पुलिस के लिए गले की हड्डी बना वीरेंद्र

Published at :03 Jul 2017 4:35 AM (IST)
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पुलिस के लिए गले की हड्डी बना वीरेंद्र

छापेमारी के बाद भी नहीं हो पा रही गिरफ्तारी 29 जून की रात पुलिस को चकमा देकर पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था आरोपित सुपौल : कुख्यात अपराधी वीरेंद्र राय पुलिस के लिये गले का हड‍्डी बना हुआ है. इसके गिरेबान पर हाथ डालने में पुलिस को सफलता नहीं मिल पा रही है. अपराध […]

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छापेमारी के बाद भी नहीं हो पा रही गिरफ्तारी

29 जून की रात पुलिस को चकमा देकर पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था आरोपित
सुपौल : कुख्यात अपराधी वीरेंद्र राय पुलिस के लिये गले का हड‍्डी बना हुआ है. इसके गिरेबान पर हाथ डालने में पुलिस को सफलता नहीं मिल पा रही है. अपराध जगत से तालुक्कात रखने वालों की माने तो इसका एक पांव भारत में होता है तो दूसरा नेपाल में. हालांकि पुलिस अधीक्षक डॉ कुमार एकले का कहना है कि वीरेंद्र की जल्द ही गिरफ्तारी होगी. खैर, पुलिस इसके पीछे पड़ी हुई है. जगह-जगह छापेमारी के बाद भी उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है. बताते चलें कि यह वही वीरेंद्र है जो 29 जून की रात पुलिस को चकमा देकर पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था. फरार राय पर रंगदारी,
चोरी व लूट के कई कांड पहले से अंकित है. किसनपुर थाने में इसके विरूद्ध दुष्कर्म का भी मामला दर्ज है. ताजा मामला केशव हत्याकांड का है. इधर, अब तक केशव का शव बरामद नहीं किया जा सका है. कोसी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही खराब मौसम के कारण शव तलाशी अभियान को तत्काल रोक दिया गया है. केशव अपहरण और हत्या मामले में गिरफ्तार आरोपित वीरेंद्र राय के पुलिस अभिरक्षा से भाग जाने के मामले में सदर थाना में मामला भी दर्ज किया गया है. पिपरा थाना में पदस्थापित पुअनि शंभुधारी सिंह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
वीरेंद्र की निगरानी में तैनात पुलिस सस्पेंड
वीरेंद्र की निगरानी में तैनात पिपरा के पुलिस अधिकारी और कर्मी को सस्पेंड कर दिया गया है. निगरानी की जिम्मेदारी पिपरा थाना में पदस्थापित सअनि मदन पौद्दार, विजय कुमार, हवलदार शत्रुघ्न मंडल, सिपाही अजय कुमार, चौकीदार देव पासवान, जयप्रकाश कुमार व लीला रामनरेश सौंपी गयी थी. लेकिन इन अधिकारी और कर्मी की उदासीनता और लापरवाही के कारण कांड के मुख्य आरोपित वीरेंद्र राय करीब तीन बजे रात को निगरानी में तैनात पुलिस कर्मी को चकमा देकर भाग गया. एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी सभी पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है. बताया जाता है कि फिलहाल वीरेंद्र नेपाल में विचरण कर रहा है. कुल मिला कर सवाल उठता है कि आखिर इसके गिरेबान पर हाथ डालने में पुलिस को कब सफलता मिलेगी. वैसे भी अब तक केशव का शव बरामद नहीं किया जा सका है. भले ही छापेमारी का दौर जारी हो लेकिन अपराध जगत से तालुक्कात रखने वालों की माने तो इसकी गिरफ्तारी आसान नहीं है. वैसे पुलिस पदाधिकारियों का कहना है कि कानून का हाथ बहुत लंबा होता है. देर-सबेर वीरेंद्र राय को दबोच ही लिया जायेगा.
वैज्ञानिक अनुसंधान के तहत जो बातें सामने आयी, उसके मुताबिक केशव के पिता से जिस नंबर से रंगदारी मांगी गयी थी, उस सिम की खरीदारी राम कुमार कामत के द्वारा वीरेंद्र राय व पवन मिश्रा के कहने पर ही गयी थी. सिम का उपयोग वीरेंद्र व पवन द्वारा रंगदारी मांगने के लिए किया गया. सिम को खरीदते समय तीनों अभियुक्त क्रमश: पवन, वीरेंद्र व राम कुमार साथ में ही था. सीसीटीवी फुटेज से इस आशय का खुलासा हुआ है. वीरेंद्र चाहे जहां भी हो उसे गिरफ्तार कर लिया जायेगा. कानून का हाथ बहुत लंबा होता है.
डॉ कुमार एकले, एसपी, सुपौल
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