जांच के पहले ही टीम पर उठने लगे सवाल
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 06 Oct 2024 8:23 PM
अपने कार्यकलापों को लेकर पिछले कई माह से चर्चा में बना नगर परिषद, अब दो कर्मियों के निलंबन व बर्खास्तगी को लेकर सवालों के घेरे में है. वित्तीय अनियमिता के आरोप में किये गये कार्रवाई को चंद घंटे बाद ही कार्यपालक पदाधिकारी ने यह कहते हुए वापस ले लिया कि जांच टीम के रिपोर्ट के आधार पर अब आगे कार्रवाई की जायेगी. अब नवगठित चार सदस्यीय जांच टीम पर ही सवाल उठने लगे हैं
संवाददाता,सीवान. अपने कार्यकलापों को लेकर पिछले कई माह से चर्चा में बना नगर परिषद, अब दो कर्मियों के निलंबन व बर्खास्तगी को लेकर सवालों के घेरे में है. वित्तीय अनियमिता के आरोप में किये गये कार्रवाई को चंद घंटे बाद ही कार्यपालक पदाधिकारी ने यह कहते हुए वापस ले लिया कि जांच टीम के रिपोर्ट के आधार पर अब आगे कार्रवाई की जायेगी. अब नवगठित चार सदस्यीय जांच टीम पर ही सवाल उठने लगे हैं.साथ ही इस पूरे प्रकरण की निगरानी से जांच कराये जाने की अपर मुख्य सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग से की गयी है. चार सदस्यीय टीम को दी गयी जांच की जिम्मेदारी नगर परिषद में कार्यरत स्थापना सहायक निर्भय कुमार पांडेय व संविदा लिपिक अमरजीत कुमार के खिलाफ लगे आरोपों की जांच चार सदस्यीय टीम को दी गयी है.कार्यपालक पदाधिकारी अरविंद कुमार सिंह द्वारा गठित टीम में सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधित पदाधिकारी उज्जल तिवारी,सहायक टाउन प्लानिंग पर्यपेक्षक शैलेंद्र कुमार,प्रभारी प्रधान सहायक विजय शंकर सिंह व संविदा सहायक संतोष कुमार चौधरी शामिल हैं.जिन्हें तीन दिन के अंदर जांच कार्य पूर्ण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. जांच समिति में शामिल सदस्यों की भूमिका संदिग्ध इस पूरे मामले की जांच अपर मुख्य सचिव नगर विकास एवं आवास विभाग बिहार सरकार से कराने की सामाजिक कार्यकर्ता मणिलाल महतो ने मांग की है.इस आशय के भेजे गये पत्र में आरोप लगाया है कि जांच समिति के एक सदस्य पूर्व से ही स्थापना शाखा में कार्यरत हैं.दूसरे सदस्य द्वारा जिस मामले में अनियमितता की बात सामने आयी है,उस भुगतान से संबंधित सभी विपत्रों को पारित किया गया है.ऐसे में पूरे प्रकरण की निगरानी से जांच कराया जाना चाहिये. यह है पूरा मामला नगर विकास एवं आवास विभाग, के वर्ष 2017 के 13 अप्रैल के एक आदेश के आलोक में नगर परिषद् सीवान के सेवानिवृत कर्मियों व मृत कर्मियों के पंचम एवं षष्ट्म वेतन में अधिक भुगतान की गए राशि का समायोजन कर अवशेष अन्तर राशि के भुगतान करना था. इस क्रम में यह बात सामने आयी कि स्थापना सहायक निर्भय कुमार पांडेय व संविदा लिपिक अमरजीत कुमार ने नियमों की अनदेखी कर बगैर प्रतीक्षा सूची तैयार किए एवं स्वीकृति प्राप्त किए विशेष का चयन कर विपत्र प्रस्तुत कर भुगतान कर दिया गया. कार्यपालक पदाधिकारी ने इस मामले में तत्काल जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थापना सहायक निर्भय कुमार पांडेय को निलंबित व संविदा लिपिक अमरजीत कुमार को बर्खास्त कर दिया.हालांकि इसके तीन घंटे बाद ही अपने ही कार्यपालक पदाधिकारी ने अपने आदेश को यह कहते हुए वापस ले लिया कि पुन: जांच होगी. क्या कहते हैं अधिकारी चार सदस्यीय टीम को जांच दी गयी है.टीम तीन दिन में रिपोर्ट देगी.रिपोर्ट के बाद आगे कार्रवाई की जायेगी.जांच टीम के सदस्यों पर सवाल खड़ा करने संबंधित आरोप मेंरे संज्ञान में नहीं है. अरविंद कुमार सिंह ,कार्यपालक पदाधिकारी
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