जन्माष्टमी पर रास लीला का आयोजन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 Aug 2017 5:17 AM (IST)
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आस्था. हाथी घोड़ा पालकी-जय कन्हैया लाल की घोष से गूंजता रहा राधाकृष्ण मंदिर श्रीकृष्णजन्मोत्सव का त्योहार जिले भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. सोमवार की देर रात जैसे ही विधानपूर्वक प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा दिया गया कि सभी राधाकृष्ण मंदिरों में हाथी घोड़ा पालकी-जय कन्हैया लालकी सहित अन्य जयघोष से गुंजायमान हो उठा. सुपौल […]
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आस्था. हाथी घोड़ा पालकी-जय कन्हैया लाल की घोष से गूंजता रहा राधाकृष्ण मंदिर
श्रीकृष्णजन्मोत्सव का त्योहार जिले भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. सोमवार की देर रात जैसे ही विधानपूर्वक प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा दिया गया कि सभी राधाकृष्ण मंदिरों में हाथी घोड़ा पालकी-जय कन्हैया लालकी सहित अन्य जयघोष से गुंजायमान हो उठा.
सुपौल : भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाये जाने वाले श्रीकृष्णजन्मोत्सव का त्योहार जिले भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. सोमवार की देर रात जैसे ही विधानपूर्वक प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा दिया गया कि सभी राधाकृष्ण मंदिरों में हाथी घोड़ा पालकी-जय कन्हैया लालकी सहित अन्य जयघोष से गूंजायमान हो उठा.
साथ ही रात भर श्रद्धालुओं की भीड मंदिर परिसर में उमड़ने लगी. जन्माष्टमी पर कृष्ण मंदिरों में भव्य समारोह व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कई स्थानों पर जगह जगह श्रीकृष्ण की झांकियां सजाई गयी. साथ ही श्रीकृष्ण रास लीला का आयोजन भी किया गया. जन्माष्टमी के दिन कई भक्तजन दिन भर व्रत रखने के उपरांत आधी रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उपरांत अपने –
अपने व्रत का समापन किया. हिंदू कैलेंडर के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भाद्र मास भादों में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है. जन्माष्टमी को अलग – अलग स्थानों पर गोकुलाष्टमी, कृष्णाष्टमी, श्रीजयंती के नाम से भी जाना जाता है. वहीं यह त्योहार महाराष्ट्र में जन्माष्टमी दही हांडी के लिए विख्यात है.
पिपरा प्रखंड के निर्मली पंचायत स्थित हटवरिया गांव में आयोजित तीन दिवसीय श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेला का उद्घाटन मंगलवार को ग्रामीण बुजुर्ग बल्लव राय के द्वारा फीता काटकर किया गया. मेला में श्रीकृष्ण भगवान के प्रतिमा के अलावा मां भगवती, शंकर जी, पार्वती, हनुमान, गणेश, राधा सहित विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमा बनाकर पूजा अर्चना की गयी.
मेला में पूजा समिति के द्वारा दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें जूनियर खेसारी लाल के द्वारा एक से बढ़ कर एक भोजपुरी गाने सहित हिंदी गाने की प्रस्तुति पर दर्शकों ने भरपूर आनंद उठाया. बारिश होने के बावजूद भी दर्शक रात भर जूनियर खेसारी लाल के कार्यक्रम का आनंद उठाते रहे. वहीं पूजा समिति द्वारा मेला में शाति व्यवस्था बनाए रखने के लिये भोलेंटियर की व्यवस्था की गयी थी.
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिये रहने की भी व्यवस्था पूजा समिति के द्वारा की गयी थी. जबकि मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण व राधा सहित अन्य देवी-देवताओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही थी. श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर भगवान के दर्शन कर उनके समक्ष दीप जलाए तथा मन्नतें मांगी. वहीं मेला में सभी प्रकार की दुकानें लगायी गयी थी. दृश्य को देख बच्चों का उत्साह चरम पर था. वहीं मेला घूमने आये श्रद्धालुओं ने जम कर खरीददारी की.
भक्तजनों में बना रहा उत्साह का माहौल
कई दशकों से सदर प्रखंड कर्णपुर गांव के उत्तर व दक्षिण स्थित सार्वजनिक राधाकृष्ण मंदिरों में भव्य तरीके से जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता रहा है. तीन दिवसीय त्योहार को लेकर भक्तजनों में काफी उत्साह का माहौल बना रहा. सोमवार की देर रात भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी. वहीं मंगलवार को पूजा के उपरांत दिन भर श्रद्धालुओं ने भगवान की प्रतिमा पर दही, बांसुरी सहित अन्य प्रसाद चढ़ा कर भगवान श्रीकृष्ण से मनवांछित फल प्रदान किये जाने की कामना की. वहीं आयोजन कमेटी द्वारा उक्त मंदिर परिसरों में मेला व सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया.
जन्माष्टमी के मौके पर बुधवार की सुबह विधान पूर्वक प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया. साथ ही उक्त दोनों मंदिर परिसर में मटका फोड़ प्रतियोगिता कराया गया. जहां तकरीबन 25 से 30 फीट की ऊंचाई पर लटकाये गये मटका को तोड़ने के लिए कई टीमों ने हिस्सा लिया. आयोजन समिति द्वारा मटका को तोड़ने के लिए एक नियम बनाया गया था.
जिस नियम का अनुपालन करते हुए मटका को तोड़ने वाले टीम को आयोजन समिति द्वारा पुरस्कृत किया गया. राधाकृष्ण परिसर में मटका को तोड़ने के लिए हिस्सा लिये टीम के सदस्यों द्वारा हरेक शृंखला के निर्माण होने के साथ ही दर्शकों द्वारा ताली की गड़गड़ाहट से उत्साह बढ़ाने का प्रयास किया जाता रहा. मटका फोड़ प्रतियोगिता के उपरांत सभी विसर्जित प्रतिमाओं का नगर भ्रमण कराने के उपरांत समीप स्थित पोखर में श्रद्धालुओं ने अश्रुपूर्ण भक्तिभाव के साथ भगवान श्रीहरि नारायण का जप कर प्रतिमाओं को जल प्रवाह किया.
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