रानीगंज में 139 डेंजर जोन से 28778 परिवारों को शिफ्ट करने की पहल, ईसीएल ने दिया फ्लैट और कैश का ऑफर

Updated:
विज्ञापन

रानीगंज के कोलियरी इलाके में भू-धंसान की वजह से क्षतिग्रस्त मकान. फोटो : प्रभात खबर

ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने रानीगंज मास्टर प्लान के तहत भूमिगत आग और धंसान से प्रभावित 139 गांवों (डेंजर जोन के रूप में चिह्नित) के 28,778 परिवारों को पुनर्वासित करने की तैयारी कर ली है. सरकारी जमीन पर बसे लोगों को फ्लैट और नकद का विशेष पैकेज दिया जायेगा. पूरा विवरण यहां पढ़ें.

विज्ञापन

आसनसोल से शिवशंकर ठाकुर की रिपोर्ट

विज्ञापन

रानीगंज मास्टर प्लान (Raniganj Master Plan) के तहत भूमिगत आग और धंसान प्रभावित 139 गांवों में बसे 28,778 परिवारों को किसी अन्य जगह पर बसाने की तैयारी ईसीएल ने कर ली है. ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के सीएमडी सतीश झा ने कहा है कि 139 गांवों में सरकारी जमीनों पर बसे लोगों के लिए स्पेशल पैकेज दिया जायेगा. इसके तहत एक फ्लैट और 10.15 लाख रुपए नकद दिये जायेंगे. जो लोग अपनी जमीन पर हैं, उन्हें पैकेज के साथ जमीन और घर का भी मुआवजा दिया जायेगा.

10304 फ्लैट का शुरू हुआ निर्माण, बने सिर्फ 5616

इन 139 साइट्स को वर्षों पहले डेंजर जोन के रूप में चिह्नित किया जा चुका है. आवासीय व्यवस्था के साथ उन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए ही रानीगंज मास्टर प्लान बना था. केंद्र सरकार ने इसके लिए 12 अगस्त 2009 को 2661.73 करोड़ रुपए आवंटित किये थे. इसके तहत पश्चिम बर्धमान जिला के अंडाल, जामुड़िया और बाराबनी प्रखंड में 10,304 फ्लैट का निर्माण शुरू हुआ. इसमें 5,616 आवास बनकर तैयार है. इसमें शिफ्ट करने पर ही लोगों को पैकेज का लाभ मिलेगा.

1997 में उठी थी भूमिगत आग और धंसान प्रभावित लोगों को बचाने की मांग

रानीगंज कोयलांचल में भूमिगत आग और धंसान से प्रभावित क्षेत्रों में बसे लोगों को पुनर्वासित करने की मांग वर्ष 1997 में शुरू हुई थी. भारतीय कोलियरी मजदूर सभा (सीटू) के महासचिव हराधन राय, जो सांसद भी थे, ने 31 जुलाई 1997 को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. माकपा के जिला सचिव गौरांग चटर्जी ने बताया कि इस पर लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास के पक्ष में अपना फैसला सुनाया.

ये भी पढ़ें: ईसीएल की इंटर्नल रिपोर्ट में खुलासा- झारखंड से ज्यादा बंगाल में होती है कोयले की चोरी

नये पैकेज में क्या है प्रस्ताव?

  • हर परिवार को 2 फ्लैट दिये जायेंगे.
  • यदि कोई परिवार एक फ्लैट लेता है, तो उसे एक फ्लैट के 5 लाख रुपए नकद मिलेंगे.
  • 2 साल तक जीवन यापन के लिए प्रतिदिन 500 रुपए दिये जायेंगे.
  • प्रभावित परिवारों को शिफ्टिंग के लिए 50 हजार रुपए दिये जायेंगे.
  • रेंटल असिस्टेंस के एक लाख रुपए अलग से दिये जायेंगे.
  • हर परिवार को एक फ्लैट के साथ 10.15 लाख रुपए और 2 फ्लैट के साथ 5.15 लाख रुपए नकद मिलेंगे.

कानूनी लड़ाई पर यूनियन ने खर्च किये 15 लाख रुपए

अदालती प्रक्रिया में यूनियन का 15 लाख रुपए से अधिक का खर्च हुआ था. इसके लिए कोयलांचल के श्रमिकों ने चंदा दिया था. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर 12 अगस्त 2009 को केंद्र सरकार ने रानीगंज कोलफील्ड एरिया पुनर्वास परियोजना के लिए 2661.73 करोड़ रुपए के फंड के आवंटन की मंजूरी दी.

ये भी पढ़ें: जामुड़िया में जोरदार विरोध के बाद ईसीएल ने बहाल की 3 गांवों की बिजली आपूर्ति

10 वर्ष में होना था सभी लोगों का पुनर्वास

रानीगंज कोलफील्ड पुनर्वास परियोजना का कार्य पूरा करने के लिए 10 वर्ष की समयसीमा तय की गयी थी. राज्य सरकार की एजेंसी आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. सर्वे में 141 साइट चिह्नित किये गये. इन साइट्स में सरकारी जमीनों पर कब्जा करके बसे 22,668 परिवार, निजी जमीनों पर बसे 6,101 परिवार और 222 संस्थानों (क्लब, धार्मिक स्थल आदि) को शिफ्ट करने की सूची बनी. इसके आधार पर कार्य शुरू हुआ. कार्य 2019 तक पूरा होना था, लेकिन आधिकरिक तौर पर 161 लोगों को फ्लैटों की चाबी सौंपी गयी. वह भी वहां से लौट आये. 28,778 फ्लैटों में से सिर्फ 5,616 फ्लैट ही बनकर तैयार हुए हैं. लोगों के शिफ्ट नहीं होने के कारण वह भी जर्जर हो रहा है.

ये भी पढ़ें: इसीएल के दौरे पर पहुंचे कोल इंडिया के मुख्य सतर्कता अधिकारी

802.40 करोड़ रुपए हो गये खर्च, काम कुछ नहीं

रानीगंज कोलफील्ड पुनर्वास परियोजना के तहत 30 जून 2026 तक कुल 802.40 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. इसमें ईसीएल ने 10.33 करोड़ रुपए और आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (अड्डा) ने 792.07 करोड़ रुपए खर्च किये हैं. इसमें जमीन अधिग्रहण से लेकर फ्लैट निर्माण तक का कार्य शामिल है. समय पर काम पूरा नहीं होने से लागत बढ़ती गयी. 11 अगस्त 2025 को राज्य सरकार ने स्टेट कैबिनेट की बैठक में रिवाइज्ड रानीगंज मास्टर प्लान के लिए दूसरे आरआर पैकेज को मंजूरी दी. रिवाइज्ड पैकेज का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है. केंद्र ने इस पर अब तक कोई जवाब नहीं दिया है.

ईसीएल की बढ़ी परेशानी

चिह्नित किये गये 141 साइट्स पर बसे लोगों को दूसरी जगह नहीं बसा पाने की वजह से ईसीएल प्रबंधन की समस्या बढ़ गयी है. 141 साइट का अधिकांश हिस्सा ईसीएल का है. कंपनी के सीएमडी सतीश झा कहते हैं कि 141 में से 2 साइट के लोगों कंपनी ने शिफ्ट किया. इसके कारण साइट की संख्या अब 139 है. देश का सबसे पुराना कोल माइंस यहीं है. यहां 200 साल से भी अधिक पहले से खनन हो रहा है. भूमिगत खदानों में जो पिलर हैं, वे एक समयसीमा तक ही लोड लेंगे. कभी-कभी पिलर दरक जाते हैं, जिससे भू-धंसान की संभावना बनी रहती है. धंसान होने पर सारी जिम्मेदारी ईसीएल पर आ जाती है.

ईसीएल के सीएमडी सतीश झा और कंपनी की ओर से लोगों को दिये गये ऑफर का विवरण.
ईसीएल के सीएमडी सतीश झा और कंपनी की ओर से लोगों को दिये गये ऑफर का विवरण.

ईसीएल के सीएमडी कहते हैं कि लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए 2,661 करोड़ रुपए आवंटित किये जा चुके हैं. 16 साइट से लोगों को तुरंत हटाना जरूरी है. कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. ईसीएल ने डेंजर जोन में बने अपने आवासीय इलाकों को शिफ्ट कर दिया है. 7 जगहों पर भूमिगत आग थी, उसे बंद किया गया है. राज्य सरकार का काम अटका पड़ा है. इससे भूमिगत आग के भड़कने का खतरा बना हुआ है. लोगों के शिफ्ट हो जाने से पूरे इलाके को भर दिया जायेगा. इससे भूमिगत आग फिर नहीं सुलग पायेगा.

ये भी पढ़ें: कोल इंडिया के चेयरमैन ने किया इसीएल का दौरा

लोग आवासों में शिफ्ट होने को तैयार नहीं

29 जुलाई को राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल और रानीगंज के विधायक पार्थ घोष ने प्रभावित हरीशपुर गांव के लोगों के साथ बैठक की. मंत्री ने लोगों को डेंजर जोन से निकलकर फ्लैटों में शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया. स्थानीय लोगों ने प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया. लोगों ने कहा कि उन्हें सोनपुरबाजारी पुनर्वास परियोजना के तहत सुविधा चाहिए. मंत्री ने एक के बदले 2 फ्लैट का भी ऑफर दिया, लेकिन लोग नहीं माने.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola