निजी अस्पतालों की जांच हुई शुरु

जिले के शहरी व प्रखंड क्षेत्रों में संचालित निजी हॉस्पिटल, नर्सिंग होम और जांच घरों पर मंगलवार से बड़े पैमाने पर छापेमारी की गयी. जिला प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से स्वास्थ्य सेवाओं के निजी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. प्रशासन को विभिन्न स्रोतों से मिली शिकायतों के आधार पर यह पाया गया कि कई निजी स्वास्थ्य संस्थान विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा है. जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ ओपी लाल,जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अरविंद कुमार एवं सीडीओ डॉ अशोक कुमार के नेतृत्व में तीन टीमों ने जांच शुरू कर दी है.
प्रतिनिधि, सीवान. जिले के शहरी व प्रखंड क्षेत्रों में संचालित निजी हॉस्पिटल, नर्सिंग होम और जांच घरों पर मंगलवार से बड़े पैमाने पर छापेमारी की गयी. जिला प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से स्वास्थ्य सेवाओं के निजी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. प्रशासन को विभिन्न स्रोतों से मिली शिकायतों के आधार पर यह पाया गया कि कई निजी स्वास्थ्य संस्थान विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा है. जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ ओपी लाल,जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अरविंद कुमार एवं सीडीओ डॉ अशोक कुमार के नेतृत्व में तीन टीमों ने जांच शुरू कर दी है. मंगलवार को सीडीओ डॉ अशोक कुमार के नेतृत्व में एक जांच टीम ने लगभग एक दर्जन नर्सिंग होम एवं जांच घरों की जांच की. जांच के दौरान कुछ ने कागज दिखाया तथा कुछ ने जांच टीम से समय मांगा.जांच के दौरान सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि कई संस्थान क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स अधिनियम का उल्लंघन कर रहे हैं. वहीं बिहार क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स नियमावली तथा केंद्र सरकार के संशोधित नियमों के तहत निर्धारित न्यूनतम मानकों,जैसे प्रशिक्षित स्टाफ, जरूरी उपकरण और बुनियादी सुविधाएं का भी पालन नहीं किया जा रहा है. जांच में अयोग्य कर्मियों द्वारा इलाज, जीवन रक्षक उपकरणों की कमी, बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन में लापरवाही और अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी खतरनाक अनियमितताएं चिन्हित की गई हैं. यह पूरी कार्रवाई क्रिमिनल मिसलेनियस नंबर-10651/2025 (थाना बसंतपुर केस संख्या-626/2024) में पटना हाईकोर्ट द्वारा 13 मई 2025 को दिए गए आदेश के अनुपालन में की जा रही है. न्यायालय ने जिले के सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों की सघन जांच के स्पष्ट निर्देश दिए थे. जिलाधिकारी द्वारा तीन सदस्यीय टीमों का गठन किया गया है, जिन्हें 13 मार्च से एक सप्ताह के भीतर चिन्हित क्षेत्रों में गहन जांच कर साक्ष्य सहित रिपोर्ट सौंपनी थी. लेकिन जांच टीम द्वारा मंगलवार 17 मार्च से कार्रवाई शुरू की गई.
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