कोसी अंचल में तो सालों भर दी जाती है बेटियों की बलि!

सुपौल : दुर्गापूजा में लोग मन्नतें पूरी होने पर माता को खुश करने के लिए बलि देते हैं, लेकिन कोसी अंचल में तो सालों भर बेटी की बलि दी जाती है. साफ है कि यहां बेटी और बकरी में अंतर मिट सा गया है. जनगणना के आंकड़ों पर गौर करने से साफ होता है कि […]
सुपौल : दुर्गापूजा में लोग मन्नतें पूरी होने पर माता को खुश करने के लिए बलि देते हैं, लेकिन कोसी अंचल में तो सालों भर बेटी की बलि दी जाती है. साफ है कि यहां बेटी और बकरी में अंतर मिट सा गया है. जनगणना के आंकड़ों पर गौर करने से साफ होता है कि स्त्रियों के प्रति समाज का मानस आज की तारीख में भी नहीं बदला है.
यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि जैसे-जैसे समाज शिक्षित होता गया और मेडिकल साइंस में वैज्ञानिक उपकरण विकसित होते गये, बेटियों की संख्या घटती गयी. 2011 की जनगणना के मुताबिक सुपौल में 1000 पुरुषों पर 925, सहरसा में 906, मधेपुरा में 914, अररिया में 921, किशनगंज में 946, पूर्णिया में 930 व कटिहार में 916 महिलाएं हैं. कहीं बेटियों को जन्म लेने से पहले ही मार तो नहीं दिया जा रहा है? क्या ऐसे सवाल आपको विचलित नहीं करते? क्या यह भयावह सच नहीं है
कि बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है और भाग्यवश जो बच जाती है, उन्हें कहीं न कहीं विभिन्न रूपों में सामाजिक विकृतियों का सामना करना पड़ता है. जैसे सामूहिक दुष्कर्म, छेड़खानी, घरेलू हिंसा, ट्रैफिकिंग, वैश्यावृत्ति आदि-आदि. क्या यह उचित है? सामाजिक कार्यकर्ता नवनीता सिंह गुड्डी का सीधा सा सवाल है- बेटी को मरवाओगे तो दुल्हन कहां से लाओगे. कोसी में एक मशहूर कहावत है कि बेटी के जन्म में धरती सवा हाथ भीतर चली जाती है और बेटे के जन्म में सवा हाथ ऊपर.
मिली जानकारी के मुताबिक, आज की तारीख में भी कुछ इलाकों में जैसे ही गृहस्वामी को खबर मिलती है कि बेटी हुई है, तुरंत उसके वध की तैयारी शुरू हो जाती है. गला दबाकर नवजात को यमलोक पहुंचा दिया जाता है. बताया जाता है कि कन्या वध के कारण ही बेटियों की संख्या घट रही है. पूर्व में कोसी कंसोर्टियम द्वारा कराये गये सर्वे में भी इस सनसनीखेज सच का खुलासा हुआ था. सर्वेक्षण के क्रम में इसका मूल कारण तिलक दहेज की कुरीति ही खुलकर सामने आयी थी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










