंग शुरू कर दी है.

कौन-कौन आता है इस दायरे में?नियमों का उल्लंघन होने पर क्या होगा?ग्राहकों के लिए FSSAI की सलाह
स्ट्रीट फूड वेंडर, रेस्तरां, क्लाउड किचन, कैटरर्स, फूड स्टॉल, हॉकर और छोटे दुकानदार.खाद्य सुरक्षा कानून (Food Safety Law) के तहत दुकान का लाइसेंस रद्द और भारी जुर्माना हो सकता है.अगर कोई अखबार में खाना दे, तो उसे तुरंत मना करें और जागरूक नागरिक की तरह इसकी शिकायत करें.

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लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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