क्या भारत में जल्द आने वाले हैं प्लास्टिक के नोट ? RBI ने सबकुछ साफ कर दिया

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Plastic Currency Notes

सांकेतिक तस्वीर (फोटो/AI)

Plastic Currency Notes : क्या भारत में जल्द बंद हो जाएंगे कागज के नोट? जानिए प्लास्टिक (पॉलिमर) नोटों को लेकर क्या है आरबीआई (RBI) का नया प्लान और गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस पर क्या कहा.

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Plastic Currency Notes : देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) के बीच, क्या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब कागज के नोटों की जगह प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोट लाने की तैयारी कर रहा है? इस सवाल का जवाब खुद आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दिया है.

उन्होंने शुक्रवार को साफ किया कि केंद्रीय बैंक इस समय देश में पॉलिमर-आधारित बैंक नोट (Polymer Banknotes) पेश करने की संभावनाओं की जांच कर रहा है, लेकिन फिलहाल इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए गवर्नर ने बताया कि यह प्रस्ताव अभी बहुत ही शुरुआती (Preliminary) चरण में है.

क्यों चर्चा में आए प्लास्टिक के नोट?

पिछले कुछ दिनों से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि आरबीआई जल्द ही देश में प्लास्टिक करेंसी नोटों का एक पायलट प्रोजेक्ट (टायल) शुरू कर सकता है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की हालिया बैठकों में इस एक दशक पुराने प्रस्ताव पर दोबारा चर्चा की गई है. कागज के मुकाबले प्लास्टिक नोटों के मुख्य रूप से दो बड़े फायदे होते हैं.

  • ये नोट जल्दी फटते या खराब नहीं होते और कागज के नोटों की तुलना में काफी ज्यादा चलते हैं.
  • ज्यादा टिकाऊ होने के कारण इन्हें बार-बार बदलने (Replacement) की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे सरकार का नोट छपाई का खर्च बचता है.

खबरों में सच्चाई है, लेकिन फैसला अभी नहीं हुआ

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा “जहां तक पॉलिमर नोटों का सवाल है, यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन (Under Consideration) है. जब भी इस पर कोई फैसला होगा, हम आपको सूचित करेंगे. हाल ही में जो खबरें आई हैं, उनमें कुछ हद तक सच्चाई जरूर है, लेकिन अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. हम इसके फायदे और नुकसान (Pros and Cons) का आकलन कर रहे हैं कि क्या ऐसा करना सही रहेगा.”

भारत में कैश की रिकॉर्ड डिमांड

यह चर्चा ऐसे समय में दोबारा शुरू हुई है जब देश में यूपीआई और डिजिटल पेमेंट्स बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद मार्केट में कैश (नकद) की मांग रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है. मई के मध्य तक देश में कुल ‘करेंसी इन सर्कुलेशन’ (बाजार में मौजूद कुल नकदी) ₹42.86 लाख करोड़ के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई है. इसके चलते वित्त वर्ष 2025 में नोटों की छपाई पर होने वाला खर्च भी काफी बढ़ गया है.

ऐसा नहीं है कि यह विचार पहली बार आया है. साल 2012 में भी सरकार ने कुछ चुनिंदा शहरों में ₹10 के 1 अरब (One Billion) प्लास्टिक नोटों का फील्ड ट्रायल करने की मंजूरी दी थी. हालांकि, उस समय तकनीकी चुनौतियों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी थी.

अगर भारत इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो वह उन देशों की लीग में शामिल हो जाएगा जो पहले से ही पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं. आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर और मलेशिया जैसे कई देश पहले ही पूरी तरह से या आंशिक रूप से प्लास्टिक करेंसी अपना चुके हैं.

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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