जान बचानी हो, तो उप स्वास्थ्य केंद्र हरदी से भाग जाइये...

Published at :01 Sep 2017 5:56 AM (IST)
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जान बचानी हो, तो उप स्वास्थ्य केंद्र हरदी से भाग जाइये...

सुपौल : सदर प्रखंड के हरदी दुर्गास्थान में संचालित उप स्वास्थ्य केंद्र का हाल बेहाल है. इस इलाके के हजारों की आबादी के उपचार का भार इसी उप स्वास्थ्य केंद्र पर है. इसके बावजूद चिकित्सक व कर्मियों के अभाव में यहां के लोगों को चिकित्सा पाने के लिए बाहर के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ […]

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सुपौल : सदर प्रखंड के हरदी दुर्गास्थान में संचालित उप स्वास्थ्य केंद्र का हाल बेहाल है. इस इलाके के हजारों की आबादी के उपचार का भार इसी उप स्वास्थ्य केंद्र पर है. इसके बावजूद चिकित्सक व कर्मियों के अभाव में यहां के लोगों को चिकित्सा पाने के लिए बाहर के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. ऐतिहासिक धरोहर के रूप में शुमार वीर लोरिक की इस धरती पर मां वन देवी भी विराजती हैं.

यहीं कारण है कि मां वन देवी की अराधना के लिए यहां पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. कई बार रात्रि विश्राम के दौरान किसी श्रद्धालु की अचानक तबीयत खराब हो जाने की स्थिति में उनके इलाज के लिए परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. विभागीय उदासीनता के कारण लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की जा रही है. इसके कारण आसपास के दर्जनों गांव के हजारों परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

एएनएम के जिम्मे है स्वास्थ्य केंद्र
गौरतलब हो कि आस-पास के लगभग 10 हजार लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेवारी इसी उप स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है. इस स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक के पदस्थापन तो दूर महज एक एएनएम की प्रतिनियुक्ति की गयी है, जो कभी कभार ही उप स्वास्थ्य केंद्र पर आती हैं. क्योंकि पंचायत में चलाये जा रहे टीकाकरण कार्यक्रम में वे ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों पर ही रहती हैं. ऐसे में उपचार कराने पहुंचे संवेदनशील मरीज को यहां से निराश ही लौटना पड़ता है. इस धरती को शुरू से ही पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की बात उठ रही है. संसाधन के अभाव में आज भी यहां की चिकित्सीय व्यवस्था पूरी तरह लचर बनी हुई है.
मरीजों को लाचार हो झोला छाप चिकित्सकों का लेना पड़ता है सहारा
लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा लोगों को सुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के भले ही लाख दावे किये जा रहे है. लेकिन यहां की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था सरकार के स्वास्थ्य नीति की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है. लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जहां मरीज नहीं आते है. वहां अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना कर दी गयी है, जहां मरीजों की काफी भीड़ रहती है. वहां अभी भी उप स्वास्थ्य केंद्र ही है. ग्रामीण अजय भारती ने बताया कि हरदी दुर्गास्थान में बने उप स्वास्थ्य केंद्र को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की मांग वर्षों से यहां के लोग उठा रहे हैं. बावजूद आज तक सरकार द्वारा इस दिशा में कोई पहल नहीं की गयी है. इसका खामियाजा यहां के मरीजों को भुगतना पर रहा है. विजय कुमार ने कहा कि यहां काफी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं. रात्रि विश्राम के दौरान श्रद्धालु के बीमार होने पर काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस वजह से मरीजों को लाचार हो कर झोला छाप चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है. जबकि रवींद्र कुमार ने बताया कि जहां एक भी मरीज नहीं आते हैं वहां सरकार द्वारा एपीएचसी स्थापित कर दी गयी है. वहीं जहां इसकी दरकार है वहां सुविधा ही नहीं दी है. इस वजह से हमलोगों को काफी परेशानी होती है. स्थिति जान बचानी हो तो उप स्वास्थ्य केंद्र से भाग जाने वाली है.
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