जिला यक्ष्मा केंद्र में ओपीडी सेवा ठप

Updated at : 16 Mar 2026 9:46 PM (IST)
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जिला यक्ष्मा केंद्र में ओपीडी सेवा ठप

सूबे के स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले के जिला यक्ष्मा केंद्र की व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई है. पिछले करीब छह दिनों से नियमित डॉक्टर के नहीं रहने के कारण ओपीडी सेवा बंद पड़ी है. इससे टीबी मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मरीजों को जांच और इलाज के लिए सदर अस्पताल के सामान्य ओपीडी में भेजा जा रहा है, जहां टीबी से संबंधित विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध नहीं है.

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प्रतिनिधि,सीवान. सूबे के स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले के जिला यक्ष्मा केंद्र की व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई है. पिछले करीब छह दिनों से नियमित डॉक्टर के नहीं रहने के कारण ओपीडी सेवा बंद पड़ी है. इससे टीबी मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मरीजों को जांच और इलाज के लिए सदर अस्पताल के सामान्य ओपीडी में भेजा जा रहा है, जहां टीबी से संबंधित विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध नहीं है. जानकारी के अनुसार डॉक्टर सुरेंद्र कुमार ने दिसंबर 2023 में सदर अस्पताल में योगदान दिया था. योगदान के बाद उनकी ड्यूटी यक्ष्मा विभाग में लगा दी गई थी. लेकिन विभाग में पदस्थापना मिलते ही वे लंबी छुट्टी पर चले गए. इसके बाद उन्होंने 16 जनवरी 2024 से यक्ष्मा विभाग के ओपीडी में सेवा देना शुरू किया. बताया जाता है कि पीजी में चयन होने के बाद वे 11 मार्च से एजुकेशन लीव पर चले गए, जिसके बाद से विभाग में डॉक्टर का पद खाली हो गया है.डॉक्टर के अवकाश पर जाने के बाद सीडीओ डॉ. अशोक कुमार ने सिविल सर्जन और वरीय अधिकारियों को पत्र लिखकर वैकल्पिक डॉक्टर की मांग की है, लेकिन अब तक किसी डॉक्टर की स्थायी पदस्थापना नहीं की गई है.जिला यक्ष्मा केंद्र के ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 50 मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे, जबकि करीब 40 मरीजों की स्पूटम जांच भी की जाती थी. नियमित डॉक्टर नहीं रहने से मरीजों की पहचान और इलाज की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है. अप्रशिक्षित डॉक्टरों के भरोसे एमडीआर टीबी का इलाज पिछले छह दिनों में केवल सात नए टीबी मरीजों की ही पहचान हो सकी है.सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जिन डॉक्टरों की ड्यूटी यहां लगाई गई है, उनमें से अधिकांश को टीबी के इलाज का विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला है.बताया जाता है कि जिन मरीजों की स्पूटम जांच रिएक्टिव आ रही है, उन्हीं को दवा दी जा रही है, जबकि एक्स-रे और अन्य जांच के आधार पर कई मरीजों को दवा नहीं मिल पा रही है. जिले में करीब 3000 से अधिक टीबी मरीज नियमित दवा ले रहे हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं रहने से इनका फॉलोअप भी प्रभावित हो रहा है.वहीं एमडीआर टीबी जैसे जटिल मरीजों के इलाज में प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम की आवश्यकता होती है, लेकिन फिलहाल सामान्य डॉक्टरों के भरोसे ही मरीजों का इलाज चल रहा है. बोले सिविल सर्जन डॉक्टर सुरेंद्र कुमार के एजुकेशन लीव पर जाने से यक्ष्मा विभाग का ओपीडी प्रभावित है.वैसे सदर अस्पताल के सामान्य ओपीडी में मरीजों को देखा जा रहा है.बहुत जल्द जिला यक्ष्मा केंद्र के लिए डॉक्टर की व्यवस्था कर दी जाएगी. डॉ श्रीनिवास प्रसाद, सिविल सर्जन,सीवान

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