सीवान में चोरी हुई बोलेरो का बीमा दावा खारिज करना पड़ा भारी, ब्याज सहित 6.19 लाख रुपये का भुगतान

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चेक सौंपते आयोग के अध्यक्ष

Bolero Insurance Claim: बोलेरो चोरी होने पर बीमा कंपनी ने एफआईआर में देरी का हवाला देकर दावा खारिज कर दिया. लेकिन, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को ब्याज सहित 6,19,906 रुपये का भुगतान करे. यह मामला बीमा कंपनियों के लिए एक सीख है.

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Bolero Insurance Claim: चोरी हुई बोलेरो गाड़ी के बीमा दावे को प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई देरी के आधार पर खारिज करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के आदेश के बाद न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने शिकायतकर्ता को ब्याज सहित कुल 6,19,906 रुपये का भुगतान किया. आयोग के आदेश के अनुपालन में बीमा कंपनी ने दो चेक के माध्यम से राशि आयोग में जमा करायी, जिसे बाद में शिकायतकर्ता को सौंप दिया गया.

सीवान शहर से चोरी हुई थी बोलेरो

गोपालगंज जिले के कटेया थाना क्षेत्र के दुधौना गांव निवासी उदय भान उपाध्याय ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एवं अन्य के विरुद्ध त्रुटिपूर्ण सेवा को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शिकायत दर्ज करायी थी.

शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी बोलेरो गाड़ी सीवान शहर में डॉक्टर रामजी चौधरी के क्लीनिक के समीप से चोरी हो गयी थी. घटना की सूचना महादेवा ओपी के साथ-साथ बीमा कंपनी को भी दी गयी थी. पुलिस ने मामले की जांच की और चोरी की घटना को सत्य पाया.

प्राथमिकी में देरी को बनाया था दावा खारिज करने का आधार

कोरोना काल में व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त रहने के कारण चोरी की घटना की प्राथमिकी दर्ज कराने में विलंब हुआ था. बीमा कंपनी ने इसी देरी को आधार बनाते हुए शिकायतकर्ता के बीमा दावे को खारिज कर दिया था.

शिकायतकर्ता का कहना था कि चोरी के समय बोलेरो गाड़ी बीमा कंपनी से बीमित थी और बीमा पॉलिसी प्रभावी थी. ऐसे में केवल प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई देरी के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उचित नहीं था. इसी मामले को लेकर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.

आयोग ने तथ्यों की समीक्षा के बाद सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष जयराम प्रसाद एवं सदस्य मनमोहन कुमार ने की. आयोग ने मामले से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की गंभीरता से समीक्षा की.

सुनवाई के बाद 5 जून 2026 को आयोग ने विपक्षी बीमा कंपनी को आदेश दिया कि आदेशित राशि का भुगतान 30 दिनों के अंदर शिकायतकर्ता को किया जाए.

6,19,906 रुपये के दो चेक आयोग में जमा

आयोग के आदेश के अनुपालन में बीमा कंपनी ने निर्धारित अवधि के बाद 25 दिनों के विलंब से दो चेक के माध्यम से कुल 6,19,906 रुपये की राशि आयोग में जमा की. इसमें 5,24,000 रुपये और 95,906 रुपये के दो चेक शामिल थे.

निर्धारित अवधि के बाद भुगतान किये जाने के कारण विलंब अवधि की ब्याज राशि भी भुगतान में शामिल की गयी. इस तरह शिकायतकर्ता को मूल राशि के साथ विलंब अवधि का ब्याज भी प्राप्त हुआ.

अधिवक्ता की मौजूदगी में शिकायतकर्ता को सौंपे गये चेक

आयोग ने शिकायतकर्ता के अधिवक्ता की पहचान सुनिश्चित करने के बाद दोनों चेक शिकायतकर्ता को प्रदान कर दिये. राशि प्राप्त होने के बाद उदय भान उपाध्याय ने संतुष्टि व्यक्त की. इसके बाद आयोग ने मामले का निष्पादन कर दिया.

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Vivek Kumar

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