मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा तो महंगा हुआ कच्चा तेल, ब्रेंट 90 डॉलर के पार

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है. बुधवार को ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहा, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड में भी बढ़त दर्ज की गई.
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर हालात और बिगड़े तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं.
बुधवार को ब्रेंट क्रूड 92.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा, जो 1.53% की बढ़त है. वहीं WTI क्रूड 85.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिसमें 1.38% की तेजी रही.
क्यों बढ़ रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?
तेजी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ता तनाव है.
- अमेरिका, ईरान और ईरान समर्थित हूती समूह के बीच हालात और गंभीर हुए हैं.
- इस सप्ताह हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी का ऐलान किया.
- इससे तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
- मंगलवार को भी ब्रेंट और WTI दोनों करीब 2% की तेजी के साथ पिछले लगभग पांच सप्ताह के सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुए थे.
शिपिंग और सप्लाई पर क्या असर पड़ा?
तनाव का असर तेल ले जाने वाले जहाजों पर भी दिखने लगा है.
- चीन और भारत के लिए सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर जा रहे दो टैंकरों ने रेड सी में अपना रास्ता बदल दिया.
- दोनों जहाज हूती की धमकियों के बाद वापस स्वेज नहर की ओर मुड़ गए.
- हालांकि, सऊदी अरब का यानबू रेड सी एक्सपोर्ट टर्मिनल सामान्य रूप से काम करता रहा.
दूसरी ओर, सैन्य कार्रवाई भी जारी रही.
- अमेरिकी सेना ने दक्षिणी और पश्चिमी ईरान में हमले किए.
- ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया.
- दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में एक टैंकर भी हमले की चपेट में आया.
क्या दूसरी जगहों से भी सप्लाई का खतरा बढ़ा?
सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, दूसरे इलाकों से भी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है.
| वजह | क्या हुआ |
| कजाकिस्तान | कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम ने तेल लेना अस्थायी रूप से रोक दिया |
| ब्लैक सी | तेल टर्मिनल पर हमलों के बाद सप्लाई प्रभावित हुई |
| सऊदी अरब | मई में लगातार तीसरे महीने कच्चे तेल का निर्यात घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा |
अब बाजार की नजर किस पर है?
अब निवेशकों की नजर अमेरिका के क्रूड ऑयल स्टॉक डेटा पर है. विश्लेषकों (Analysts) का अनुमान है कि 17 जुलाई को खत्म हुए सप्ताह में अमेरिकी कच्चे तेल का भंडार 5 लाख बैरल घटा हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो यह लगातार दूसरा सप्ताह होगा, जब स्टॉक में गिरावट दर्ज होगी. इससे कीमतों को और सहारा मिल सकता है.
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लेखक के बारे में
By सौम्या शाहदेव
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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