BRICS Summit 2026: मोदी-पुतिन-जिनपिंग की बैठक से भारत को क्या मिलेगा? UPI, कारोबार, तेल और टेक्नोलॉजी पर समझें असर

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पीएम मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन, फोटो ANI (File Photo)

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नई दिल्ली में होने वाली BRICS समिट पर दुनिया की नजर है. जानिए इस बैठक से भारत को व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और आम आदमी को क्या फायदे मिल सकते हैं.

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12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली BRICS समिट पर पूरी दुनिया की नजर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत BRICS देशों के नेता जुट रहे हैं. लेकिन इस बड़ी कूटनीतिक बैठक का भारत को क्या फायदा होगा? इसका असर सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं है. पेमेंट सिस्टम, कारोबार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार जैसे मुद्दे सीधे अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं.

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1. UPI और दूसरे देशों के पेमेंट सिस्टम जुड़े तो क्या होगा?

भारत BRICS देशों के बीच पेमेंट सिस्टम को जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसका मकसद सीमा पार भुगतान को आसान और कम लागत वाला बनाना है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डॉलर तुरंत खत्म हो जाएगा या BRICS की कोई नई करेंसी आ जाएगी. लकिन विदेश में पढ़ाई, यात्रा या कारोबार करने वाले भारतीयों के लिए भविष्य में भुगतान आसान और सस्ता हो सकता है.

2. रुपये में कारोबार बढ़ा तो भारत को क्या फायदा?

अगर BRICS देशों के साथ ज्यादा कारोबार स्थानीय मुद्राओं में होने लगता है तो भारत की डॉलर पर निर्भरता कुछ हद तक घट सकती है. इससे कंपनियों को मुद्रा बदलने की लागत और जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है.

3. रूस से तेल, BRICS से ऊर्जा सुरक्षा

रूस, UAE और सऊदी अरब जैसे देश भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं. BRICS में ऊर्जा सहयोग मजबूत होने से भारत को तेल और गैस की सप्लाई को ज्यादा सुरक्षित और विविध बनाने में मदद मिल सकती है.

4. भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप को क्या मिलेगा?

BRICS Startup Innovation Fund और Incubator Network जैसे प्रस्तावों पर काम हो रहा है. इनके जरिए भारतीय स्टार्टअप को दूसरे सदस्य देशों के बाजार, निवेशकों और टेक्नोलॉजी नेटवर्क तक पहुंच मिल सकती है.

5. चीन और रूस के साथ भारत की रणनीति

BRICS समिट से पहले भारत की कूटनीति का एक अहम पहलू रूस और चीन के साथ उसके रिश्ते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली में द्विपक्षीय बातचीत और दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और दूसरे रणनीतिक मुद्दों पर हो रही चर्चा पर सब की नजर है. वहीं, रॉयटर्स के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है. चीन के विदेश मंत्रालय ने दोनों नेताओं की मुलाकात की तैयारी की पुष्टि की है.

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ऐसे में BRICS भारत के लिए सिर्फ आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने और चीन के साथ मतभेदों के बीच संवाद बढ़ाने का भी अहम मौका है. भारत की कोशिश है कि रूस और चीन के साथ रिश्ते संभालते हुए वह अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाए.

आम आदमी को फायदा कब दिखेगा?

BRICS का कोई फैसला अगले दिन आम आदमी की जेब में पैसा नहीं डालेगा. इसका असर धीरे-धीरे दिख सकता है. जिसमें सस्ता और आसान अंतरराष्ट्रीय भुगतान, भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार, ऊर्जा आपूर्ति में मजबूती, स्टार्टअप के लिए निवेश और सप्लाई चेन बेहतर होने की उम्मीद है.

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