कोसी अंचल में तो सालों भर दी जाती है बेटियों की बलि!

Published at :28 Sep 2017 4:10 AM (IST)
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कोसी अंचल में तो सालों भर दी जाती है बेटियों की बलि!

सुपौल : दुर्गापूजा में लोग मन्नतें पूरी होने पर माता को खुश करने के लिए बलि देते हैं, लेकिन कोसी अंचल में तो सालों भर बेटी की बलि दी जाती है. साफ है कि यहां बेटी और बकरी में अंतर मिट सा गया है. जनगणना के आंकड़ों पर गौर करने से साफ होता है कि […]

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सुपौल : दुर्गापूजा में लोग मन्नतें पूरी होने पर माता को खुश करने के लिए बलि देते हैं, लेकिन कोसी अंचल में तो सालों भर बेटी की बलि दी जाती है. साफ है कि यहां बेटी और बकरी में अंतर मिट सा गया है. जनगणना के आंकड़ों पर गौर करने से साफ होता है कि स्त्रियों के प्रति समाज का मानस आज की तारीख में भी नहीं बदला है.

यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि जैसे-जैसे समाज शिक्षित होता गया और मेडिकल साइंस में वैज्ञानिक उपकरण विकसित होते गये, बेटियों की संख्या घटती गयी. 2011 की जनगणना के मुताबिक सुपौल में 1000 पुरुषों पर 925, सहरसा में 906, मधेपुरा में 914, अररिया में 921, किशनगंज में 946, पूर्णिया में 930 व कटिहार में 916 महिलाएं हैं. कहीं बेटियों को जन्म लेने से पहले ही मार तो नहीं दिया जा रहा है? क्या ऐसे सवाल आपको विचलित नहीं करते? क्या यह भयावह सच नहीं है

कि बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है और भाग्यवश जो बच जाती है, उन्हें कहीं न कहीं विभिन्न रूपों में सामाजिक विकृतियों का सामना करना पड़ता है. जैसे सामूहिक दुष्कर्म, छेड़खानी, घरेलू हिंसा, ट्रैफिकिंग, वैश्यावृत्ति आदि-आदि. क्या यह उचित है? सामाजिक कार्यकर्ता नवनीता सिंह गुड्डी का सीधा सा सवाल है- बेटी को मरवाओगे तो दुल्हन कहां से लाओगे. कोसी में एक मशहूर कहावत है कि बेटी के जन्म में धरती सवा हाथ भीतर चली जाती है और बेटे के जन्म में सवा हाथ ऊपर.

मिली जानकारी के मुताबिक, आज की तारीख में भी कुछ इलाकों में जैसे ही गृहस्वामी को खबर मिलती है कि बेटी हुई है, तुरंत उसके वध की तैयारी शुरू हो जाती है. गला दबाकर नवजात को यमलोक पहुंचा दिया जाता है. बताया जाता है कि कन्या वध के कारण ही बेटियों की संख्या घट रही है. पूर्व में कोसी कंसोर्टियम द्वारा कराये गये सर्वे में भी इस सनसनीखेज सच का खुलासा हुआ था. सर्वेक्षण के क्रम में इसका मूल कारण तिलक दहेज की कुरीति ही खुलकर सामने आयी थी.

बेटियों को खुली हवा में चहकने दीजिये
गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 (पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट) कानून के तहत लिंग चयन या लिंग जांच के पश्चात गर्भ में पल रहा भ्रूण लड़का है या लड़की, ये जानना कानूनन अपराध है. सामाजिक कार्यकर्ता भगवानजी पाठक कहते हैं कि बेहतर समाज के लिए अति आवश्यक है कि लड़के व लड़कियां दोनों को समान रूप से फलने-फूलने का मौका मिले. बेटी बचाओ आंदोलन की केंद्रीय संयोजक शिल्पी सिंह ने बताया कि समाज में बेटियों के प्रति नकारात्मक सोच में बदलाव अति आवश्यक है.
बेटियों की भ्रूण हत्या रुके, उनका विभिन्न स्तरों पर शोषण व उत्पीड़न रुके और लड़कियों को भी समान हक व समान सुअवसर मिले. उन्हें भी दुनियां में सांस लेने, खुली हवा में चहकने, महकने व इंद्रधनुषी छटा बिखेरने का अवसर प्राप्त हो.
गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 (पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट) कानून के तहत लिंग चयन या लिंग जांच के पश्चात गर्भ में पल रहा भ्रूण लड़का है या लड़की, ये जानना कानूनन अपराध है. सामाजिक कार्यकर्ता भगवानजी पाठक कहते हैं कि बेहतर समाज के लिए अति आवश्यक है कि लड़के व लड़कियां दोनों को समान रूप से फलने-फूलने का मौका मिले. बेटी बचाओ आंदोलन की केंद्रीय संयोजक शिल्पी सिंह ने बताया कि समाज में बेटियों के प्रति नकारात्मक सोच में बदलाव अति आवश्यक है. बेटियों की भ्रूण हत्या रुके,
उनका विभिन्न स्तरों पर शोषण व उत्पीड़न रुके और लड़कियों को भी समान हक व समान सुअवसर मिले. उन्हें भी दुनियां में सांस लेने, खुली हवा में चहकने, महकने व इंद्रधनुषी छटा बिखेरने का अवसर प्राप्त हो.
भ्रूण हत्या मामले में पुलिस प्रशासन काफी गंभीर है. अगर ऐसा है तो यह घोर अन्याय है. यह सच है कि बेटी मरेगी तो दुल्हन कहां से आयेगी. लोगों को समझना होगा कि बेटी-बेटा में कोई फर्क नहीं है.
सुपौल पिछले दिनों सदर थाना क्षेत्र के परसरमा गांव स्थित एक बांसबाड़ी में नवजात बच्ची मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गयी. बच्ची झाड़ी में लावारिस अवस्था में थी. जिसे एक महिला ने उठा कर स्थानीय वार्ड पंच अहिल्या देवी के हवाले कर दिया. वार्ड पंच द्वारा उक्त नवजात बच्ची को घर लाया गया, जहां उसका उपचार कराया गया. बाद में सिविल सर्जन बिल्टू
पासवान और बाल कल्याण समिति के सहायक निदेशक सुनील कुमार सिंह वार्ड पंच के घर पहुंचे और बच्ची का हाल जाना. चूंकि बच्ची नवजात थी, लिहाजा सिविल सर्जन और बाल कल्याण समिति के निदेशक ने उक्त बच्ची को विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान सहरसा को सुपुर्द कर दिया.
मरौना थाना क्षेत्र के मरौना दक्षिण पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय कोइरीपट्टी पुलिया के समीप 28 मई की संध्या एक नवजात का शव मिलने से सनसनी फैल गयी. नवजात को देखने से पता चल रहा था कि कुछ घंटे पूर्व ही बच्चा को किसी ने फेंका है.
पिपरा थाना क्षेत्र अंतर्गत एनएच 106 कमलपुर पुल के समीप झाड़ी में 03 जून को एक नवजात बच्ची मिलने के बाद लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. कमलपुर निवासी कमल राम ने झाड़ी में नवजात को देख इसकी सूचना आस-पड़ोस के लोगों को दी थी. साथ ही नवजात को झाड़ी से निकाल कर पीएचसी लाया. जहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार कर बचा लिया.
बीते 16 जून को निर्मली थाना अंतर्गत दिघिया गांव के कमला स्थान के पास कोसी किनारे एक नवजात बच्ची मृत अवस्था में देखी गयी. लोगों द्वारा तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे थे. लोगों का कहना था कि बेटी होने के कारण ही इसकी जान ली गयी है.
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