UGC रेगुलेशन एक्ट 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के खिलाफ फूटा छात्रों का गुस्सा, 2 फरवरी को पूरे बिहार में आंदोलन का ऐलान

Edited by Pritish Sahay
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2 फरवरी को बिहार में छात्र करेंगे विरोध प्रदर्शन

UGC: यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के खिलाफ बिहार के छात्रों में गुस्सा है. पटना यूनिवर्सिटी सहित पूरे बिहार में एससी, एसटी और ओबीसी समाज के छात्र उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. छात्र 2 फरवरी को इस रोक के खिलाफ आंदोलन करने वाले हैं.

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UGC: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षण संस्थानों में न्याय और समानता दिलाने के लिए बनाए गए ‘उच्च शिक्षा में समता संवर्धन रेगुलेशन एक्ट 2026’ पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से मात्र 15 दिनों के भीतर रोक लगाए जाने के विरोध में छात्र समाज में भारी आक्रोश है. ​इस दमनकारी फैसले और बहुजन छात्रों के साथ हो रहे ऐतिहासिक अन्याय के खिलाफ 2 फरवरी को अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद की जयंती के अवसर पर पटना यूनिवर्सिटी एवं पटना सहित पूरे बिहार में SC/ST/OBC समाज के छात्र उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने वाले हैं. अम्बेडकर छात्रावास, पटेल छात्रावास, कपूरी छात्रावास, PG रानीघाट छात्रावास आंदोलन में शामिल रहेंगे

​संस्थागत भेदभाव का अंत

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जातीय भेदभाव, जानबूझकर कम नंबर देना और रैगिंग के हजारों मामले सामने आते हैं, जिससे तंग आकर दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के होनहार छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर होते हैं. UGC एक्ट 2026 इन कुरीतियों को रोकने का एक सशक्त माध्यम था.

​न्यायपालिका के दोहरे मापदंड पर सवाल

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि किसान आंदोलन और EWS जैसे कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख अलग रहता है, लेकिन जैसे ही 85% आबादी (SC/ST/OBC) के हक की बात आती है, न्यायपालिका तुरंत रोक लगा देती है. ​

आबादी के अनुसार हिस्सेदारी

हमारी मांग है कि निजी क्षेत्र, न्यायपालिका, जल-जंगल-जमीन, उद्योग और खनिज संपदा जैसे सत्ता के तमाम स्रोतों में SC/ST/OBC को उनकी 85% आबादी के अनुपात में आरक्षण और हिस्सेदारी मिलनी चाहिए.

​अस्तित्व की लड़ाई

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बहुजन समाज को केवल चुनाव के समय हिंदू माना जाता है, लेकिन अधिकारों के समय उन्हें हाशिए पर धकेल दिया जाता है. UGC एक्ट 2026 का विरोध करने वाली ताकतें सामाजिक न्याय एवं हिंदू विरोधी हैं. हमारी स्पष्ट मांग है कि ​UGC एक्ट 2026 पर लगी रोक को तत्काल हटाया जाए और इसे पूर्णतः लागू किया जाए. ​निवेदक मंडल 2.0 में छात्र युवा संघर्ष समिति पटना बिहार के अमर आजाद पासवान, मनीष यादव, गौतम आनंद, अंबुज पटेल, गौतम कुमार, काशिफ यूनुस, सुधीर रजक, शाश्वत कुमार, ओमकार कुमार और अजय यादव

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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